कमरौद के काली मंदिर में उमड़ रही है आस्था की भीड़, माता जस गीतों पर श्रद्धालु रहे झूम



बालोद । बालोद जिले के ग्राम कमरौद में स्थित काली माता मंदिर और दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में इन दिनों नवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। माता जगराता जस गीतों पर लोग झूम रहे हैं।

सप्तमी पर भी यहां श्रद्धालुओं की खास भीड़ देखने को मिली। यहां मंदिर परिसर में आकर्षक गार्डनिंग के साथ-साथ 17 फीट काली माता की मूर्ति लगभग 3 साल पहले स्थापित की गई है। इस मूर्ति के स्थापना के बाद से यहां भक्तों की भीड़ में इजाफा हो गया है।

हालांकि पहले से यह जगह दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर के नाम से विख्यात है। जहां पर जमीन से निकली हुई प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए बजरंगबली की मूर्ति लोगों की आस्था का केंद्र है। जो कि लगभग चार सौ साल पुराना बताया जाता है।

मंदिर समिति के अध्यक्ष पुनीत राम देशलहरे ने बताया कि श्रद्धालुओं और दानदाताओं की मदद से मंदिर समिति मंदिर का विकास कर रही है। लगातार यहां विभिन्न देवी देवताओं की मूर्ति स्थापना हुई हैं। पूर्व मंदिर समिति के कार्यकाल में काली माता की मूर्ति और शनि देव स्थापित किया गया है। साथ ही वर्तमान समिति मंदिर के द्वारा रंग रोगन और गुंबज निर्माण के कार्य को आगे बढ़ा रही है। मंदिर के सभी दीवारों पर विविध देवी देवताओं की चित्र उकेरे गए हैं। जिन पर पेंटिंग का काम भी किया जा रहा है। पेंटिंग पूर्ण होने के बाद मंदिर की भव्यता और बढ़ जाएगी । लोग अपनी आस्थावश यहां मनोकामना जोत जलाते हैं। अभी भी 350 से ज्यादा जोत यहां जलाए गए हैं ।अलग-अलग सेवा मंडली की टीम यहां आकर माता जस गीत प्रस्तुत करती है। काली मंदिर को देखने के लिए दूर-दूर से बालोद जिला ही नहीं बल्कि दूसरे जिले से भी लोग यहां आते हैं ।पाताल भैरवी राजनांदगांव के बाद कमरौद का यह काली मंदिर जो की 17 फीट ऊंचा है, पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय रहता है। महाशिवरात्रि में यहां भव्य मेला का आयोजन भी होता है। मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष विशंभर चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष सुरेंद्र पटेल, सचिव बृज किशोर साहू, सदस्य भूषण चतुर्वेदी, देवेंद्र साहू, दीनूराम कंवर, लखन ठाकुर, विनोद कुमार यदु ,ईश्वर यदु ,रुपेश पटेल, बलराम साहू, कामता प्रसाद साहू, अरुण साहू, भुवन पटेल, पुजारी दुर्गा प्रसाद पांडे सहित समस्त ग्रामवासी मंदिर के विकास में जुटे हुए हैं।

मूर्ति को लेकर क्या है किवदंती

ऐसी किवदंती है कि, गांव का एक किसान अपने खेत में हल चला रहा था.लेकिन हल का फाल एक जगह जाकर अटकता और फिर जोर लगाने पर टूट जाता. इसके बाद हनुमान जी ने किसान को सपने में दर्शन देकर उस जगह के बारे में बताया. अगले दिन किसान ने खेत में खुदाई की वहां से बजरंगबली की मूर्ति निकली. किसान ने खेत के उसी हिस्से में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवा दी. तब से लेकर आज तक हनुमानजी लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण कर रहे हैं। आज के समय में इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है. बजरंगबली के साथ इस स्थान पर दूसरे देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं.

मां की स्मृति में ढाई लाख दान, बना स्वागत द्वार

गांव की ही बहन अनुसुईया बाई ठाकुर, भाई तिलक व लोकेश्वर ने अपनी मां स्व. सातो बाई की स्मृति में मंदिर परिसर में स्वागत द्वार गेट बनवाने के लिए ढाई लाख रुपये दान किए थे। जिससे गेट का निर्माण हो गया। अब मंदिर परिसर का लुक भी बदल गया है। जहां मंदिर के सामने मेला लगता था वहां गार्डन तैयार किया गया है।

ये है खासियत इस मंदिर की

गांव के बुजुर्गों के मुताबिक करीब 400 साल पहले हनुमान की मूर्ति जमीन से निकली है। जिसके कारण इसकी खास मान्यता है। दक्षिण मुखी भूमि फोड़ हनुमान मंदिर के नाम से यह राज्य भर में जाना जाता है। दूर दूर से लोग यहां महाशिवरात्रि और अन्य अवसरों पर दर्शन करने आते हैं।

1 लाख 20 हजार से बनवाया गया है आकर्षक शिवलिंग

दानदाताओं और मंदिर समिति के सहयोग से ही हनुमान मंदिर के ठीक सामने आकर्षक शिवलिंग का भी निर्माण किया गया है। जिसकी लागत 1 लाख 20 हजार है। मंदिर परिसर के चारों ओर अलग-अलग भगवान और देवी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। मंदिर के बाहरी दीवारों में सर्वधर्म समभाव का संदेश भी दिया जा रहा है। सभी धर्म के प्रतीक व उनके ईष्ट की मूर्तियां भी चित्रित की गई है। इन चित्रों को आकर्षक रंगों से सजाने के लिए दानदाता भी तैयार हो गए हैं और यहां पेंटिंग के कार्य शुरू हो चुका है।

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