DAILY BALOD NEWS

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बालोद जिले के एपीसी गैंद लाल खुरश्याम बने पढई तुंहर दुआर के हमारे नायक,शाला प्रबंधन एवं विकास समिति व शिक्षको को प्रेरित करने वाले एपीसी की सफलता की कहानी लिखी राज्य स्तरीय ब्लॉग लेखक विवेक धुर्वे ने

बालोद। बच्चों को पढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन की योजना “पढई तुंहर दुआर” ने बच्चों को पढाई को एक नया मुकाम दिया है | ऐसे में ही बालोद जिले के एपीसी गैंदलाल खुरश्याम का चयन हमारे नायक के रूप में हुआ है।

उनकी सफलता की कहानी को विवेक धुर्वे राज्य स्तरीय ब्लॉग लेखक ने लिखा है। एक दौर था, जब बच्चों को अध्ययन के लिए गुरु के पास भेजा जाता था | पिछले पांच वर्षों में हुई इन्टरनेट क्रांति ने एक और शिक्षा के माध्यम को जन्म दिया वह है ऑनलाइन घर बैठे शिक्षा।कोरोना महामारी ने मानव जनित समूचे तन्त्र को विफल कर दिया, लोग घरों में कैद हो गये ऐसे विकट हालातों में भी ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बच्चों की शिक्षा को नियमित किया जा सकता हैं | जिसमे श्री खुरश्याम के द्वारा शिक्षको को भरकस प्रशिक्षण दिया गया व ऑनलाइन कक्षा से बच्चों को कैसे शिक्षा दे ये सभी शिक्षकों को बताया गया | शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के कार्यो का निरीक्षण भी इनके द्वारा किया जाता रहा है |
शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के कार्यो का निरीक्षण- विद्यालय में शाला प्रबंधन एवं विकास समिति का एक अहम योगदान रहता है | जिसमे श्री खुरश्याम को जिले के विद्यालयों की जिम्मेदारी दी गई है।जिले में एक महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए सभी विद्यालय में शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के साथ मिलकर बच्चों की शिक्षा में नवाचार,व उनके द्वारा सभी समस्याओं को इनके माध्यम से हल किया जाता है | व समय समय पर इनके सभी कार्यो को इनके द्वारा किया जाता है | साधारण सभा में विद्यालय में अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी के माता-पिता /संरक्षक, समस्त शिक्षक, सम्बन्धित कार्यक्षेत्र में निवास करने वाले सभी जनप्रतिनिधि एवं समिति की कार्यकारिणी समिति में निर्वाचित/ मनोनीत शेष सदस्य होते हैं | साधारण सभा के सभी सदस्य अर्थात प्रत्येक बालक के माता-पिता एवं उस परिक्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधि एसएमसी के सदस्य हैं | उन्हें एसएमसी के समस्त दायित्व एवं अधिकार प्राप्त है | इनके द्वारा सभी विद्यालयों में समय समय पर मीटिंग आयोजित की जाती है | जिससे बच्चों की शिक्षा से जुड़े सभी समस्याओं को सुलझाया जाता है व समिति के सदस्य व शिक्षक भी योजना बना कर बच्चों की शिक्षा पर योजना बनाते है |
मोहल्ला कक्षा-जो बच्चे ऑनलाइन कक्षा से जुड़ नही सकते थे, उन सभी के लिए छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर सभी जिलों में मोहल्ला कक्षा की शुरुआत की गई, उसमे से एक है, बालोद जिला जहाँ श्री खुरश्याम के द्वारा सभी गांवों में भ्रमण करके मॉनिटरिंग करके शिक्षको को मोहल्ला कक्षा के लिए प्रेरित किया गया |
लाउडस्पीकर-लाउडस्पीकर मॉडल पढ़ाई की वह तकनीक है, जिसके माध्यम से शिक्षक एक लाउडस्पीकर माध्यम से पाठ या अन्य पाठ्य सामग्री का वाचन करता है, और बच्चे अपने घर में रहकर या किसी जगह में समूह बनाकर बैठ कर  सुनते है | इस मॉडल से पढ़ाई की शुरुआत प्रतिदिन राज्यगीत से की जाती है | लाउडस्पीकर के माध्यम से बच्चों को विभिन्न कार्य भी दिए जाते है | जिसे बच्चे अपने घर में रहकर करते है, इस कार्य को श्री खुरश्याम ने प्रत्येक ग्राम में सरपंच से मिलकर व शिक्षको को प्रेरित करके बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया और सभी समस्याओं को सुलझाने का भी प्रयास इनके द्वारा किया जाता रहा है |

टीएलएम-
शिक्षण सहायक सामग्री जब एक शिक्षक अपने छात्रों को पढ़ाता या कुछ सिखाता है, तो वह छात्रों से अपेक्षा रखता है, कि छात्र उस विषय वस्तु को अच्छे से सीखे और याद रखें इसके लिए वह अपने शिक्षण में बहुत सी शिक्षण सहायक सामग्री और स्वनिर्मित उपकरणों / सामग्री का प्रयोग करता है, इन्हीं सामग्रीयों को ‘टीचिंग लर्निंग मैटेरियल’ अथवा शिक्षण सहायक सामग्री कहते हैं। जिसके चलते श्री खुरश्याम के द्वारा समय समय पर सभी विद्यालयों का निरीक्षण करके शिक्षको को इसकी जानकारी दी व राज्य के द्वारा दिये निर्देश को उनके द्वारा समझाया गया व जिले के कई शिक्षक राज्य से इस कार्य मे जुड़े हुए है |

