श्रीमती नीलम मानिकपुरी
सदस्य (शाला प्रबंधन एवं विकास समिति) की सफलता की कहानी लिखी है राज्य स्तरीय ब्लॉग लेखक विवेक धुर्वे ने

सरगुजा-कोरोना संक्रमण के भवर में शिक्षा को मजबूती देने का कार्य शाला प्रबंधन एवं विकास समिति की सदस्य के द्वारा किया जा रहा है | आज कोरोना महामारी के कारण शिक्षको के सहयोग से इनके द्वारा घर-घर पहुंचकर बच्चों को ऑनलाइन व ऑफलाइन शिक्षण कार्य से जोड़ने की पहल की गई। कोविड-19 मोहल्ला कक्षा में बच्चों के साथ पालको को जागरूक करने का कार्य किया गया | कोरोना काल ने कहीं न कहीं आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया है | घर बैठे कैसे स्कूल संचालित किया जा सकता है, यह सीख दी जा रही है | कोरोना को लेकर जो बदलाव हुए, इससे बहुत कुछ सीखने और देखने को मिला | आज घर बैठे कामकाज करना और शिक्षण व्यवस्था को मजबूती देने की सीख इस कोरोना महामारी से मिली | खुद को सुरक्षित रखते हुए कैसे चुनौतियों से लड़ा जा सकता है, एक चुनौती की तरह कोरोना काल को लिया | सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण परिवेश के प्रारम्भिक स्तर के बच्चों की पढ़ाई को लेकर रही | यहां बच्चों को आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाते हुए उनके हाथों में किताब थमाई गई | ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों ही मोड से शिक्षण कार्य कराया जा रहा है | बच्चों तक शिक्षण कार्यों के लिए पुस्तक व कॉपी को पहुँचाने का कार्य किया गया |
शाला प्रबंधन एवं विकास समिति की सदस्य के द्वारा किये जा रहे कार्य:-
मोहल्ला कक्षा में सहयोग-कोरोना महामारी के दौर में विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ग्रामीण अंचल में मोहल्ला क्लास संचालित के निर्देश दिए उसी को देखते हुए सभी पालको के घर घर जाकर बच्चों को मोहल्ला कक्षा में भेजने का आग्रह इनके द्वारा किया गया | बच्चों को घर से मोहल्ला कक्षा में लाना और वापस घर छोड़ने का कार्य भी इनके द्वारा किया जाता था | इनके अनुसार कोई भी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न हो पाए उसके लिए बच्चों को मोहल्ला कक्षा तक लाने का अभियान इनके द्वारा शुरू किया गया |
प्रिंटरिच वातावरण में सहयोग- शिक्षको को दीवार पर प्रिंटरिच वातावरण बनाने में पूर्ण सहयोग किया गया | जिससे कोई भी विद्यार्थी चलते फिरते शिक्षा से जुड़े रहे और समय का सदुपयोग करे खाली समय मे दीवारों में प्रिंटरिच शिक्षा से अपने द्वारा स्वयं पढ़ाई कर सके | प्रिंटरिच जब बच्चे गांव में घूमते हैं, तो भाषा संबंधी संसाधन उनके आसपास ही होने चाहिए | उनकी कक्षा शिक्षण अधिगम सामग्री से परिपूर्ण होनी चाहिए | ऐसा करने से बच्चे भाषा के संपर्क में आकर उसका उपयोग देखकर, सुनकर तेजी से सीखेंगे | भाषा सीखना, सिखाना केवल भाषा की कक्षा में ही नहीं, बल्कि अन्य सभी विषयों में भी होता है | इसलिए विभिन्न संसाधनों के साथ कक्षा को समृद्ध करना महत्वपूर्ण है | विद्यालय व कक्षा में प्रिंटरिच वातावरण तैयार किया गया | स्कूल की दीवारें खाली नहीं होनी चाहिए, व बच्चे स्कूल के कोने-कोने से सीखें, प्रिंटरिच वातावरण द्वारा बच्चे भाषा, विज्ञान और गणित की मूल अवधारणाओं को आसानी से समझ सकते हैं |
पर्यावरण संदेश देना– इनके द्वारा विद्यालय परिसर व ग्राम के खाली जगह में वृक्षारोपण करके पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश भी इनके द्वारा दिया जाता है, व समस्त जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर सभी नागरिकों को वृक्षारोपण करने के लिए भी प्रेरित किया जाता है |
अँगना म शिक्षा में माताओ को प्रेरित करने का कार्य– कोरोना महामारी जैसी विषम परिस्थितियों में जहाँ विद्यालय बंद है, वही अपने ही अँगना में बच्चों को कैसे शिक्षा प्रदान की जाए इसके लिए सभी माताओं को प्रेरित का कार्य भी इनके द्वारा किया गया | माताओं को घर मे रहकर बच्चों को कैसे शिक्षा दी जाए शिक्षकों के साथ मिलकर सभी को समझाया गया | शिक्षक-शिक्षिकाओं को नई पहल करते हुए माताओं को भी घर में विभिन्न गतिविधियों द्वारा बच्चों को शिक्षा प्रदान करने की बातें कहीं |
किचन गार्डन की देखभाल– बच्चों के स्वादिष्ट भोजन मिल सके जिसके कारण इनके द्वारा विद्यालय परिसर में किचन गार्डन की देखभाल भी इनके द्वारा की जाती है | बच्चों को भी इसके लिए जागरुक करती है,कि हम कैसे इन सबकी देखभाल कर सके |
कोरोना जागरूकता अभियान-कोरोना काल में समस्त ग्राम वासियों को कोरोना से बचाव कैसे करे अपने आप को कैसे सुरक्षित रखे इन सब के लिए एक विशेष अभियान भी इनके द्वारा चलाया गया | दीवार लेखन कर किया जा रहा है लोगो को जागरूक किया गया | और हर व्यक्ति यह संकल्प ले कि वह अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करेगा तथा फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करेगा अर्थात एक दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाए रखेगा | इसी के माध्यम से संक्रमण की चेन टूटेगी |
मध्याह्न भोजन- छात्रों की नियमित उपस्थिति के संबंध में स्कूल भागीदारी पर मध्याह्न भोजन का महत्वपूर्ण प्रभाव पङता है| अधिकतर बच्चे खाली पेट स्कूल पहुंचते हैं | जो बच्चे स्कूल आने से पहले भोजन करते हैं, उन्हें भी दोपहर तक भूख लग आती है, और वे अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं | क्योंकि कक्षा में विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि वाले बच्चे साथ में बैठते हैं, और साथ-साथ खाना खाते हैं | इनका सहयोग हमेशा छात्र हित मे रहता है |
