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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का हुआ आयोजन

बालोद। नावेल्ट टीचर्स क्रिएटिव फाउंडेशन छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन संयोजक श्री अरुण कुमार साहू की अध्यक्षता में संपन्न हुआ । जिसका थीम “डिजिटआल लैंगिक समानता के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार” था।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना श्रीमती प्रतिभा त्रिपाठी से प्रारंभ हुआ। तत्पश्चात एनटीटीएफ के संस्थापक स्वागत उद्बोधन में कहा की इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम हम सभी को लैंगिक पूर्वाग्रह और असमानता को चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित करती है लैंगिक असमानता दुनिया भर में महिलाओं को व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। जिन की शुरुआत लिंग वेतन अंतर से होती है। यह महिलाओं की सुरक्षा को प्रभावित करता है। साथ ही उन्नति एवं कैरियर के विकास में बाधक है। शिक्षा महिला सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली साधन है ,लेकिन अभी तक बहुत सारी महिला को इन से वंचित रखा गया है ।कुछ जगह सांस्कृतिक मानदंड और लैंगिक रूढ़िवादिता लड़कियों को स्कूल जाने से रोकती है । लैंगिक आधार पर होने वाली हिंसा और भेदभाव भी बड़ा चुनौती है ।इन सबके यह रूप न केवल महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि उनके अवसरों को भी सीमित करते हैं, उनके जीवन को बाधित करते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सम्मान और संस्कृति को बचाने की दिशा में काम करना चाहिए जहां महिलाओं को महत्व दिया जाता है और उनके अधिकारों की रक्षा की जाती है । न्याय पूर्ण और न्याय संगत समाज बनाने की दिशा में काम करना होगा। साथ ही एक सुंदर गजल के माध्यम से सभी शिक्षक सृजनकर्ताओं को उद्वेलित करते हुए एकता के सूत्र में बंधने के लिए प्रेरित किया।
तत्पश्चात श्री बी यदु ने अपने स्वरचित कविता के माध्यम से महिलाओं के लिए समाज में फैली कुरीतियों पर करारा जवाब दिया। श्रीमती मंजू कोसरिया ने अपनी स्वरचित गजल के माध्यम से वर्तमान परिवेश में महिलाओं की व्यथा को स्पष्ट किया। श्रीमती सोमा मंडल ने कृष्ण भजन के माध्यम से सभी को होली के सतरंगी रंगों में घोलकर पिचकारी से सब को सराबोर कर दिया। शिक्षिका श्रीमती गीता ने स्वरचित काव्य पाठ की।
इस अवसर पर श्री टी एस पारकर ने कहा कि समाज में फैली कुरीतियों का सबसे अधिक प्रभाव यदि किसी पर पड़ा है तो वह महिलाएं ही है। आज भी यह अपने अधिकारों से वंचित है आज भी वे अपने अधिकारों के लिए लड़ रही है । ना जाने कितने बार हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना चुके हैं पर सच्चाई यही है कि महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया है। सिर्फ 1 दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना लेने से महिलाओं की स्थिति में सुधार नहीं आएगा ।न हीं उनका विकास होगा ।जरूरी यह है कि हर दिन उसका सम्मान किया जाए। यह सम्मान और स्नेह घर से ही प्रारंभ की जाए महिलाओं के सम्मान उनके उत्थान और विकास के लिए उचित और सटीक कदम उठाई जाए। साथ ही अपने स्वरचित कविता गर्मी आगे गर्मी आगे से सभी को गर्मियों की तपन का एहसास कराकर सचेत कर दिए। श्रीमती मोना रावत ने कविता पाठ कर नारी शक्ति की बखान की। उभरती नूतन कलमकार श्रीमती हर्षा देवांगन ने अपनी स्वरचित कविता ‘ हां मैं नारी हूं जब-जब ध्वस्त हुआ मनोबल मेरा, पृथ्वी तल से अंबर तक अपने आप को उभरी हूं ‘ काव्य पाठ कर मानव समाज को झकझोर दिया। श्रीमती शोभा बेंजामिन ने अपनी कविता हां मैं नारी हूं कोई अपना नहीं मैं एक चिंगारी हूं महाकाली हूं का पाठ किया। श्रीमती सुचित्रा सामंत ने काव्य पाठ प्रस्तुत कर समाज को नई राह और मजबूत निर्णय लेने को प्रेरित किया ।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती शिल्पी राय ने किया उन्होंने देवी स्तुति एवं कविता पाठ भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन श्री टीएस पारकर ने किया।

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