बालोद/ गुरुर। बालोद जिले के गुरुर ब्लाक के ग्राम परसुली में एक कोचिये द्वारा सीमा से अधिक धान खरीदी किए जाने का मामला सामने आया है। उक्त कोचिया पूरन साहू के द्वारा लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में धान खरीदी की गई है। धमतरी क्षेत्र के एक व्यक्ति मनीष जैन के जरिए 100000 कट्टा धान की सप्लाई की गई है। इस धान की खरीदी परसुली सहित आसपास के कई गांवों के किसानों से की गई है। गर्मी सीजन में हुई इस खरीदी के एवज में किसानों को अब तक पैसा नहीं मिल पाया है। जबकि अब खरीफ़ का सीजन आ चुका है। किसान बार-बार कोचिये के घर चक्कर काट रहे हैं कि हमें हमारा पैसा दे दो। पर कोचिया उनका पैसा नहीं दे पा रहे। कुछ लोगों का आधा अधूरा ही पैसा दिया जा रहा है। किसानों के पास इसकी रसीद भी है कि कितने भाव में उनसे धान खरीदा गया था। अब जिस भाव से खरीदा गया था व जितने रुपए होते हैं उनका पूरा भुगतान कोचिये द्वारा नहीं किया जा रहा। आधा अधूरा भुगतान किए जा रहे हैं तो वहीं कई लोगों को भुगतान ही नहीं हुआ है। ऐसे में नाराज किसान कोचिये के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं और उसके खिलाफ एसपी ऑफिस जाकर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराए जाने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि हम कोचिये को बोलते हैं कि जल्दी पैसा दो तो उनके द्वारा कहा जाता है कि धमतरी के मनीष जैन द्वारा मुझे जिस भाव से सौदा हुआ था उससे कम में पैसा दिया गया है तो किसानों का कहना है कि हमें उससे कोई मतलब नहीं है। हमसे जो भाव में सौदा हुआ था हमें वह पैसा चाहिए। पर कोचिया अपनी जिम्मेदारी से बच कर सब मनीष जैन पर डाल रहा है। जिससे किसानों में आक्रोश पनप रहा है। वहां आंदोलन की तैयारी हो रही है ताकि इस तरह भोले-भाले किसानों को झांसे में लेकर नियम विपरीत धान खेती करने वाले कोचियों व दलालों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। कई किसानों को भी शादी ब्याह मकान बनाने में जरूरत है और उनके पास पैसा ही नहीं है। खरीफ फसल की तैयारी के लिए पैसा नहीं है। किसानों का यह भी कहना है कि जिस कोचिये के पास उन लोगों धान बेचा है वह कृषि केंद्र भी संचालित करता है और अधिकतर किसान उसी के पास से कृषि दवाई ले जाते हैं अपने इस दवाई के बदले दिए वाले पैसे के तो कोचिया धान खरीद कर काट देता है। पर जो अतिरिक्त पैसा उबरता है उसे भी अब तक देने में आनाकानी कर रहा है। मंडी अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए कोचिये द्वारा करोड़ों में खरीदी करके एक तरफ जहां शासन प्रशासन के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा किया है तो वहीं यह भी जांच का विषय है कि आखिर यह कारोबार इतने सालों से कैसे चल रहा था। किसानों की शिकायत के बाद आयकर विभाग की नजर भी अब इस करोड़ो की खरीदी करने वाले कोचिये पर आ सकती है। अन्य कोचिये किसानों से 1300 के भाव तक ही धान खरीद रहे थे। जब उक्त कोचिये द्वारा किसानों को 1400, किसी किसी को 1420 तक का भाव बता कर प्रलोभन दिलाकर धान खरीदा तो अन्य कोचियों का कारोबार भी ठप हो गया। पूरा धान सिर्फ एक कोचिये ने खरीद लिया और ऐसे तैसे उसने 100000 कट्टा धान धमतरी के मिलर को सप्लाई भी कर दिया। पर अब किसानों का पैसा फसा हुआ है। कोचिया पूरन व उसका भाई अब हाथ खड़े कर रहा है। किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और वह दिन दूर नहीं जब इस हरकत के लिए कोचिये व जो भी इस मामले में दोषी पाए जाते हैं उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर परसुली सहित आसपास के किसानों का कहना है कि हमें कोचिये पूरन द्वारा कुछ दिनों की मोहलत दी गई है। अगर इस बीच में हमारा पूरा पैसा नहीं देता है तो हम सभी एसपी ऑफिस जाकर शिकायत करेंगे व संबंधित थाने में एफ आई आर भी करवाएंगे। आयकर विभाग की भी शरण लेंगे।किसानों ने यह भी बताया कि जिस पूरन साहू द्वारा खरीदी की गई है वह गांव से गायब रहता है। दिन भर वह आता नहीं है। कभी कभार शाम को आता है। फिर रात में रहकर सुबह होने से पहले वह चला जाता है। किसानों का कहना है कि देनदारों से बचने के लिए वह इस तरह की हरकत करता है। पैसा उनका बड़ा भाई देता है। ऐसे में जो अधिकृत यानी जिससे खरीदी की गई है यानी मूल कोचिया गायब भी रहता है। जो कई संदेह को भी जन्म दे रहा है। किसानों को धोखाधड़ी की आशंका महसूस हो रही है और वह खुद को इस कोचिये से धान बेचवा कर ठगी महसूस कर रहे हैं। उक्त कोचिये द्वारा 100000 कट्ठा धान की खरीदी की गई है। जो लगभग 7 से 8 करोड़ का होता है।
परसुली के कोचिये के द्वारा 8 करोड़ से अधिक का धान घोटाला, किसानों से धान तो खरीदी है पर नहीं दे पा रहा पैसा, किसान धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाने की तैयारी में
