यह कैसी व्यवस्था? पीपरछेड़ी में आंदोलन हुआ तो अतिशेष नहीं होने के बाद भी भेज दिया गया सांकरा के व्याख्याता को पढ़िए पूरा मामला!



इधर सांकरा के 100 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, कर रहे आंदोलन की तैयारी, शाला प्रबंधन समिति ने बुलाई बैठक, मामला गरमाया

बालोद। विगत दिनों बालोद ब्लाक के ग्राफ पीपरछेड़ी  के बच्चों सहित ग्रामीणों ने हायर सेकेंडरी स्कूल में मूलत भवन की समस्या वह कुछ मूलतः भवन की समस्या और शिक्षक की कमी को लेकर आंदोलन किया था। जिसके बाद मामला शांत कराने के लिए शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने बालोद ब्लाक के ही सांकरा  ज हायर सेकेंडरी स्कूल के वाणिज्य के व्याख्याता विवेक धुर्वे को वहां पर  अस्थाई व्यवस्था के तहत संलग्न कर दिया  इस बात की जानकारी मिलने के बाद सांकरा ज हायर सेकेंडरी स्कूल के बच्चे अब आंदोलन की तैयारी पर उतर आए हैं। शाला प्रबंधन समिति भी इस बात से आक्रोशित है। व्याख्याता विवेक धुर्वे 2010 यानी कुल 14 साल से सांकरा ज  हायर सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ हैं। अतिशेष नहीं बल्कि सीनियर व्याख्याता हैं। विभाग के नियम  के तहत अधिकतर जो अतिशेष होते हैं उन्हें ही जरूरी होने पर दूसरे स्कूलों में अटैच किया जाता है। लेकिन उच्च अधिकारियों ने आनन-फानन में पीपरछेड़ी के आंदोलन को शांत कराने के लिए बिना कुछ सोचे विचारे व्याख्याता विवेक धुर्वे को सांकरा से हटाकर पीपरछेड़ी में अटैच कर दिया। इससे अब सांकरा ज हायर सेकेंडरी स्कूल में करीब 100 बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है। छात्र यादराम, लाकेश्वर, दानेश्वर, लेखांशु, घनेंद्र, कुशल अग्रवाल , खिलेश्वर , दिलेश्वरी सिन्हा , निर्मला, एनी, कांची ठाकुर , चेतना, गीतांजलि, अंजलि, दामिनी, खोमेश्वरी, अंजलि साहू,डिंपल, सोनम, खिलेश्वरी, जिया, झमिता, शालिनी, याचना, महिमा, कोमिन, भावना, पारुल, पुष्पांजलि, कुसुम, नेहा, जागेश्वरी, ज्योति, लीलाधर, चिमनलाल, घनश्याम, देवेंद्र, भूपेंद्र, हरिराम, खोमेश, टोमेश्वर, कामेश, मोहनीश, दीपांशु, हीरामन, गुलशन, फ़ाबेश, हंसमुख, हिमांशु, लोकेंद्र, निधि, तमेश्वरी, यामिनी, रवि आदि सैकड़ो बच्चों का कहना है कि सामने बोर्ड एग्जाम है और हमसे हमारा प्रिय शिक्षक छीन लिया गया है। तो हम क्या करेंगे? ऐसे में फिर हम सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

शिक्षक को वापस लाने के लिए करेंगे पूरा प्रयास, बैठक है सोमवार को 

शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भूपत बघेल ने कहा कि प्रभारी प्राचार्य टीआर ठाकुर द्वारा डीईओ के आदेश पर तत्काल शिक्षक को रिलीव कर दिया गया । मुझे बाद में जानकारी दी गई। अगर मुझे पहले बताया गया होता तो ऐसा हम होने नहीं देते। फिर भी हम शिक्षक को वापस लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में सोमवार को शाला प्रबंधन समिति की बैठक बुलाई गई है। बच्चों ने भी हमें लिखित में आवेदन दिया है कि हमें उक्त शिक्षक वापस चाहिए। वरना आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। यह बात  शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को पहले ही समझनी चाहिए थी। लेकिन बिना किसी उचित सोच विचार के शिक्षक को यहां से हटा दिया गया। जिससे बच्चों में नाराजगी है। बच्चों के भविष्य के साथ हम खिलवाड़ नहीं होने देंगे। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। 

