बालोद। आज की पीढ़ी जहां रामलीला में दिलचस्पी नहीं दिखाती है। रामलीला सिर्फ यूट्यूब या टीवी के पुराने सीरियल में ही रह गया है। ऐसे में दशहरा पर इस परंपरा को जीवंत करते हुए नागाडबरी में बेटियों को आगे कर रामलीला मंडली का संचालन किया जा रहा है। विगत करीब 6 साल से यहां की बेटियां ही रामलीला की मंडली संभाल रही है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। बेटियों ने रामलीला का मंचन किया। रावण वध किया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के संदेश को इस गांव में सार्थक किया गया।बेटियों को आगे करने का प्रमुख जिम्मा यहां के शिक्षक किरण षडप्रकाश कटेन्द्र ने उठाया है। जो कई वर्षों से छत्तीसगढ़ की विलुप्त होती सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का कार्य कर रहे हैं।
बेटियों ने रामलीला कर किया रावण का वध
नागाडबरी में इस दशहरा पर गांव की बेटियों ने रावण वध किया। विगत 20 वर्षों से बाल समाज लीला मंडली के संचालन कर रहे षड प्रकाश किरण कटेन्द्र ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ उद्देश्य पर बेटियों की प्रतिभा को आगे लाने के उद्देश्य से ही ग्राम की बेटियों को अभिनय सीखाया गया है। राम का अभिनय अनुराधा सिन्हा , लक्ष्मण दिव्या साहू , रावण झरना साहू , मेघनाथ भूमिका साहू एवं विभीषण की भूमिका पर केशरी साहू रही। कार्यक्रम आयोजन में नुकेश सोनवानी , धर्मेन्द्र सोनवानी , टकेश्वर साहू , तोषण यादव ,भूपत साहू ,राधेश्याम साहू ,सुमरन सिन्हा का सहयोग रहा।
क्या है उद्देश्य
आज के आधुनिक युग में जहां एक ओर लोग अपनी परम्परा और संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। वहीं ग्राम नागाडबरी के युवा शिक्षक षडप्रकाश किरण कटेन्द्र अपने गांव की लीला मंडली को विगत 20 वर्षों से संचालित कर गांव की परम्परा व संस्कृति को नव पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं। गांव में दशहरा के दिन राम लीला गांव की बेटियों व युवाओं को तैयार कर प्रस्तुति दी गई। गांव के युवक युवतियों को अभिनय एवं नृत्य स्वयं सीखाते हैं। स्वयं भी अच्छे कलाकार हैं कई लोकमंचों एवं दूरदर्शन ( रायपुर ) में प्रस्तुति देकर विविध सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।
उनका उद्देश्य बेटियों को आगे बढ़ाना और लुप्त होती परंपरा को जीवित रखते हुए इसके प्रति युवाओं में रुझान पैदा करना है। बाल समाज लीला मंडली के नाम से नागा डबरी में दशहरा पर रामलीला के साथ दिवाली पर प्रहलाद नाटिका का भी मंचन किया जाता है। गांव की दसवीं 12 वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियां रामलीला व प्रहलाद नाटिका में अभिनय करती हैं।
