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छ.ग. राज्य में स्थाई लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाऐं) सशक्त हुई, अब बैंक, बीमा, निगम, अस्पताल, शिक्षा जैसे जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित प्रकरणों में मिलेगा शीघ्र राहत, देखिये कैसे?

बिलासपुर/रायपुर – राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण 1987 की धारा 22 बी के अंतर्गत जनोपयोगी लोक अदालतों की स्थापना छ0ग0 के पाॅंच संभागीय मुख्यालय बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर एवं अंबिकापुर में की गई है। इस लोक अदालत में जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित प्रकरण जैसे परिवहन, डाक, फोन, बिजली, पानी , प्रकाश, स्वच्छता, अस्पताल, बीमा, बैंकिंग अन्य वित्तीय संस्थाऐं ईंधन आपूर्ति, शिक्षा एवं शिक्षण संस्थाऐं, आवास एवं भू-संपदा से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की जायेगी। देखा गया है कि उपरोक्त सेवाओं में कमी के कारण पीड़ित पक्षकार संबंधित संस्थानों में चक्कर काटते रहते हैं, जहाॅं पर उनकी सुनवाई नहीं होती है और थक हारकर असुविधाओं के बीच में रहने को मजबूर होते हैं। इन सेवाओं के लिए गठित उपरोक्त लोक अदालतों को सशक्त एवं प्रभावी किये जाने का आदेश माननीय कार्यपालक अध्यक्ष महोदय, न्यायमूर्ति श्री प्रशांत कुमार मिश्रा द्वारा जारी किये गए हैं। पीड़ित पक्षकार अपने जिले से संबंधित संभागीय मुख्यालय में स्थापित जनोपयोगी लोक अदालत में उपरोक्त संस्थाओं के खिलाफ आवेदन बिना किसी न्याय शुल्क के प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन का प्रारूप राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के वेबसाइट में अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जनोपयोगी लोक अदालत से प्राप्त किया जा सकता है। जो आवेदक सक्षम नहीं है उन्हें आवेदन प्रस्तुत करने हेतु यथा सह संभंव मदद भी उक्त कार्यालय से प्रदान किये जाने के ओदश भी पारित किये गये हैं।जनोपयोगी लोक अदालत में प्रस्तुत आवेदन प्रथमतः आपसी राजीनामे/समझौते के माध्यम से निराकृत किये जाने का प्रयास किया जावेगा। जब पक्षकारगण किसी नतीजे पर नहीं पहुॅंचते हैं तथा विवाद किसी अपराध से संबंधित नहीं है तो स्थाई लोक अदालत गुण दोषों के आधार पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22 सी (8) के अंतर्गत यथा शीध्र आदेश पारित कर दिया जावेगा। इस तरह पीड़ित पक्षकार को शीध्र एवं सस्ता न्याय प्राप्त हो सकेगा।

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