बालोद की बेटी 13 साल की फलक यादव ने तीरंदाजी के क्षेत्र में बनाई पहचान, टाटा आर्चरी एकेडमी जमशेदपुर के लिए छत्तीसगढ़ से चयनित होने वाली पहली खिलाड़ी बनी



बड़ी बहन दक्षा यादव भी है तीरंदाजी की नेशनल प्लेयर, बहन और माता से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रही फलक

बालोद। बालोद की रहने वाली यादव परिवार की बेटी फलक यादव ने एक बार फिर अपने तीरंदाजी के क्षेत्र में नया मुकाम हासिल किया है। वह छत्तीसगढ़ से ऐसी पहली खिलाड़ी बन गई है जो अब तीरंदाजी के क्षेत्र में आगे नेशनल स्तर और ओलंपिक स्तर पर ट्रेनिंग लेने के लिए टाटा आर्चरी एकैडमी जमशेदपुर के लिए चयनित हुई है। फलक अभी 13 साल की बच्ची है। 13 साल की उम्र में ही इस तरह तीरंदाजी के क्षेत्र में तेजी से बढ़ते कदम और बनी नई पहचान से बालोद नगर वासी भी गदगद हैं। वर्तमान में फलक यादव बहतराई बिलासपुर में रह रही थी। जहां खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित खेलो इंडिया स्टेट सेंटर आफ एक्सीलेंस यानी आवासीय तीरंदाजी अकादमी में प्रशिक्षण ले रही थी। इसी केंद्र के माध्यम से विगत दिनों प्रदेश स्तर पर चयन प्रक्रिया हुई। जिसमें प्रदेश के आठ तीरंदाज खिलाड़ियों को बुलाया गया था। जिसमें सभी की क्षमताओं को बारीकी से परखा गया। इसके बाद फिर राष्ट्रीय स्तर के लिए टाटा आर्चरी अकादमी में ट्रेनिंग के लिए भेजे जाने वाले खिलाड़ियों का चयन हुआ। जिसमें छत्तीसगढ़ से अकेली फलक यादव का नाम सामने आया। 15 अक्टूबर से फलक जमशेदपुर में शिफ्ट हो जाएगी। जिसकी तैयारी में उनके पिता शशिकांत यादव, माता निर्मला यादव जुटी हुई है। पिता शशिकांत यादव ने बताया कि बचपन से ही उनकी दोनों बेटियां तीरंदाजी के क्षेत्र में नाम कमा रही है। बड़ी बेटी दक्ष यादव 18 साल भी नेशनल दक्षा भी दो बार नेशनल खेल चुकी है। तो वही अपनी बड़ी बहन से ही प्रेरणा लेकर 13 साल की फलक यादव ने भी अब तीरंदाजी के क्षेत्र में टाटा आर्चरी अकादमी जमशेदपुर के लिए चयनित हो गई है। यह उन सभी माता-पिता के लिए गौरव की बात है जिनकी बेटियां होती है। बेहतर परफार्मेंस से उनकी बेटियां छत्तीसगढ़ में तीरंदाजी के क्षेत्र में नाम रोशन कर रही हैं। पिता शशिकांत यादव ने बताया कि जमशेदपुर में लगभग 4 साल तक ट्रेनिंग सेंटर में फलक रहेगी। जहां उसे आगे नेशनल और ओलंपिक स्तर तक की प्रतियोगिता में शामिल होने के लायक तैयार किया जाएगा। इस बीच एक साल की परीक्षा अवधि भी रहेगी।

बेटियों की मां भी है प्रेरणा स्रोत

पिता शशिकांत ने बताया कि उनकी बेटियों को तीरंदाजी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका उनकी पत्नी, यानी बच्चों की माता निर्मला यादव का योगदान है। जो स्वयं भी अपने दौर में खो खो और क्रिकेट की खिलाड़ी रह चुकी है। बिलासपुर में रहते हुए निर्मला लगातार दोनों बेटियों को तीरंदाजी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करती रही। माता सहित कोच निलेश गुप्ता के विशेष मार्गदर्शन से यह बेटियां तीरंदाजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। इस सफलता के लिए खेल कोच निलेश गुप्ता व माता निर्मला यादव की भूमिका अहम रही।

बहन दक्षा भी है नेशनल प्लेयर

फलक की बड़ी बहन दक्षा यादव भी तीरंदाज है और वह भी बहतराई में रहकर अभ्यास कर रही। उसने भी नेशनल लेवल पर 2018 और 2023 में पदक जीता है। अब उनकी छोटी बहन फलक प्रदेश की पहली तीरंदाज बन गई है जिनका चयन टाटा आर्चरी अकादमी के लिए किया गया है। फलक 4 साल की उम्र से ही आर्चरी में हाथ आजमा रही है। पहले वह इंडियन राउंड में अभ्यास करती थी लेकिन उम्र के साथ उसने रिकर्व में भी अभ्यास शुरू किया । उनके कोच का मानना है कि अब फलक के खेल में और सुधार आएगा। क्योंकि वहां वह ओलंपियन के साथ ट्रेनिंग लेगी। इधर बालोद की इस बेटी की इस बड़ी उपलब्धि से पूरे नगर सहित यादव परिवार में उत्साह का माहौल है।

संचालक खेल एवम युवा कल्याण श्रीमती तनुजा सलाम ने मिलकर दी बधाई

बहतराई बिलासपुर की तीरंदाजी बालिका खिलाड़ी फलक के रेसिडेंट प्रोग्राम ऑफ टाटा आर्चरी एकेडमी के लिए चयनित होने पर स्वयं संचालक खेल एवम युवा कल्याण श्रीमती तनुजा सलाम ने प्रत्यक्ष मिलकर बधाई दी। संचालक खेल एवम युवा कल्याण श्रीमती तनुजा सलाम ने कहा खेल एवम युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित आवासीय तीरंदाजी अकादमी (खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) बहातराई बिलासपुर में प्रशिक्षण ले रही तीरंदाजी खिलाड़ी कुमारी फलक यादव का चयन टाटा आर्चरी अकादमी जमशेदपुर के लिए हुआ है। खिलाड़ी फलक ने माता पिता सहित संचालक से मिलकर खुशी जताया। इस अवसर पर संचालक खेल एवम युवा कल्याण श्रीमती तनुजा सलाम ने खिलाड़ी फलक यादव को बधाई दीं और आगे बेहतर परफॉर्मेंस के साथ छत्तीसगढ़ का नाम रौशन करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

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