प्रेम प्रसंग के चलते बाल विवाह, अपने गुरु को साक्षी मानकर बन गए थे पति- पत्नी, प्रशासन ने किया हस्तक्षेप



मालीघोरी/ जगन्नाथपुर। बालोद ब्लॉक के ग्राम तरौद में रविवार को उस वक्त प्रशासन हरकत में आ गई जब पता चला कि वहां चोरी-छिपे प्रेम प्रसंग के चलते धार्मिक आस्था से जुड़कर गुरु को साक्षी मानकर प्रेम विवाह कर लिया गया है। लेकिन दोनों ही लड़का और लड़की नाबालिग है। मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन की टीम गांव आ धमकी और दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसलिंग की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी सीमा सिंह, तहसीलदार रश्मि वर्मा व बाल संरक्षण विभाग से नरेंद्र साहू सहित बालोद थाने की टीम इस मामले को सुलझाने के लिए पहुंची थी। दरअसल में मामला बाल विवाह के साथ साथ प्रेम प्रसंग का भी था। लड़की इसी गांव से है। जिसकी उम्र 17 साल 2 माह है तो लड़का बलौदा बाजार का है ।जिसकी उम्र 19 साल 2 माह है। दोनों की अभी शादी की उम्र नहीं हुई है। 1 माह पहले ही दोनों की पहचान हुई थी। बलौदा बाजार का लड़का तरौद के ही एक ईंट भट्ठा में काम करता है। इस दौरान दोनों के बीच प्रेम प्रसंग हुआ जब परिजनों को इस बात की जानकारी हुई तो दोनों शादी करने के लिए राजी थे। तो परिजनों ने भी सहमति दे दी पर उम्र ना होने के बाद भी दोनों ने गुरु के छवि चित्र के सामने उन्हें साक्षी मानकर मंगलसूत्र पहन लिया व चूड़ी भी पहना दी और पति-पत्नी की तरह रहने लगे। इस बात की जानकारी प्रशासन तक पहुंची। उम्र ना होने के चलते यह बाल विवाह का प्रयास माना गया और प्रशासन ने दोनों पक्षों को बुलाकर चेतावनी दी कि ऐसा नहीं कर सकते।

जब उम्र होगी तभी वे साथ रह सकते हैं। तभी ये शादी मान्य होगी जिसके बाद दोनों पक्ष राजी हुए और लड़की को परिजन अपने घर ले गए तो वही लड़का अपने घर अपने परिवार के सदस्यों के साथ चला गया। जब उम्र होगी तब वे अधिकृत शादी करेंगे। बता दें कि इसके पहले भी दो और बाल विवाह रुकवाए गए थे। एक घटना ग्राम सिब्दि सुरेगांव थाना क्षेत्र में हुई थी तो दूसरी घटना बालोद के ओरमा में। हालांकि उन घटनाओं में शादी होने वाली थी। शादी के कार्ड तक बट गए थे उसके पहले ही दूल्हा दुल्हन की उम्र कम होने के चलते प्रशासन ने हस्तक्षेप कर शादी करवाई थी तो वही तरौद के इस मामले में भगवान व अपने इष्ट गुरु को साक्षी मानकर नाबालिक दूल्हा दुल्हन ने औपचारिक शादी कर ली थी और साथ रहना शुरू कर दिया था ।पर प्रशासन को खबर मिलते ही उक्त शादी को भी अमान्य कर उन्हें अलग-अलग अपने-अपने घर भेजा गया।

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