बालोद/धमतरी। महर्षि वाल्मीकि के पुनीत पावन जयंती एवं प्रादेशिक सम्यक प्रबोधन सम्मेलन के अवसर पर भारतीय दलित साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के तत्वाधान को गोंडवाना धमतरी (छ्त्तीसगढ) भवन में भव्य आयोजन हुई.. जिसमें मुख्य अतिथि के आसंदी पर विराजमान राज्यपाल पुरस्कृत व्याख्याता श्री धर्मेंद्र कुमार श्रवण रहें । अध्यक्षता कर रहे श्रीमती सुशीला वाल्मीकि, विशिष्ट अतिथि की विशेष भूमिका को सुशोभित कर रहे श्री संजय कुमार मैथिल जी संयोजक, श्रीमती मीना भारद्वाज अध्यक्ष पंजीकृत शिक्षक कला प्रतिभा अकादमी छत्तीसगढ़ साथ ही दलित साहित्य अकादमी के संस्थापक श्री जी. आर. बंजारे ज्वाला दलित साहित्य अकादमी के प्रांताध्यक्ष के सानिध्य में कार्यक्रम संपन्न हुई..।

आतिथ्य उद्बोधन में अन्तर्मन के भव्य विचारों को पल्लवित करते हुए धर्मेंद्र कुमार श्रवण ने कहा कि विश्व पटल पर असंख्य जीव-जंतु , प्राणी पदार्थ होते हुए भी मानव को जो दर्जा मिला है वह सचमुच अद्भुत व अनोखापन के साथ परिलक्षित झलकते हुए नजर आता है; जो विचारों से देश-काल परिस्थिति अनुकूल परिमार्जित होते रहती है : क्योंकि उसमें जो मानवीय शक्ति, संकल्पना , सोचने की योग्यता, दक्षता , क्षमता , चिंतन-मनन, परखने की सूझ-बूझ नि:संदेह बेजोड़ व अद्भुत है । इस प्रकार इस अनोखेपन के कारण मानव को चिंतनशील व सिरमौर प्राणी कहा जाता है । गौरवान्वित करने वाली अपने भावनाओं के साथ मानवीय शक्ति व भक्ति के कारण सचमुच सौभाग्यशाली प्राणी को मानव समाज की श्रेणी में गिना जाता है ..। पर हरेक मानव में यह बात संभव नहीं होती । मानव ही एक ऐसा प्राणी है जो अपने ज्ञान रुपी दिव्य पुंज से सद्भावना, सहानुभूति, प्रेम, दया, करूणा जैसे विशेषताओं से प्रभावित होकर एवं सद्गुणी बनकर जागृत करने व भारतीय संस्कृति को संवारने व सहेजने का प्रयास निरंतर सतत्, अनवरत रूप से करते रहते है ।

इसी तरह धरती माता भारत-भूमि के कोख में कई श्रृषि मनीषी , महानुभूति, कलमकार, कलाकार, संगीतकार, लेखक, काव्यकार , साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, संत-महात्मा, वैज्ञानिक, धर्म-गुरु अवतरित हुए और अपने कृतित्व व कर्तव्य के द्वारा सद्कर्म से पहचाने जाने लगे और आज भी उनकी विचारधारा जीवंत है, जो भारतीय परम्परा को संरक्षित कर संजोए हुए है ।
ऐसे ही विश्व भाषा के महाकाव्य रामायण के रचनाकार एवं भारतीय संस्कृति के अधिष्ठाता आदि कवि महर्षि वाल्मीकि जी हमारी परम्परा के पुरोधा रहे जिन्होंने कालजयी रचना के माध्यम से भारतीय साहित्यगार को जिस प्रकार समृद्ध किया वह सचमुच प्रशंसनीय व अद्भुत स्तुत्य है । जिन्होंने अपने पैनी लेखनी के सशक्त साधनों के द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवनी को जीवंत रखने में सफलीभूत रहें, लव और कुश को संस्कारों से भरा संस्कृति की शिक्षा व दीक्षा दी गई । इसी कारण समाज में महर्षि वाल्मीकि रामायण जैसे महाकाव्य की रचना कर महान धर्म-गुरु ब्रह्म श्रेष्ठ आदि कवि प्रेरणामयी जीवनी से विश्व पटल के सारे चैतन्य प्राणी आलोकित हो रहा है ..उनके इस कृतित्व से मानव समाज आज पुलकित हो रहा है और उनके आदर्शों को आत्मसात कर रहे हैं ..।
