भरत भरद्वाज- विशेष संवाददाता , फरसगांव ( कोंडागांव) – बार-बार सरकारी नुमाइंदों और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद जब किसी ने नहीं सुनी तो ग्रामीण खुद ही अपनी किस्मत बदलने में जुट गए। वर्षों से आश्वासन के सहारे आवागमन कर रहे क्षेत्र के लोगों ने नई मिसाल कायम की। इन लोगों ने आपस में मिलकर नाले में लकड़ी का पुल बनाकर प्रशासन को आइना दिखा दिया। सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं लकड़ी के बने छोटे पुल। ये पुल ग्रामीणों ने अपनी मेहनत से बनाए हैं। क्योंकि वे पुल नहीं बनाते तो उनका अपने गांव से दूसरे गांव जाने में काफी दूरी तय करना पड़ रहा था। ऐसे में ग्रामीणों ने खुद होकर लकड़ी का पुल बना दिया। यह आलम विकास खंड फरसगांव के सुदूर गांव बड़ेडोंगर क्षेत्र के ग्राम पंचायत आमगांव नाले का है। ग्राम पंचायत उरंदाबेड़ा से ग्राम मडकड़ा पहूंच मार्ग चार किमी में न सड़क निर्माण हुआ और न ही आमगांव नाले पर पुलिया निर्माण हुआ जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इस राह में रास्ते के नाम पर पंचायत द्वारा मिट्टी डालकर तैयार की गई पगडंडी नुमा सड़क तो है परन्तु आमगांव नाले पर पुलिया निर्माण नहीं होने से एक गांव से दूसरे गांव आवागमन में भारी परेशानी हो रही थी। इधर सरकार द्वारा अंदरूनी दुरस्त क्षेत्र में सड़क का जाल बिछाने का दावा भी खोखला साबित हो रहा है।
उरंदाबेड़ा के निवासी सोमनाथ पोटाई, आमगांव निवासी ललित सलाम, प्रेम मंडावी ने बताया कि गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क तथा पुल-पुलिया का नहीं होना है। ग्रामीणों ने सरकार की हर व्यवस्था तक पहुंचकर आवेदन निवेदन कर चुके हैं लेकिन कोई उनके गांव के दर्द को समझ ही नहीं रहा था। इसलिए गांव वालों ने रास्ता निकाला और लकड़ी से लगभग 15 मीटर का पुलिया निर्माण कर ग्रामीणों के लिए कुछ हद तक आवागमन सुलभ करवाने की कोशिश की। समस्या से ग्रामीण इतने त्रस्त हो गए थे की सहर्ष तैयार हो गए तथा दूसरे ही दिन से पुलिया बनाने में जुट गए। लकड़ी की पुलिया बनाने का फायदा ये हुआ की अब साईकिल तथा पैदल आने जाने में सुविधा हुईं। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल बरसात के दिनों में गांव से चार किमी तक सड़क कीचड़ से भर जाती है, जिसकी निर्माण के लिए कई बार प्रशासन को समस्या का हल करने आवेदन दिया जा चुका है। अब थक-हार कर सभी ग्रामीण खुद के लिए श्रमदान कर पुल का निर्माण कर दिया।
