बच्चे चाह रहे हैं हमें चाहिए पुराना टीचर पर अधिकारी कर रहे हैं शाला प्रबंधन समिति को गुमराह, पढ़िए आगे का हाल क्या चल रहा है सांकरा स्कूल में?



नहीं सुलझ पाया है अब तक हायर सेकेंडरी स्कूल सांकरा का मामला, वाणिज्य के व्याख्याता को कर दिया विभाग ने बच्चों से दूर, पढ़ाई हो रही है प्रभावित

बालोद ।बालोद ब्लाक के सांकरा ज हायर सेकेंडरी स्कूल वाणिज्य के व्याख्याता विवेक धुर्वे को पीपरछेड़ी हायर सेकेंडरी स्कूल में अटैच किए जाने से 100 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गई है। इस समस्या को सुलझाने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी उल्टा मामले को नया मोड़ देने पर तुले हुए हैं। विगत दिनों शाला प्रबंधन समिति की बैठक उपरांत मामले में कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन दिया जाना था। लेकिन अधिकारियों ने मामले की मीडिया में आने के बाद कहा कि बच्चों को आंदोलन करने की जरूरत नहीं है। एसडीएम कार्यालय में आकर शाला प्रबंधन समिति और जो भी प्रमुख हैं वह मिले। जब इसी सिलसिले में मंगलवार को शाम करीब 4 बजे एसडीएम कार्यालय बालोद में शाला प्रबंधन समिति और स्कूल के प्रमुखों सहित स्थानीय सरपंच प्रतिनिधि की मुलाकात हुई तो मामला कुछ और ही मोड़ दे दिया गया। अधिकारियों द्वारा शाला प्रबंधन समिति को यह कहकर गुमराह कर दिया गया कि जिस व्याख्याता विवेक धुर्वे को पीपरछेड़ी में अटैच किया गया है, वह तो खुद ही स्कूल से जाना चाहता था और डीईओ कार्यालय में आवेदन भी दिया था तो फिर क्यों उसे आप लोग वापस लाना चाहते हैं। उसे वापस सांकरा स्कूल भेजने के बजाय क्यों ना हम आसपास के कमरौद या कोई स्कूल से वाणिज्य विषय के शिक्षक की व्यवस्था करते हैं? जब अधिकारियों द्वारा इस तरह की बातें कही गई तो शाला प्रबंधन समिति सहित सरपंच प्रतिनिधि हतप्रभ रह गए। उन्हें एकाएक इन बातों पर यकीन नहीं हुआ लेकिन वे चाहते थे कि जैसे भी हो समस्या का हल होना चाहिए और शिक्षक भी कमी दूर कर बच्चों की पढ़ाई को सुचारू रूप से संचालित किया जाना चाहिए। इस बात पर आगे रणनीति बनी तो एसडीएम द्वारा कहा गया है कि शुक्रवार को स्वयं स्कूल आकर व्यवस्था देखेंगे और जो हो सकता है जरूर किया जाएगा। इस बैठक के उपरांत जब मीडिया को और संबंधित शिक्षक को अधिकारियों द्वारा गुमराह किए जाने की बात सामने आई तो पड़ताल की गई कि वाकई में जो अधिकारी बोल रहे हैं वह बात कितनी सच है? विवेक धुर्वे से भी इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने सत्यता उजागर करते हुए कहा कि उन्होंने लगभग 4 महीने पहले अपनी स्वास्थ्य गत कारणों (साइटिका) के चलते अर्जुंदा के स्कूल में स्थानांतरण हेतु आवेदन दिया था। लेकिन उनके आवेदन पर उसी समय ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा कहा गया कि यह संभव नहीं हो पाएगा। वे अर्जुंदा इसलिए जाना चाहते थे ताकि उन्हें अपने निवास भिलाई से स्कूल आने जाने की दूरी कम हो। उन्होंने इस संबंध में अपनी चार माह पूर्व दिए गए आवेदन की प्रति भी हमें सबूत के तौर पर भेजी हैं। जिसमें अर्जुंदा स्कूल का जिक्र है ना कि पीपरछेड़ी स्कूल का। जहां उन्हें अभी अटैच किया गया है। ऐसे में सवाल यही उठता है कि अधिकारी आखिर क्यों गुमराह कर रहे हैं। नाम प्रकाशित न करने की शर्तों पर शाला प्रबंधन समिति से जुड़े कुछ लोगों द्वारा बताया गया कि विवेक धुर्वे की शैक्षणिक कार्यों में सक्रियता से कुछ शिक्षक चिढ़ते हैं और जब पीपरछेड़ी में उन्हें अटैच किया गया है तो वे अब नहीं चाह रहे हैं कि वापस वे शिक्षक किसी भी तरीके से वापसी सांकरा स्कूल में कर पाए लेकिन दूसरी ओर वाणिज्य संकाय के बच्चे उन्हें वापस लाना चाहते हैं। इस संबंध में बच्चे एकजुट है और शाला प्रबंधन समिति सहित प्राचार्य को अपना आवेदन भी दे चुके हैं कि हमें उसी शिक्षक से ही पढ़ाई करनी है। क्योंकि सामने परीक्षा है अगर दूसरे शिक्षक आते हैं या शिक्षक की व्यवस्था नहीं होती है तो पढ़ाई दोनों ही स्थिति में प्रभावित हो सकती है । क्योंकि वर्षो से जिस शिक्षक से बच्चे अध्ययन कर रहे हैं उनसे पढ़ाई करना ज्यादा आसान होता है । ना कि अचानक सत्र के अंतिम महीनों में दूसरे शिक्षक की व्यवस्था कर औपचारिकता पूरी करने से। कहीं ना कहीं यह बात निकल कर सामने आ रही है कि शिक्षा के मंदिर में भी कुछ शिक्षक राजनीति कर रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल रहे हैं। बहरहाल सच्चाई तो सबके सामने आनी ही है । बच्चे विवेक धुर्वे के पक्ष में है और उन्हीं से पढ़ाई करना चाहते हैं। उन्हें वापस लाने की बात कर रहे हैं। तो दूसरी ओर शाला प्रबंधन समिति भी अब विचार कर रही है कि अधिकारी क्या निर्णय सुनाते हैं और बच्चे क्या चाहते हैं। उस हिसाब से वे भी आगे की रणनीति बनाएंगे। आंदोलन करना फिलहाल स्थगित रखा गया है। शुक्रवार को एसडीम सहित शिक्षा विभाग अधिकारी सांकरा स्कूल आने का आश्वासन दिए हैं। जहां समस्या का समाधान निकाला जाएगा ।

