खुर्सीपार में दंतेवाड़ा की तर्ज पर बने मां दंतेश्वरी मावली मंदिर का नवरात्रि में लोकार्पण



बालोद। बालोद ब्लॉक के ग्राम खुर्सीपार (मनौद) में दंतेवाड़ा के प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर की तर्ज पर मां दंतेश्वरी मावली माता मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और इन दिनों रंग-रोगन का काम अंतिम चरण में चल रहा है। नवनिर्मित मंदिर का लोकार्पण आगामी चैत्र नवरात्रि में किया जाएगा, जिसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं।

मंदिर के प्रमुख राजा पांडेय ने बताया कि 19 मार्च को ज्योति कलश स्थापना के साथ मंदिर का लोकार्पण किया जाएगा। इसके अलावा 23 मार्च (पंचमी) को भोग-श्रृंगार का कार्यक्रम आयोजित होगा, जबकि 27 मार्च (महानवमी) को हवन, नौ कन्या पूजन और महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र के लोगों में मां दंतेश्वरी के प्रति विशेष आस्था है। इसी आस्था के चलते मंदिर लोकार्पण के अवसर पर 61 ज्योति कलश मनोकामना के रूप में जलाए जाएंगे, जिसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।

नवरात्रि से एक दिन पहले 18 मार्च को देव परघवनी का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वहीं मंदिर लोकार्पण के दिन 19 मार्च को क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग के आगमन का भी प्रस्तावित कार्यक्रम है।

स्वप्न के संकेत से साकार हुई आस्था: खुर्सीपार में दंतेवाड़ा की तर्ज पर बने मां दंतेश्वरी मावली माता मंदिर का नवरात्रि में होगा लोकार्पण

बालोद। नवरात्रि विशेष श्रृंखला में आज हम आपको बालोद जिले के ग्राम खुर्सीपार (मनौद) में बने एक विशेष मंदिर से परिचित करा रहे हैं, जो आने वाले समय में जिले का दंतेश्वरी मंदिर के रूप में पहचान बनाने जा रहा है। यहां छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर की तर्ज पर हूबहू आकृति में मां दंतेश्वरी मावली माता मंदिर का निर्माण किया गया है। अब मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और आगामी नवरात्रि में मंदिर का भव्य लोकार्पण किया जाएगा।

यह मंदिर गांव के कथावाचक पंडित राजा पांडेय (राजा महाराज) द्वारा यजमानों और श्रद्धालुओं के सहयोग से बनवाया गया है। पंडित राजा महाराज मां दंतेश्वरी के परम भक्त हैं और बचपन से ही उनका जुड़ाव माता से रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 से वे मां दंतेश्वरी की भक्ति कर रहे हैं। उनके अनुसार एक बार उन्हें स्वप्न में मां दंतेश्वरी के दर्शन हुए और मंदिर निर्माण का आदेश मिला। उसी आदेश को पूरा करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर निर्माण का संकल्प लिया।

मंदिर में स्थापित होने वाली मूर्तियां भी दंतेवाड़ा मंदिर की मूर्तियों की आकृति के अनुरूप तैयार कराई गई हैं। इन मूर्तियों का निर्माण ओडिशा के कारीगरों द्वारा विशेष लाल कुंवारी पत्थर से किया गया है। इस पत्थर की खासियत यह है कि जब इसमें आकृति उकेरी जाती है तो उसका रंग लाल दिखाई देता है, लेकिन धीरे-धीरे वह काला हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे मां दंतेश्वरी की मूर्ति का रंग है।

मंदिर निर्माण में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का विशेष योगदान रहा। किसी ने गिट्टी, ईंट और रेत दिया तो किसी ने आर्थिक सहयोग कर इस धार्मिक कार्य में अपनी सहभागिता निभाई। स्थानीय लोगों के अनुसार जिन पत्थरों से मूर्तियां बनाई गई हैं उन्हें चमत्कारी माना जाता है। बताया जाता है कि खदान से निकलने पर पत्थर हल्का होता है, जिसे एक व्यक्ति आसानी से उठा सकता है, लेकिन जब उसमें देवी-देवताओं की आकृति तराशी जाती है तो उसका वजन बढ़ जाता है और उसे उठाने के लिए कई लोगों की आवश्यकता पड़ती है।

मंदिर की बनावट भी दंतेवाड़ा के मंदिर की तर्ज पर तैयार की गई है। वहां सागौन की लकड़ियों का उपयोग हुआ है, जबकि यहां लकड़ियों के स्थान पर लोहे के पाइप से बाहरी सजावट की गई है ताकि उसी शैली का स्वरूप मिल सके। मंदिर की छत के लिए बालाघाट से विशेष तीन-तीन फीट आकार के खपरैल मंगाए गए हैं।

मंदिर के लोकार्पण अवसर पर जात्रा देव का विशेष कार्यक्रम भी आयोजित करने की योजना है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में भी राजा पांडेय द्वारा खुर्सीपार में भव्य जात्रा उत्सव का आयोजन किया गया था, जिसमें अंतागढ़, बस्तर, बीजापुर और नारायणपुर सहित वनांचल क्षेत्र से बैगा साधु अपने-अपने देवी-देवताओं और आंगादेव के साथ पहुंचे थे। उस आयोजन में वर्तमान सांसद भोजराज नाग भी बैगा वेश में शामिल हुए थे। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भी इसी तरह का भव्य धार्मिक आयोजन प्रस्तावित है।

मंदिर बनने के बाद अब बालोद जिले के श्रद्धालुओं को मां दंतेश्वरी मावली माता के दर्शन के लिए दंतेवाड़ा जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। जो भक्त वहां नहीं जा पाते, वे खुर्सीपार में ही माता के दर्शन कर सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि दंतेवाड़ा का प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर 14वीं सदी में चालुक्य राजाओं द्वारा दक्षिण भारतीय वास्तुकला शैली में बनवाया गया था। मान्यता है कि यहां देवी सती के दांत गिरे थे। मंदिर में देवी की काले रंग की षष्टभुजी प्रतिमा स्थापित है, जिनके हाथों में शंख, खड्ग, त्रिशूल, घटी और अन्य आयुध दर्शाए गए हैं तथा मंदिर में देवी के चरण चिन्ह भी मौजूद हैं।

अब खुर्सीपार में तैयार यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का नया केंद्र बनने जा रहा है और आगामी नवरात्रि में इसके लोकार्पण को लेकर गांव सहित पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

You cannot copy content of this page