कृषि कानून के वापसी के ऐलान पर गुरुर में विधायक संगीता सिन्हा के नेतृत्व में फूटे पटाखे



बालोद/गुरुर।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानून को वापस लिए जाने के ऐलान किए जाने के बाद गुरुर में कांग्रेसियों ने आतिशबाजी की। विधायक कार्यालय के सामने विधायक संगीता सिन्हा के नेतृत्व में आतिशबाजी हुई व इसे कांग्रेसियों ने किसानों व कांग्रेस की बड़ी जीत बताई।

विधायक ने कहा कि यह निर्णय पहले लिया गया होता तो आज किसानों की जान नहीं जाती। सैकड़ों किसानों को इस कानून के विरोध में आंदोलन के लिए डटे रहना पड़ा। उनकी जाने गई। शुरुआत से ही कांग्रेसी और किसान इन कानूनों को काले कानून की संज्ञा देकर विरोध किया जा रहा था। पर देर सबेर मोदी सरकार को होश आया है। यह कानून पहले ही वापस हो जाना था। अंततः आखिर मोदी सरकार को कांग्रेस की मांगों को मानना पड़ा। किसानों की जिद के सामने झुकना पड़ा। किसान हित में इस कानून को वापस लेना जरूरी था और मोदी सरकार को भी देर से समझ में आ ही गया। हम उम्मीद करते हैं कि जल्द से जल्द संसद में इस कानून को रद्द करने का प्रस्ताव पारित हो और किसानों के सामने फिर भविष्य में कोई संकट ना हो। आतिशबाजी करने के साथ-साथ कांग्रेसियों ने एक-दूसरे को मिठाई बांटकर खुशियां भी साझा की व किसानों को भी बधाई दी। वहीं इस सफलता के लिए सोनिया गांधी, राहुल गांधी का आभार जताया। इस दौरान तामेश्वर साहू ब्लॉक अध्यक्ष, टिकेश्वरी साहू नगर पंचायत अध्यक्ष, सुमित राजा राजपूत संयुक्त महामंत्री, पिमन साहू, दुर्गु सिन्हा, टोमन साहू सहित अन्य मौजूद रहे।

ज्ञात हो कि किसान बीते साल सितंबर में बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों – द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स (एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे थे। वहीं, केन्द्र सरकार सितंबर में पारित किए तीन नए कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही थी, जबकि आंदोलनकारी किसानों ने आशंका जताई थी कि नए कानूनों से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वे बड़े कॉरपोरेट पर निर्भर हो जाएंगे।
गौरतलब है कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ बीते साल 26 नवंबर से हजारों की तादाद में किसान दिल्ली और हरियाणा की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे थे। एमएसपी गारंटी कानून बनाने और कृषि कानूनों को रद्द कराने की जिद पर अड़े किसान इस मुद्दे पर सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया था। किसानों ने सरकार से जल्द उनकी मांगें मानने की अपील की थी। इस पर, बीच का रास्ता तलाशने के लिए केंद्र और किसानों के बीच 11 दौर की औपचारिक बातचीत हुई थी।

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