क्या कहा अध्यक्ष ने

इस संबंध में जब हमने शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भूपत बघेल से बात की तो उन्होंने कहा कि एसडीएम से मिलने गए थे उन्होंने समस्या हल करने का आश्वासन दिया है। लेकिन यह बात भी पता चली की जिन्हें हम वापस लाना चाह रहे हैं उक्त व्याख्याता विवेक द्वारा स्वयं सांकरा स्कूल से जाने के लिए आवेदन दिया गया था । ये जानकर पहले तो हमें हैरानी हुई लेकिन जब बाद में सच्चाई का पता चला कि यह मामला तो अभी का नहीं बल्कि चार माह पहले का है और वे अपने स्वास्थ्यगत कारणों से अपने निवास से नजदीक के स्कूल में जाने आवेदन दिए थे जो कि उनकी मांगे पूरी हुई भी नहीं फिर भी वह सांकरा स्कूल में पदस्थ होकर पढ़ा रहे हैं यह जानकरहमें अधिकारियों द्वारा हमें गुमराह किए जाने जैसी बात प्रतीत हो रही है। पूरी सच्चाई हमें बताई नहीं जा रही है। आखिर वह ऐसा क्यों किए समझ नहीं आया। इस संबंध में जब अधिकारी स्वयं स्कूल आएंगे तो उनसे जवाब मांगेंगे।

क्या कह रहे हैं सरपंच

सरपंच वारूणी शिवेंद्र देशमुख ने कहा कि हम भी चाहते हैं की पढ़ाई बिल्कुल प्रभावित न हो और बच्चों की इच्छा अनुसार शिक्षक की व्यवस्था हो जाए। अगर विवेक धुर्वे को वापस लाया जा सकता है तो इसके लिए जरूर प्रयास किया जा रहा है। या विभाग द्वारा भी आसपास के स्कूल से व्यवस्था बनाने की बात कही गई है।

क्या कहते हैं प्रभावित शिक्षक

विवेक धुर्वे, जिन्हें पीपरछेड़ी में अटैच किए हैं उनका कहना है कि मैंने 23 जुलाई 2024 को शिक्षा विभाग में अन्य विद्यालय में संलग्नीकरण के लिए आवेदन दिया था। जिसमें में साइटिका से परेशान होने के कारण स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के चलते आदर्श भारती इंग्लिश मीडियम स्कूल अर्जुंदा ब्लॉक गुण्डरदेही में संलग्न करने की मांग किया था। लेकिन मेरी मांग उसी समय पूरी नहीं हो पाई। विभाग ने जवाब दिया कि ऐसा अभी होना संभव नहीं है। तो फिर मैं जहां पदस्थ हूं वही पढ़ा रहा हूं। अचानक अब मुझे पीपरछेड़ी अटैच किया गया है। इससे जिन बच्चों को मैं पढ़ा रहा था उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मुझे वापस मूल शाला में भेजा जाता है या नहीं यह शिक्षा विभाग के विवेक पर निर्भर है। लेकिन मुझे जानकर दुख हुआ कि आखिर क्यों अधिकारी , शाला प्रबंधन समिति को मेरे खिलाफ यह गुमराह कर रहे हैं कि मैं सांकरा स्कूल छोड़ना चाहता था। इसलिए मुझे पीपरछेड़ी भेजा गया है। जबकि संलग्नीकरण का आवेदन मैंने चार माह पहले दिया था अभी नहीं। पीपरछेड़ी में पोस्टिंग के बाद तो मुझे और घर से 72 किलोमीटर दूर स्कूल आना पड़ रहा है। मेरी परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ गई है। अर्जुंदा स्कूल मुझे पास पड़ता इसलिए मैं वहां संलग्न होना चाह रहा था जो हुआ नहीं।

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