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पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयंती साहू के घर ईडी रेड के बाद परिजनों के साथ-साथ लेनदेन करने वालों पर भी नजर

रायपुर/भिलाई बीते दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने रायपुर के शराब कारोबारी सुभाष शर्मा के 54 करोड़ के घोटाले को लेकर दुर्ग जिले में गातापार क्षेत्र में पूर्व जिला पंचायत जयंती साहू और उसके भाई विमल साहू के घर में रेड मारकर कार्रवाई की थी। इस मामले में बड़ा अपडेट ये है कि अब भी जयंती और विमल से जुड़े लोगों पर ईडी की नजर है। उनके कारोबार से लेकर लेनदेन पर नजरें टिकाए हुए हैं। जल्द इस मामले में बड़ी कार्रवाई के संकेत ईडी के सूत्रों ने दिए हैं। आपको बता दें कि ईडी को शराब कारोबारी सुभाष शर्मा और जयंती साहू के संबंधों के बारे में जानकारी मिली थी। पांच महीने पहले प्रवर्तन निदेशालय की 13 सदस्यों की टीम गातापार पहुंची थी। कार्रवाई करते हुए घर को सील कर दिया था। इस दौरान ईडी ने वहां मौजूद सभी से पूछताछ भी की थी।

कौन हैं जिला पंचायत की पूर्व सदस्य जयंती साहू…
जयंती साहू पूर्व में जिला पंचायत सदस्य रही हैं। उनके और भाई विमल साहू पर फर्जी कंपनी के नाम पर दस्तावेज बनवाकर करोडों रुपये का बैंक लोन लेकर गबन करने का आरोप है। साथ ही जांच के दौरान दोनों के पास करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति का भी पता चला था। जानकारी के अनुसार, ईडी की ये रेड पूरी तरह से गोपनीय थी। किसी को भी इसकी जानकारी नहीं थी। वहीं, इस बीच इस बात की भी जानकारी मिली कि टीम के कुछ अन्य अधिकारियों ने दल्लीराजहरा समेत अन्य जगहों पर रह रहे इनके रिश्तेदारों के घरों में भी छापा मारा गया था।

दरअसल, ईडी ने रायपुर के शराब कारोबारी सुभाष शर्मा के भी रेड मारी थी। रेड के दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कंपनी बनाकर बैंक से लोन लेने और गबन करने का पता चला था। कुछ दिन पहले उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। 10 दिनों की रिमांड में पूछताछ के दौरान ईडी को जयंती साहू और विमल साहू के बारे में पता चला था। जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई की थी।शराब कारोबारी सुभाष शर्मा पर 54 करोड़ से ज्यादा रकम का लोन लेकर घोटाला करने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने के बाद जांच शुरू की थी। उससे पूछताछ में पता चला कि वह जिस काम के लिए बैंक से लोन लेता था, रुपये को उसमें न लगाकर अन्य कामों में प्रयोग करता था। साथ ही इसकी भी जानकारी मिली है कि उसने लोन लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग किया ताकि उसे लोन न अदा करना पड़े।

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