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साहित्यकार अरुण साहू की कृति लहरों का पैगाम का विमोचन

बालोद:- प्रेरणा साहित्य समिति बालोद द्वारा प्रेरणा साहित्य समिति के संरक्षक साहित्यकार अरुण कुमार साहू की कृति लहरों का पैगाम का विमोचन कार्यक्रम एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान छत्तीसगढ़ प्रांत के कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश देशमुख थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीआर बेलसर अध्यक्ष तुलसी मानस प्रतिष्ठान तहसील बालोद एवं मानस मर्मज्ञ द्वारा की गई। विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कृत आचार्य एवं वरिष्ठ साहित्यकार गोरेलाल शर्मा उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर की गई। सरस्वती वंदना गायत्री साहू द्वारा प्रस्तुत किया गया तत्पश्चात समिति के सदस्यों द्वारा अतिथि स्वागत किया गया। अतिथियों के स्वागत के पश्चात अरुण साहू के जन्मदिन के अवसर पर प्रेरणा साहित्य समिति द्वारा उपहार स्वरूप पौधा एवं श्रीमद् रामचरितमानस की प्रति भेंट की गई। स्वागत भाषण प्रेरणा साहित्य समिति बालोद के अध्यक्ष जयकांत पटेल द्वारा दिया गया।

स्वागत भाषण के उपरांत अरुण साहू की काव्य कृति “लहरों का पैगाम” का विमोचन समस्त अतिथियों के कर कमलों द्वारा किया गया। अपनी कृति पर प्रकाश डालते हुए अरुण साहू ने कहा की लहरों का पैगाम एक कवि के अंतर्मन में उठने वाले भाव की लहरें ही है जो हृदय से उठकर कलम के माध्यम से कागज पर परिलक्षित होते हैं। मेरी यह कृति मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने का प्रयास है। कार्यक्रम के विशेष अतिथि गोरेलाल शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा की लहरों का पैगाम मानव समाज को संवेदनशील बनने का संदेश देता है। साथ ही यह हमारे समाज में घटने वाली उन घटनाओं के प्रति चिंता है जिससे हमारा समाज नैतिक पतन की ओर अग्रसर है। ऐसी निराशा ओं के बीच में एक आशा की किरण है लहरों का पैगाम। अपनी कविता गीत किसे मैं सुनाऊं के माध्यम से उन्होंने वृंदावन का सचित्र चित्रण किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष बी आर बेलसर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की श्री साहू की कृति लहरों का पैगाम वास्तव में मानव समाज के लिए मानव बनने का पैगाम है। कहीं ना कहीं कवि की यह चिंता है किस समाज से मानवता क्षति पहुंच रही है जिसकी क्षतिपूर्ति का प्रयास इस साहित्य में किया गया है। साथ ही अपने गीतों के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम प्रकट किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगदीश देशमुख ने अपने उद्बोधन में कहा की लहरों का पैगाम स्थिरता में क्रियाशीलता का संचार है हृदय की उठने वाली भावनाएं प्राकट्य रूप में पाठक के बीच में इस साहित्य के माध्यम से पहुंचेगी। कवि की चिंता पर्यावरण को बचाने की है जिसका लगातार क्षरण हो रहा है। संवेदनहीनता आज की प्रमुख समस्या है और ऐसी संवेदनहीनता के बीच में मानव ह्रदय में संवेदनशीलता जगाने का एक अनूठा प्रयास लहरों का पैगाम के माध्यम से किया गया है। साथ ही अपनी कविता वृंदावन की गलियां सूनी के माध्यम से भारतीय संस्कृति में प्रविष्ट विकृति पर चिंता व्यक्त की। अतिथि उद्बोधन के पश्चात प्रेरणा साहित्य समिति के साहित्यकारों द्वारा काव्यपाठ किया गया। जिसमें गायत्री साहू ने सावन के गीत गाकर वातावरण को खुशनुमा बना दिया। समिति के सचिव डॉक्टर एस एल गंधर्व ने अपनी रचना कोई ला संग नहीं चलावव के माध्यम से निस्वार्थ जीवन जीने की प्रेरणा दी। उपाध्यक्ष पुसन कुमार साहू ने अपनी रचना के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया। समिति के संरक्षक पुष्कर सिंह राज ने आध्यात्मिक रचना का पाठ करते हुए एकात्मवाद के सिद्धांत को प्रस्तुत किया। संगठन सचिव लव कुमार सिंह ने श्रृंगार की रचना पढ़ते हुए मानव जीवन में प्रेम की प्रासंगिकता को परिलक्षित किया। संरक्षक अरुण कुमार साहू ने सुमधुर गजलों के माध्यम से ह्रदय के तारों को छेड़ दिया। अध्यक्ष जयकांत पटेल ने पहले सावन को आने दो काव्य के माध्यम से प्रकृति का सजीव चित्रण किया कार्यक्रम का संचालन प्रेरणा साहित्य समिति के अध्यक्ष जयकांत पटेल एवं संगठन सचिव लव कुमार सिंह ने किया आभार ज्ञापन अरुण कुमार साहू ने किया।

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