मानवीय समाज में महाकाव्य के अधिष्ठाता वाल्मीकि महर्षि जी इस सृष्टि का आदि और अंत का संपूर्ण ज्ञान रखनेवाले अध्यात्मिक दृष्टिकोण को उजागर व परिलक्षित करने वाले , समाज को दशा व दिशा को नियंत्रित व निर्धारण करने वाले ऐसे महान व्यक्ति हुए जिनके जीवनगाथा से समाज के सभी संवर्ग, संप्रदायों को धर्म को उत्साहित करनेवाली प्रेरणा मिलती है । आधुनिक परिप्रेक्ष्य में दृष्टिगत रखते हुए अपनी बात के माध्यम से बहुसंख्यक वर्ग को वाल्मीकि की अमर गाथा को जिन्होंने उनकी कृति , महान पूर्वजों जिनके व्यक्तित्व से कठोर तपस्या , साधना से युगों-युगों तक अमिट छाप से त्याग व आदर्शों को अपनाने की आवश्यकता है सहजेने की जरूरत है जिससे देश व समाज का सर्वागिण विकास हो सके ,जिससे भारतीय संस्कृति व परम्परा को धर्म-कर्म-मर्म के द्वारा पहचाना जा सकें।
कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्तित्व किसी व्यक्ति के व्यवहार, भावनाओं, और विचारों के पैटर्न को कहते हैं. व्यक्तित्व में अंतर्निहित और अर्जित दोनों तरह की व्यवहार संबंधी विशेषताएं शामिल होती हैं। व्यक्तित्व में मूड, दृष्टिकोण, और राय भी शामिल होते हैं. व्यक्तित्व, किसी व्यक्ति को दूसरे से अलग करता है।
कृतित्व किसी व्यक्ति के कार्यों में उसका व्यक्तित्व झलकता है… व्यक्ति का सोच-विचार, व्यवहार, आचार-विचार , चिन्तन -मनन, परख, सूझ-बूझ, आदत , धर्म दर्शन और संस्कार, उसके कार्यों में दिखते हैं । व्यक्तित्व और कृतित्व से जुड़ी हुई बातों अपने विचार को परिमार्जित करने का प्रयास किया गया कि व्यक्तित्व और कृतित्व, किसी व्यक्ति की पहचान का आधार होते हैं। हर व्यक्ति का व्यक्तित्व अलग होता है और उसमें अनूठी व अनोखापन की विशेषताएं होती हैं। समय देश-काल परिस्थिति अनुसार व्यक्तित्व, ज़िंदगी और पर्यावरण कारकों से बदलता रहता है। अपने अभिव्यक्ति के अंत में पर्यावरण शिक्षा को आज की परिवेश की प्रमुखता बताते हुए पेड़ों की महत्व और वृक्षारोपण पर प्रकाश डालते हुए एक बहुत ही सुंदर पर्यावरण गीत गाकर श्रोता समाज को मंत्रमुग्ध कर तालियों की गड़गड़ाहट से दिल जीत लिया..।
इस तरह से प्रांताध्यक्ष श्री जी आर बंजारे ज्वाला के मार्गदर्शन में शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यक, अध्यात्मिक, धार्मिक व विविध मंचों व प्लेटफार्म में कर्मठता का पहचान बनाने वाले सुधिजन, गुणिजन, सुधिजनों को सम्मानीय अतिथिगणों के कर कमलों सम्मानित किया गया। पर्यावरण मित्र पुरुषोत्तम लाल दिल्लीवार, गोपी लाल बघेल, रमेश कुमार भुआर्य, राकेश कुमार रजक, सियाराम साहू, खूब लाल साहू, श्रीमती सीमा शर्मा,श्रीमती कविता शर्मा, श्रीमती कोमलता साहू, कविता कोशले, श्री गोपालदास मानिकपुरी, श्री हरीश कुमार साहू, हरेश जंघेल, सुश्री महक निर्मलकर , श्रीमती पूर्णिमा निर्मलकर, मानिकपुरी आदि विद्वत संवर्गों को राज्य के विभिन्न जिलों से आए हुए विविध विधाओं में पारंगत प्रबुद्ध जनों को हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं एवं बधाइयां संप्रेषित की गई और उन्हें बधाई स्वरुप नित नये आयामों के साथ कार्य करने की नसीहत देते हुए अवार्ड 2024 के मानद उपाधि की सर्वोच्च अंलकरण से धमतरी के धरा पहुंचे हुए साथियों को सम्मानित किया गया । समापन के पूर्व बेला पर कार्यक्रम के मुखिया और दलित साहित्य अकादमी संस्थापक व आयोजक श्री जी आर बंजारे ज्वाला एवं अतिथियों के कर-कमलों द्वारा जय हिन्द के नारों के साथ मंच को गुंजायमान करते हुए प्रबोधन सम्यक सम्मेलन के मुख्य अतिथि धर्मेंद्र कुमार श्रवण राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक को पगड़ी पहनाकर , आकर्षक अतिथि सम्मान फ्रेमिंग युक्त अभिनंदन पत्र, सुरक्षा कवच के रुप शाॅल, श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया ।