जरूरत कला की थी भेजा गया वाणिज्य का शिक्षक 

इधर मामले में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आ रही है कि पीपरछेड़ी स्कूल में कॉमर्स यानी वाणिज्य संकाय के शिक्षक पहले से ही वहां पदस्थ हैं। उन्हें कला संकाय के शिक्षक की जरूरत थी। लेकिन उल्टा वाणिज्य संकाय के ही व्याख्याता को वहां अटैच कर दिया गया। इससे वहां जो जरूरत थी उसकी पूर्ति तो हुई नहीं उल्टा वाणिज्य पढ़ाने वालों की अधिकता हो गई। ऐसे में व्याख्याता विवेक धुर्वे का वहां अटैचमेंट किया जाना भी व्यर्थ साबित होता है। लेकिन शिक्षा विभाग ने बिना किसी विचार के व्यवस्था बनाकर आंदोलन को शांत कराने के लिए यह कदम उठा दिया। अब खामियाजा सांकरा j हायर सेकेंडरी स्कूल के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

भवन का मामला दोनों जगह विवादों में 

ज्ञात हो कि पीपरछेड़ी  में मूल समस्या शिक्षक की नहीं बल्कि भवन की है। वहां पर भी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के द्वारा नए भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की जा चुकी थी। स्थानीय विधायक संगीता सिन्हा द्वारा भूमि पूजन भी किया जा चुका था। लेकिन आज तक राशि आई ही नहीं। वर्क आर्डर जारी की नहीं हुआ। ऐसा ही मामला सांकरा ज हायर सेकेंडरी स्कूल के साथ भी हुआ है। मूलतः दोनों स्कूल भवन की समस्या से जूझ रहे हैं। लेकिन पीपरछेड़ी के कुछ लोगों द्वारा राजनीति करते हुए भवन के साथ-साथ शिक्षक की समस्या को जोड़कर मामले को तुल दे दिया गया और आखिर आंदोलन से भवन की समस्या तो हल हुई ही नहीं, शिक्षक की समस्या को तात्कालिक निराकरण करने के उद्देश्य से और मामला शांत कराने के लिए अधिकारियों ने फिर दबाव में आकर सांकरा ज स्कूल के व्याख्याता विवेक धुर्वे को वहां संलग्न कर दिया।मामला कुछ और था और निराकरण कुछ और का हो गया है। ऐसे में विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगा है तो वहीं बच्चों की आड़ में राजनीति कर रहे पीपलछेड़ी के कुछ लोगों की कार्यशैली भी विवादों में है। इस बात को लेकर जब अधिकारी वहां समझाने के लिए भी पहुंची थी तो राजनीति को लेकर उठे सवाल पर भी वहां हंगामा ग्रामीणों द्वारा  कर शिक्षक की समस्या को तुल दी जा रही थी। लेकिन मामला भवन का था। जानकारी के मुताबिक वहां किसी भी तरह से वाणिज्य संकाय की पढ़ाई प्रभावित भी नहीं हो रही है। वर्तमान में जो प्रभारी प्राचार्य हैं वही वाणिज्य पढ़ा रहे थे। पर अब संलग्नीकरण के तहत व्याख्याता विवेक  को वहां भेजे जाने के बाद उन्होंने वाणिज्य विषय विवेक धुर्वे को सौंप दिया है। लेकिन ऐसी कोई वहां विशेष परेशानी इस विषय के अध्यापन को लेकर थी ही नहीं। उल्टा उनके चले जाने से सांकरा ज स्कूल में कुल 105 बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है। सांकरा के बच्चों का कहना है कि सामने बोर्ड एग्जाम है दो महीने बचे हैं अब हम क्या करें। विभाग को क्या उनकी परेशानी से कोई सरोकार नहीं है। अब देखने वाली बात होगी कि छात्र और शाला प्रबंधन समिति आंदोलन करते हैं तो विभाग किस हद तक समस्या को सुलझा पाता है।वहीं पीपरछेड़ी के प्राचार्य जीआर साहू का भी कहना है कि हमारे यहां मूलतः भवन की समस्या है लेकिन शिक्षकों के पांच पद भी रिक्त हैं इकोनॉमिक्स (अर्थशास्त्र) का शिक्षक नहीं है इसलिए बच्चे और पालक मांग कर रहे थे और व्यवस्था के तहत सांकरा स्कूल के एक शिक्षक को भेजा गया है।

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