एक मौत से सबक- हाथी प्रभावित गांव में लगाई जा रही एलईडी लाइट ताकि ग्रामीण रहे सुरक्षित, हो रही मुनादी तो जागरूकता पोस्टर से कर रहे सचेत, देखिये हाथी आते हैं तो आपको किन बातों का रखना है ध्यान?



बालोद/डौंडी – विगत दिनों डौंडी ब्लॉक के ग्राम खल्लारीटोला लिमऊडीह में एक 11वीं के छात्र डोमेन्द्र ध्रुवे की हाथी के कुचलने से मौत हो गई थी। यह बालोद जिले के लिए एक बड़ी घटना थी। जिसे संज्ञान में लेते हुए व्यवस्था सुधारने व इससे सबक लेने के लिए जिला प्रशासन ने वन विभाग को कड़े तौर पर निर्देशित किए थे और इसके बाद गश्त व्यवस्था को मजबूत करने कहा गया था। कलेक्टर जनमेजय महोबे के फरमान का असर दिखने लगा है और वन विभाग अब पहले की तुलना में ज्यादा मुस्तैद हो गई है। ग्रामीणों को सुरक्षा देने के लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं तथा उन उपायों की निगरानी भी उच्च स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। पल-पल की रिपोर्ट भी मांगी जा रही है कि आज क्या क्या कर रहे हैं। क्या टीम बनाई गई है। किस टीम की कहां ड्यूटी लगाई गई है। पूरी जानकारी, हाथियों का लोकेशन कहां  है, यह सब मंगाया जा रहा है।

हाथी अलर्ट गांव में एलईडी लाइट लगवा रहे

हाथी गांव में प्रवेश ना करें इसलिए अलग-अलग हाथी प्रभावित गांव में वन विभाग के द्वारा एलईडी लाइट भी लगाया जा रहा है। भर्री टोला, ढोररीठेमा, कुररुतोला, कुंज कन्हार  में यह लाइट लगा दी गई है। तो अन्य गांव में भी लाइट लगाने का काम भी चल रहा है। इसके अलावा एक गाड़ी में लाउडस्पीकर लगाकर मुनादी कर लोगों को सुरक्षात्मक उपाय की जानकारी दी जा रही है ताकि ग्रामीण पूरी तरह से अलर्ट रहें और किसी तरह से हाथियों के दल से छेड़खानी ना करें। कुछ  जगह ग्रामीणों द्वारा पटाखा फोड़ कर लापरवाही बरतने की शिकायत भी आती है। ऐसे लोगों से भी रेंजर पुष्पेंद्र साहू व अन्य अधिकारी लगातार अपील कर रहे हैं कि अगर कहीं हाथी दिखता है तो इसकी सूचना विभाग को दे। खुद खतरा मोल ना ले। वरना अनहोनी हो सकती है।

जंगली हाथियों से बचाव के उपाय बता रही विभाग, पोस्टर भी तैयार

कलेक्टर महोबे के निर्देश के बाद वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को मुनादी करके जंगली जानवरों से हाथियों से बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं। बालोद वन मंडल के माध्यम से इसके लिए एक पीडीएफ फाइल जागरूकता पोस्टर भी तैयार किया गया है। जिसमें हाथियों से क्या क्या खतरा है, कैसे हम उनसे बच सकते हैं और अगर हम किसी तरह की लापरवाही करते हैं तो उसका क्या अंजाम हो सकता है इन सभी बातों को इस पोस्टर के माध्यम से बताया गया है।

जंगली हाथियों से बचाव के उपाय, क्या करें क्या ना करें, इस थीम पर यह जानकारी बालोद वन मंडल द्वारा जारी की गई है। जिसमें प्रमुख रुप से यह बताया गया है कि भीड़ के साथ हाथी देखने के लिए कभी ना जाए, हाथी द्वारा दौड़ने पर भगदड़ मच सकती है। दुर्घटना घट सकती है। जंगली हाथियों को देखते ही इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दे। हाथियों के आस पास ना जाए, ना ही किसी को जाने दे। तथा उनसे विशेष दूरी बनाए रखें। खलिहान के आसपास रात में आग जलाकर रखें तथा खलिहान में रात को ना सोए। जंगल से लगे क्षेत्र में खलिहान ना बनाएं। हाथियों के प्रवास के मार्ग को ना रोके और ना ही मार्ग में भीड़ जमा होने दे।

