अर्जुन्दा – आज महिला दिवस 8 मार्च पर नारी सशक्तिकरण व शिक्षा की दिशा में काम कर रही पुष्पा चौधरी( उच्च वर्ग शिक्षक, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अर्जुन्दा,संकुल –अर्जुन्दा ने कहा हम जिस समाज में रहते हैं वह पुरुष प्रधान समाज है। हम जहां कहते हैं कि पुरुष को समाज के हालात में सोच में कुछ सुधार करने चाहिए, वही औरत ही खुद में बदलाव करेंगी तो उनके लिए और आने वाले पीढ़ी के लिए समय बहुत बेहतर हो सकता है। आज के परिदृश्य में तो कहा जाता है कि महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त है। मगर हम समाज के ऐसे चक्रव्यूह में बंधन में फंसे हुए हैं कि हमें तो अधिकार प्राप्त है। मगर हम अपने अधिकार को यदि खुलकर सामने आकर अधिकारों को प्राप्त करने के लिए रास्ता चुने तो समाज के कुछ ऐसे वर्ग भी हैं जो अधिकार प्राप्त करने में आड़े बनते हैं। उन्होंने कहा पुरुष प्रधान समाज के लिए अगर अपने अधिकार और कर्तव्य के लिए स्त्रियां एकजुट होकर लड़ाई नहीं लड़ेंगे तो लोगों की मानसिकता बदलने में वह सफलता हासिल नहीं होगी। यह बदलाव औरत के दिमाग से शुरू होनी चाहिए और हम अपना मन बदल लेंगे।| तकलीफ तब होती है जब महिला खुद को अबला समझती है। यह जानना जरूरी है कि मानसिक बल ज्यादा जरूरी है और औरतें क्या कर सकती हैं? आप में बल तब तक है जब तक आप मान कर चले। जिस दिन आपके अपने ऊपर से वह विश्वास खत्म कर दिया जाए और उस दिन आप निर्बल हो गई तो अपने ऊपर विश्वास बना कर रखना जरूरी है कि हम किसी से कम नहीं। तभी समाज में अपने हक, कर्तव्य, अधिकारों को प्राप्त कर सकते हैं। पुरुष प्रधान समाज की कई बातों से आपत्ति है। जैसे हम मर्द और औरत के अलग अलग व्यवहार को स्वीकार करते हैं। आज और अभी घर से निकल कर काम कर रही है। लेकिन एक सोच हमारे समाज में बिल्कुल ही नहीं आएगी। अगर औरत घर से निकल कर काम करके रोजी रोटी कमा सकती है तो पुरुष घर पर रहकर भी घर को संभाल सकता है। बच्चों की परवरिश कर सकता है। अगर पुरुष चार बर्तन मांज देता है तो उसमें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। मगर औरत जितनी घर और बाहर को संभालती हैं उतना जिम्मेदारी सभी जगह निभा सकती है।

आज भी कहते हैं कि समाज में बदलाव हो चुका है। मगर कहीं ना कहीं औरतों और महिलाओं पर अत्याचार होता है। जिसे सामाजिक बंधन और अपमान होने के डर से दबा दिया जाता है। जो कि आज के परिदृश्य के समक्ष प्रस्तुत है। मगर इसके लिए समाज को ऐसे नियम बनाने होंगे जो सभी के लिए सम्मान और अधिकार को प्राप्त कर सके। पुष्पा ने महिलाओं से अपील की समाज में बदलाव हमें ही लाना पड़ेगा। हमें एकजुट होना पड़ेगा। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ 1 दिन मनाने से उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। मगर इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अर्थात महिलाओं के लिए 1 दिन का चुना जाना यह हमारे लिए गौरव और सम्मान की बात है। हम उस शख्स को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने एक औरत के लिए एक महिला के लिए यह दिवस को चुना है। जो कि हमारे गौरव का दिवस होता है। सभी समाज के वर्गों को एकजुट होकर ऐसा कुछ नियम बनाना होगा जिससे सारी महिलाएं स्वच्छंद होकर अपना कार्य कर सकें।
