हरदेव लाल के प्रति लोगों में है अजब गजब आस्था, देव दशहरा में जुटे प्रदेश भर के श्रद्धालु, इस बार चढ़े 534 मिट्टी के घोड़े, देखिए तस्वीरें



दीपक यादव, मुकेश सेन, संतोष साहू (टीम डेली बालोद न्यूज) बालोद। बालोद जिले में एक ऐसा देव स्थान है, जहां की मान्यता दूसरों से अलग है। इस देवस्थान पर मनौती पूरी होने पर मिट्टी के घोड़े चढ़ाने की परंपरा है. क्षेत्र के आम लोग ही नहीं, तमाम जनप्रतिनिधि भी इस मंदिर में आकर माथा टेकते हैं. हम बात कर रहे हैं बालोद जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर स्थित घीना डेम के पास पांड़े डेंगरापार के हरदेलाल मंदिर की. इस मंदिर में मंगलवार को सात गांव के लोगों ने पारंपरिक ढंग से देव दशहरा मेले का आयोजन किया। बाजे गाजे, सेवा गीत डांग डोरी के साथ शोभायात्रा निकाली गई ।

जिसमें प्रदेश भर के श्रद्धालु शामिल हुए। जिनकी मनोकामना पूरी हुई थी वह टोकरी में मिट्टी का घोड़ा लेकर बाबा को अर्पित करने पहुंचे थे। देर रात तक घोड़ा चढ़ाने का सिलसिला चलता रहा। डेंगरापार के उपसरपंच गौकरण देवदास ने बताया कि इस बार सबसे ज्यादा 534 मिट्टी के घोड़े चढ़ाए गए।

इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने मिट्टी के घोड़े चढ़ाकर देवता का आशीर्वाद लिया. स्थानीय लोगों के मुताबिक कई वर्षों से लगातार इस तरह से देव दशहरा का आयोजन होता आ रहा है. यह आयोजन हर साल दशहरे के बाद आने वाले पहले मंगलवार को होता है. इसमें 7 गांवों के ग्रामीण तो होते ही हैं, बड़ी संख्या में बाहर से भी लोग मेला देखने आते हैं. इस क्षेत्र मे रावण का पुतला दहन नहीं होता. मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक इस मंदिर को लेकर कई किवदंतियां हैं.

संतान सुख तो कोई नौकरी आदि की मांगते हैं मन्नत

इस गांव में बाबा हरदेलाल की मूर्ति की पूजा अंग्रेजों के समय से होती आ रही है. कहते हैं अंग्रेज अफसर तक भी यहां मन्नत लेकर आते थे और उनकी मन्नतें पूरी भी होती थीं. मान्यता है कि बाबा हरदे लाल वर्षो पूर्व बस्तर से आकर यहां स्वयं स्थापित हुए थे. उनके साथ ही भाई भी आए, जो बालोद जिले के मोहंदीपाट गांव में हैं. उन्हें मोहंदी पाट बाबा के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर में पहले ज्यादातर महिलाएं संतान सुख की कामना लेकर आती थीं, लेकिन बाद में लोग सभी तरह की मन्नते जैसे नौकरी, शारीरिक सुख, परिवार की खुशहाली आदि कामनाएं लेकर आने लगे. विधायक कुंवर सिंह निषाद का कहना है कि उन्होंने इस मंदिर के काफी चर्चे सुने थे. चुनाव के समय वह खुद इस मंदिर में जीत की मन्नत मांगने आए थे.

विधायक कुंवर निषाद ने भी बाबा को चढ़ाया घोड़ा, जताई आस्था

विधायक की भी मन्नत पूरी हुई और विधायक बन गए तो फिर बाबा के दरबार में गए थे. विधायक कुंवर लगातार दो बार गुंडरदेही से विधायक निर्वाचित हुए हैं. मान्यता है कि अगर सच्ची आस्था और लगन हो तो पत्थरों मे भी भगवान नजर आते हैं. इस मंदिर में भी कुछ ऐसा ही है. इस बार भी देव दशहरा मेले में आए विधायक कुंवर सिंह निषाद ने बताया कि डेगरापार हरदेवलाल बाबा देव दशहरा मड़ाई मेले में उन्होंने घोड़ा चढा़कर पूजा अर्चना की . इसी दौरान उन्होंने क्षेत्र और देश के लोगों के लिए अमन चैन और खुशियों की कामना की है।
इसी तरह अहिबरन नवागांव से पहुंचे एक ग्रामीण ने बताया कि उनकी बहन की नौकरी लग गई। उन्होंने भी इसी तरह से कामना की थी तो नौकरी लगने पर उनकी ओर से वे घोड़ा चढ़ाने के लिए पहुंचे थे। ऐसे कई तरह की मान्यताओं और विश्वासों के साथ बालोद ही नहीं बल्कि दूसरे जिले से लोग घोड़ा चढ़ाने के लिए यहां पर जुटे थे।

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