महिला दिवस विशेष- महिला सेल के प्रयासों से 400 परिवार टूटने से बचे, महिलाओं में आ रही जागरूकता



टोनही प्रताड़ना, छेड़खानी सहित कई गंभीर अपराधों में अब सजगता से करती हैं पुलिस को शिकायत, होती है कार्रवाई

बालोद। शासन-प्रशासन महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए तो अपना काम कर रही हैं तो वही इस क्रम में महिला सेल का योगदान भी अहम है। बालोद जिले में महिला सेल की शुरुआत मार्च 2019 में हुई थी। महिला सेल की प्रभारी पदमा जगत ने बताया कि मार्च 2019 से लेकर 553 मामले महिला सेल में सामने आए। जिसमें 400 मामलों में समझौता कराकर हमने परिवार को टूटने से बचाया। आज वे परिवार अच्छे से जीवन यापन कर रहे हैं। खास बात यह है कि महिलाएं अपने अधिकार को लेकर जागरूक हुए हैं। चाहे बात हाल ही में शुरू हुए अभिव्यक्ति ऐप की हो जिसमें महिलाएं अपनी परेशानी ऑनलाइन ही बता सकती है और हम कार्रवाई करेंगे तो चाहे जागरूकता अभियान का असर हो।

महिलाएं अपने साथ हो रहे अत्याचार को लेकर अब आवाज उठाने में सक्षम हुए हैं। ऐसे कई मामले हैं जो गंभीर थे लेकिन महिलाओं ने समय रहते उन मामलों में महिला सेल की मदद ली और अपनी परेशानी दूर की। चाहे बात छेड़खानी की हो या छींटाकशी या फिर टोनही प्रताड़ना जैसे मामलों की हो। ऐसी महिलाएं मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित होती थी। अब महिलाएं निर्भीक व बेझिझक होकर शिकायत करती हैं और महिला सेल द्वारा उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास भी किया जाता है। उचित कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि महिला सेल में सामने आए ज्यादातर मामलों में विचारों में आपसी मतभेद, कंबाइंड फैमिली से अलगाव, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स यानी शादी के बाद भी दूसरी महिला या प्रेमिका से संबंध और प्रताड़ना के मामले ज्यादातर है। पहले दो प्रकार के मामले आपसी मतभेद और सामूहिक परिवार से अलग रहने के मामले में समझौता कराया जाता है। अन्य मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर पीड़ित को न्याय दिलाना हमारा कर्तव्य होता है।

नारी के सम्मान की,,,, अभिव्यक्ति ऐप से आएगा और ज्यादा सुधार

महिला सेल द्वारा अभिव्यक्ति नारी के सम्मान की ऐप के माध्यम से महिलाओं के प्रति अपराधों से संबंधित कानून, उनके अधिकार, महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा संबंधी जानकारी, उपाय, पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना की जानकारी, आपातकालीन सहायता, ऑनलाइन शिकायत कराने महिला सुरक्षा संबंधित टिप्स की जानकारी, हर क्षेत्र में स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, चौक चौराहे, हाट बाजार, मॉल सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में सिनेमाघरों के बाहर गांव गांव में शिविर लगाकर लगातार जागरूक किया जा रहा है। जागरूकता अभियान के तहत ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसके तत्काल मौके पर ही निराकरण किया गया है। पुलिस का कर्तव्य है असहाय की सहायता करना और अपराधियों को सजा दिलाना। टीआई पद्मा जगत ने कहा कि लोगों को न्याय दिलाना, कानून और समाज की रक्षा करना, अपराधों का नियंत्रण व रोकथाम करना।

महिलाओं की जागरूकता का परिणाम, इस तरह की शिकायतें भी आ रही सामने

टीआई जगत ने बताया विगत दिनों जब हम लगातार अभिव्यक्ति ऐप को लेकर जागरूकता शिविर लगा रहे हैं तो महिलाएं और युवतियां अपने अधिकार और अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने लगी हैं। चार से पांच ऐसे मामले हैं जब हम कहीं प्रशिक्षण देने पहुंचे थे तो वहां महिलाओं ने अपनी समस्या रखी। ग्राम हड़गहन की बात है यहां एक टोनही प्रताड़ना की शिकायत आई थी। जिसमें पड़ोसी ने पड़ोसी महिला पर आरोप लगाए थे। शिकायत मिलने पर हमने दोनों के बीच काउंसलिंग करा कर सुलह कराई। सुरेगांव, गुंडरदेही थाना क्षेत्र में भी कई ऐसे मामले आए हैं। यहां कॉलेज में प्रशिक्षण के दौरान लड़कियों ने बताया कि उनके गांव में टूटे-फूटे खंडहर नुमा घर है। जहां पर छोटे-छोटे बच्चे नशाखोरी करते हैं। वहां भी हमने कार्रवाई की और माहौल सुधर गया। अर्जुन्दा थाना क्षेत्र में भी एक गांव की लड़की ने बताया कि एक लड़का कॉलेज में एक तरफा प्यार करता है और मना करने के बावजूद उसे पीछा करके परेशान करता है। इस मामले में भी महिला सेल ने कार्रवाई की। इस तरह देखा जाए तो अब महिलाओं में डर दूर हो रहा है और वे अपने खिलाफ हो रहे किसी भी बात के लिए आवाज उठाने में सक्षम हो रही। यही नारी सशक्तिकरण की असली पहचान है।

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