अनाजों के भंडार में विशेष सतर्कता बरतें। घर के भीतरी हिस्से में बनी पक्की लोहे की कोठियों में रखे। गांव में घर के चारों ओर खंभों में तेज रोशनी वाले बल्ब लगाए। गांव के आसपास हाथी हो तो अपने अपने घर के सामने आग जलाकर रखें और बारी-बारी से रात्रि में गस्त करें। वन क्षेत्रों में गुजरने वाली सड़कों पर वाहनों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। हाथियों द्वारा सड़क पार करते समय वाहनों को रोककर दूरी बनाए रखें। हाथियों को गुलेल तीर या अन्य साधनों से ना मारे था। हाथी बदला लेने पर उतारू हो जाते हैं।

महुआ शराब ना बनाएं न हीं पिए ना ही घर में संग्रह करें। गांव के आसपास हाथियों की होने की सूचना पर शराब को घर से दूर मैदान में रख दे। खेतों, घर ही खलिहान में रखा अनाज घरों में सुरक्षित अनाज को खाते समय हाथियों को ना छेड़े। इसकी उचित सहायता अनुदान वन विभाग द्वारा जल्द ही दी जाएगी। जब हाथी गांव के आस-पास हो तो बुजुर्गों, महिलाओं एवं बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं तथा रात में अकेला ना छोड़े।

पटाखा फोड़ने का ये है नियम

अनावश्यक पटाखों का उपयोग ना करें। मात्र बस्ती के आसपास एवं संकट काल में ही इनका उपयोग करें। गांव के आसपास हाथी हो तो पक्के मकान, अस्थाई शिविर, स्कूल, पंचायत भवन में ही जाकर सोए।

अगर सामने आ जाए हाथी तो ये जरूर करें

हाथी  अचानक पास आने पर बचने के लिए कोई भी कपड़ा, साल, कंबल, धोती, लूंगी, साड़ी उसकी तरफ फेंक दें तभी बच सकते हैं। हाथियों को देखने के लिए अथवा हाथियों से बचाव के लिए पेड़ पर ना चढ़े। चटक एवं लाल रंग के कपड़े पहनकर जंगल में हाथी देखने ना जाए। हाथियों के लिए दिन का समय आराम का होता है, इस समय उन्हें ना छेड़े और ना ही देखने जाएं। गांव के पास जंगली हाथी हो तो कुत्तों को भौंकने से रोके। ऐसे में हाथी गांव की ओर आ सकते हैं। हाथी को देखने या गश्ती करने शराबी, बच्चे, बुजुर्ग, महिला बिल्कुल ना जाए। हाथियों को लगातार दिन-रात ना खड़े जंगल में उनका पीछा ना करें। इससे वे हिंसक हो जाते हैं।

हमेशा दल बनाकर गस्त करें तथा गस्त करते वक्त सुरक्षा की सामग्री हमेशा रखें।  गांव में प्रवेश के रास्ते में आग जलाकर रखें तथा गांव में नगाड़ो का शोर बनाए रखें। यदि हाथी किसी गड्ढे कुएं या दलदल में फंस गए हो तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें। जिन क्षेत्रों में जंगली हाथियों की उपस्थिति है वहां किसी भी प्रकार के वनोंपज, खुखड़ी, पुट्टू और जलाऊ लकड़ी लेने ना जाए। सूर्योदय के पहले जंगलों में शौच के लिए ना जाए। घर में ही निर्मित शौचालय का उपयोग करें। आक्रोश में आकर किसी भी माध्यम से हाथियों को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचाएं, यह एक दंडनीय अपराध है। हाथियों द्वारा किसी भी प्रकार की क्षति किए जाने पर इसकी सूचना वन विभाग को दें ताकि निर्धारित मुआवजा समय पर दिया जा सके।

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