गुरुर के इस गांव में एकजुटता की अनूठी मिसाल- गांव में पानी की समस्या को देख लोगों ने चंदा कर जुटाया 1 लाख 20 हजार, कराया बोर, अब समस्या दूर



बालोद | ग्राम पंचायत धनेली के शीतला पारा के युवाओं ने गांव को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए एक अनूठा कदम उठाया है। यहां के ग्रामीणों ने आपस में चंदा करके 1 लाख 20 हजार रुपये जुटाए और गांव में एक तालाब के किनारे बोर करवाकर पानी की समस्या दूर की गई। दरअसल में गांव के अन्य सरकारी बोर और हैंडपंप लगातार बढ़ती गर्मी से वाटर लेवल डाउन होने के कारण बंद हो गए थे। इससे वार्ड 1 से लेकर 7 तक के लोगों को पानी को लेकर बहुत परेशानी हो रही थी। हैंड पंप बंद हो गए थे तो और कोई स्रोत भी नहीं बचा था, जिससे पानी भर सके। लोग दूसरे वार्ड में पानी के लिए भटक रहे थे। इसे देखते हुए गांव के युवाओं ने तय किया कि पानी की समस्या का कोई ना कोई रास्ता निकाल लेंगे। फिर बैठक लेकर तय हुआ कि क्यों ना मिल कर एक बोर कराया जाए। गांव में सरकारी बोर फेल होने से एक चिंता यह भी थी कि हम बोर आखिर कहां कराएं कि पानी आसानी से निकले। ऐसे में गांव के एक आदिवासी किसान शीतल सिंह ठाकुर जिनका तालाब है, उनसे बात की गई कि उनके तालाब के किनारे एक बोर करवाएंगे। ग्राम हित को देखते हुए किसान राजी हो गया और उनकी निजी जमीन पर सबकी सहमति व चंदे से हासिल रकम के जरिए बोर करवाया। देखते-देखते बोर एक ही प्रयास में सफल हो गया और वहां पर अब सिंटेक्स की टंकी व नल कनेक्शन लगा दिया गया है। जिससे अब ग्रामीण आसानी से पानी भर सकते हैं। इस जल स्रोत से वार्ड 1 से लेकर 7 तक  के ग्रामीण भी पानी भरने के लिए आते हैं। जिन्हें पहले काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। इस पहल से ग्राम पंचायत धनेली के उन सेवा भावी ग्रामीणों व युवाओं की काफी सराहना हो रही है जिन्होंने बिना किसी पंचायत प्रशासन व सरकार के सहयोग के गांव में व्याप्त पानी की समस्या का हल निकाला और सफल भी हुए। ग्रामीणों के इस प्रयास को देखते हुए गुरूर के एक कबीर ट्रेडर्स के संचालक नूरसिंह केहरी ने वहां पर सिंटेक्स टंकी भी लगाई तो वहीं अन्य ग्रामीणों ने यथासंभव सहयोग किया।

लगभग हर घर से 200 से 500 तो किसी ने दिए  दो हजार तक

ग्रामीणों ने बताया कि पानी की समस्या से जूझ रहे थे इसलिए इसका हल निकालने के लिए सभी तत्पर थे और जब सुझाव आया कि एक बोर करवाया जाएगा सब का सहयोग जरूरी है तो फिर हर ग्रामीण ने इसमें अपना अंशदान दिया। लगभग हर घर से 200 से 500 तो कई संपन्न परिवारों ने 1000 तो किसी ने ₹2000 तक दान दिए  और देखते-देखते बोर करवाने के लिए पर्याप्त रकम इकट्ठा हो गई। जन सहयोग से 90 हजार रुपये जुटाए गए तो वहीं गांव के शीतला पारा के युवाओं द्वारा भी अलग से फंडिंग की गई थी। इन सभी रकम को मिलाकर एक नया बोर खनन कराया गया। जिससे अब पूरे मोहल्ले को पेयजल की आपूर्ति हो रही है। इसमें पंचायत की ओर से फिलहाल कोई सहयोग नहीं मिला है ।ग्रामीणों ने स्वयं के निजी अंशदान व आपसी सहयोग से यह पहल की है। एकता की अनूठी मिसाल ग्रामीणों ने पेश की है। यह पहल ये  साबित करती है कि गांव में किसी भी तरह की समस्या है तो हम उसका डटकर सामना करने के लिए तैयार है और पानी की शुरुआती समस्या को भांपते हुए आने वाले दिनों में दिक्कत का सामना ना करना पड़े इसलिए ग्रामीणों ने जल्द से जल्द कदम उठाया और बोर कराया। ग्रामीण नीलकंठ शहरे, सेवा नृवित्त प्राचार्य हैं, जिनका इस पहल में अहम योगदान रहा। शुरुआत इन्हीं से ही हुई। उनके बेटे मोहन शहरे जिन्होंने बोर करवाने की शुरुआत की फिर जो भी खर्च आया उसे ग्रामीणों ने सब मिलकर वहन किया।

ये हो गये थे हालात

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगभग 9 हैंडपंप जिसमें 7 बंद हो चुके हैं दो ही चालू है। तो वहीं सरकारी बोर जो नल जल योजना के तहत खोदे गए हैं वे   पांच में चार बार बंद हो चुके हैं सिर्फ एक के भरोसे काम चल रहा है। इससे पानी की समस्या बढ़ गई थी। धनेली एक बड़ा पंचायत है आबादी भी ज्यादा है। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने पानी की समस्या दूर करने के लिए यह प्रयास किया। प्रमुख रूप से चिमन साहू, व्यास विश्कर्मा, वीरेंद्र गंगबेर, टोडरमल, पुनेश्वर साहू, रूपराम केहरी, कन्हैया यादव, भोज उंदे, मोहन शहरे, इंदल साहू,पुनेश्वर विश्वकर्मा, हेम कुमार, सतीश केहरी, पंच तमेश्वरी ठाकुर का भी योगदान रहा।

You cannot copy content of this page