बालोद – दल्ली पुलिस ने अपनी पत्नी पर प्राण घातक हमला करने के आरोप 256 चौक के रहने वाले एक पति झुम्मन सतनामी के खिलाफ में धारा 307 का केस दर्ज किया है घटना के बाद से आरोपी पति अब तक फरार है पुलिस तलाश कर रही है बताया गया कि 9 अप्रैल को पति ने अपनी पत्नी का दुसरे से अफेयर होने व उससे मोबाइल में बात करने की बात पर लड़ाई की थी घायल पत्नी निर्मला टण्डन पति झुम्मन उर्फ चुम्मन सतनामी उम्र 27 वर्ष साकिन- मधु टाकिज वार्ड क्रं. 02 दल्लीराजहरा थाना- दल्लीराजहरा को परिजनों ने मारपीट के बाद जिला अस्पताल बालोद में भर्ती कराया था राड से पत्नी के गले व अन्य हिस्से में वार किया गया है होश आने के बाद पुलिस में पत्नी को यह बयान दिया है ….
जैसा पीडिता ने पुलिस को बताया ,,,,
मैं मधु टाकिज के पास दल्ली राजहरा में रहती हूं रोजी मजदूरी का काम करती हूं । वर्ष 2009 में ईश्वरी जोशी ग्राम माहूद (बी) से शादी हुई थी। जिससे हमारा 1 सात वर्ष का बेटा है एवं 1 छः साल की बेटी है। पिछले 01 साल से पति के साथ वाद-विवाद के चलते उसे छोड़कर अपने मायके दल्ली राजहरा में रहती हूं तथा बीते 3 माह से झुम्मन सतनामी मुझे पत्नी बनाया है। तब से हम लोगों का एक दूसरे के घर आना जाना लगा रहता है। दिनांक 9.04.2021 के 1:30 बजे दोपहर में झुम्मन मुझे फोन करके बोला कि 10 मिनट के लिए मेरे घर आ जाओ। तब मैं करीब 2:00 बजे उसके दादी कलिंन्द्री देशलहरे के घर जहां झुम्मन रहता है वहां पहुंची तो मुझे झुम्मन ने कहा कि मैं तुम्हें पत्नी बना लिया हूं। लेकिन तुम मेरे साथ नहीं रहती। जिस पर मैंने कहा कि तुम अपनी दादी के साथ छोटे से झोपड़ी में रहते हो, यहां लाइट पंखा नहीं है। बाथरूम के लिए जगह भी नहीं है तो मैं कैसे रहूंगी। हमारे लिए अलग से किराए का घर ढूंढ लो तब मैं तुम्हारे साथ रहूंगी। इसी बात पर झुम्मन ने मेरे साथ विवाद करते रहा एवं करीब 03.30 बजे घर के अंदर कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया और कहने लगा कि तुम दूसरे-दूसरे से मोबाईल में बात करती हो। तुम्हारा किसी और से संबंध है। इसी कारण मेरे साथ नहीं रहने के लिए बहाना बना रही हो। आज तुम्हे जिंदा नहीं छोड़ुंगा कहकर लोहे की राड से मेरे सिर को मारा उसके बाद हंसिया से मेरे गले में वार किया। जिससे मैं स्वयं को बचाने की कोशिश की। उसके द्वारा हंसिया से वार करने से मेरे दाहिने हाथ की हथेली, बाएं हाथ की कलाई, छाती में दाहिनी तरफ चोट आया है। मेरे गले में गहरा चोट आने के कारण मैं बेहोश हो गई थी। कुछ देर बाद जब होश आया तो झुम्मन कमरे में नहीं था। दरवाजा लगा हुआ था जिसे खोलकर मै कमरे से बाहर आई तो घर का मेन दरवाजा बाहर से बंद था। उसी समय झुम्मन फिर से आया और मुझे खींचकर कमरे के अंदर ले जाने लगा तो मैं बोली कि मैं कहीं नहीं जाऊंगी यही बैठी कहकर बातों में उलझाने में लगी। उसी समय कलिंद्री बाई पार्षद, जनक निषाद आकर दरवाजा खटखटाया तब झुम्मन दरवाजा खोलकर भाग गया। उसके बाद मुझे कलिन्द्री एवं चंद्रिका सतनामी मुझे इलाज के लिए चिखलाकसा के अस्पताल ले गये। जहां डक्टर ने रिफर करने के बाद जिला अस्पताल बालोद लाए।