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार में सहयोग-

शिक्षक क्षमता, शिक्षक प्रशिक्षण तथा उत्प्रेरण, कारगर शिक्षा पद्धति को बढ़ावा देकर तथा जिला और ब्लॉक स्तर पर स्कूली शिक्षा प्रणाली के बेहतर प्रबंधन की क्षमता में सुधार करके सर्व शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा की गुणवत्ता पर समुचित ध्यान दिया जा रहा है |

अँगना म शिक्षा-

कोरोना के चलते आंगनबाड़ी संचालित नहीं हो पा रहे हैं,लिहाजा छोटे बच्चे अपनी पढ़ाई भूलते जा रहे हैं,छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे ध्यान में रखते हुए ‘अंगना म शिक्षा’ योजना की शुरुआत की है, बच्चे घर पर ही रह कर अपने माता से प्राथमिक शिक्षा ले सकें जिसे उन्हें स्कूल खुलने पर पढ़ाई करने में परेशानी का सामना ना करना पड़े | इसके लिए इन्होंने टीम बना कर अपने जिले में इस योजना में बढ़ चढ़कर सभी शिक्षको व पालको व बालको को जोड़ने में विशेष अभियान चलाया व बालोद जिले में इस योजना का लाभ सभी उठा रहे हैं |

प्रिंटरिच वातावरण-
हम सभी इस बात से अवगत होने लगते हैं, कि उनके चारों-ओर दिखाई देने वाले प्रिंट में कोई अर्थ भी छिपा है | घर पर और समुदाय में प्रिंटरिच वातावरण ही अक्सर वह पहला लेखन होता है, जिसे पढ़ना छात्र सीखते हैं | यह ऐसा लेखन है, जो दैनिक जीवन का एक अंग है | हमारे आस-पास विभिन्न संकेतों, टिकटों, अख़बारों, पैकेटों और पोस्टरों पर दिखने वाला लेखन | छात्र जब स्कूल में आते हैं, तो उन्हें प्रिंटरिच वातावरण के नए स्वरूप देखने को मिलते हैं, चार्ट, सूचियाँ, अनुसूची, लेबल और सभी तरह की पठन सामग्री | शिक्षक अंग्रेज़ी सिखाने के लिए स्कूल और समुदाय के इन संसाधनों का अच्छा उपयोग कर सकते हैं | इसके लिए इनके द्वारा राज्य से सहयोग राशि के माध्यम से सभी विद्यालयों में पेंटिंग करवाई गई जिससे विद्यालय व गाँव का माहौल कलरफुल हो गया|

आमा राइट-
ग्रीष्मकालीन प्रोजेक्ट आमा राइट अपने आसपास के परिवेश के खेल-खेल के मनोरंजन तरीके के बच्चों को सक्रिय कर सीखने का कार्यक्रम या पूर्णतः सभी बच्चो के लिए स्कूल से आमा राइट प्रोजेक्ट दिए गए है,और सभी बच्चो को प्रोजेक्ट बनाना जरुरी है, क्योकि आमा राइट प्रयोजना के अंक आपकी वार्षिक परीक्षा में जोड़े जायेंगे | इसलिए सभी बच्चे अच्छे तरीके से प्रोजेक्ट बनाए, ताकि आपको पुरे नंबर मिल सके | इनकी किसी भी समस्या को इनके द्वारा हल किया जाता है,व सभी शिक्षको को स्पष्ठ निर्देश इनके माध्यम से दिया गया है ,की कोई भी बच्चों इस कार्य से छूटे न |
शाला त्यागी बच्चों को शिक्षा प्रदान करना-

जिन बच्चों ने बीच में ही शिक्षा किसी कारणवश छोड़ दी उन बच्चों को विद्यालय में वापस लाने के लिए एक विशेष टीम बना कर विद्यालय का सहयोग करते है | जिससे कोई भी बच्चा शिक्षा से दूर न हो |

शून्य निवेश नवाचार –
बिना खर्च के शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाना ऐसे तरीके जिन्हें शिक्षक अपनी कक्षा में प्रयोग करके शिक्षा में सकारात्मक बदलाव लाते हैं, उनका यह तरीका राष्ट्रीय स्तर पर एक नवाचार बन सकता है,ऐसा शायद आपने सोचा भी नहीं होगा | इसी के चलते सभी शिक्षकों को इनके द्वारा मोटिवेट किया जाता है जिससे जिले से कुछ न कुछ नवाचार राष्ट्रीय स्तर पर जा सके |
इनके अनुसार छत्तीसगढ़ शासन की योजना “पढ़ई तुंहर दुआर” जिससे कोरोना जैसी भयानक महामारी में भी बच्चों को घर बैठे शिक्षा, शिक्षकों के माध्यम से प्रदान की जा रही है जो कि पूरे देश मे तारीफे काबिल है |

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