राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में विज्ञान प्रोजेक्ट लगातार दो बार नेशनल तक गई, उनके प्रोजेक्ट शासन के पुस्तकों में भी प्रकाशित हुए
जगन्नाथपुर/बालोद – किसी भी क्षेत्र में महिला पुरुषो से कम नहीं, शिक्षा बदल रही महिलाओ की जिंदगी,, इस लाइन को सार्थक कर रही हैं कादम्बिनी लोकेश पारकर यादव। जो क्षेत्र के ग्राम बड़गांव हायर सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ है। वर्तमान में नवापारा में पारकर परिवार की बहु व बालोद की बेटी भी है। जो महिलाओ के लिए एक मिसाल है। उनका जोश जज्बा व कुछ कर लेने का जूनून ना तो कल्पना चावला से कम है और ना ही पंडिता रमा बाई से। एक सफल शिक्षिका व समाजसेविका के साथ साथ एक धर्मपत्नी होने का दायित्व कादम्बिनी लोकेश पारकर निभा रही। जो सभी महिलाओ के लिए अनुकरणीय है। नवापारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आरएमओ के रूप में पदस्थ लोकेश पारकर की धर्मपत्नी कादम्बिनी पारकर नवापारा शहर की बहु है। अपने समाजसेवा के कार्य व पति के साथ खाली समय में चिकित्सीय कार्यों में हर पल मदद के लिए तत्पर रहने वाली कादम्बिनी को सभी भलीभांति जानते है। कादम्बिनी बड़गांव में विज्ञान विषय की शिक्षिका है। इन्हे शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देते हुए लगभग 12 साल हो गए और यह शैक्षिक कार्यकाल भी इनके मेहनत के दम पर सफलताओ से भरा हुआ है। अपने जबरदस्त शैक्षणिक अंदाज व सकरात्मक शिक्षण के चलते वह विद्यालय की सफल शिक्षिकाओं में से एक व बच्चों की खास है। बालोद जिला हो या फिर रायपुर का नवापारा हो, जहाँ उनके पति पदस्थ है, वह दोनों जगहों को सही ढंग से समन्वय करती है और एक शिक्षक सहित जिम्मेदार पत्नी की भूमिका भी निभाती है। कोरोना महामारी के भयावह समय में भी जब स्कूल बंद थे, तो उन्होंने सरकारी स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन पद्धति से नियमित रूप से पढ़ाने का काम करती थी। इसके अलावा जब घरेलु काम से फुर्सत मिलती तो पति के साथ उनके चिकित्सा कार्य में भी एक सहयोगी की भांति काम करने से नहीं थकती थी। चम्पारण क्षेत्र में जब गुजरात व महाराष्ट्र के लोग आकर क्वारेंटीन सेंटर में ठहरे हुए थे तब भी कादम्बिनी लोकेश पारकर अपने पति के साथ वहां जाकर उनके सहयोग के लिए कदम से कदम मिलाते हुए डटी रही। इसके अलावा अस्पताल के समीप में क्वार्टर होने के नाते जब कभी भी किसी मरीज व मरीजों के परिजनों को व अस्पताल के कर्मचारियों को किसी चीज की जरूरत पड़ी कादम्बिनी ने उन्हें हंसकर सहयोग प्रदान किया। कोरोना काल में भी वह कोरोना से बचाव के लिए स्थानीय अस्पताल सहित सब्जी बाजार में भी मास्क बाँटने का कार्य करती थी। यह सभी सेवाभावी गुण उनके अंदर बचपन से समाहित है। उन्होंने बताया आज महिलाएं पुरुषो की तुलना में कही भी किसी भी क्षेत्र में कम नहीं है। इसका कारण बना शिक्षा। शिक्षित होने के चलते आज के सामाजिक परिवेश में महिला सशक्तिकरण को काफ़ी बढ़ावा मिला है। देश के संसद से लेकर, थल हो या जल, आसमान हो या खेल व फ़िल्मी जगत, सभी जगह सफलता का परिचम लहरा रही है। महिलाएं बेबस व बेचारी बनकर नहीं खुलकर जीवन जी रही। आज महिला व पुरुष में कोई अंतर नहीं है. अंतराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओ को अपने अंदर छुपी हुई प्रतिभा को पहचानने का दिवस है। आप सभी उस प्रतिभा को पहचाने और उसे निखारे. फिर देखना ऐसी सफलता आपको मिलेगी की आपको पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़ेगा।
स्कूल शिक्षा विभाग सहित अनेको संस्था से हो चुकी है सम्मानित

कादम्बिनी लोकेश पारकर नारीशक्ति के लिए एक गर्व का नाम है, और किसी मिशाल से कम नहीं है। क्योंकि इन्होने शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांति लाने का काम किया है। अपने विषय पर पारंगत होने के चलते व एक कुशल शिक्षक के सभी गुण समाहित होने के चलते, संस्कृति, कला एवं साहित्य के प्रतिभा से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इन्हे स्कूल शिक्षा विभाग, शिक्षक, कला व साहित्य सहित अकादमी, राज्य स्तरीय अक्षण अलंकरण समिति व महावीर इंटर कॉन्टिनेंटल आर्गेनाइजेशन सहित अन्य समाजिक संस्थाओ ने भी प्रसस्ति पत्र व उपहार देकर सम्मानित किया है। उन्हें नारी शक्ति प्रतिभा रत्न सम्मान, द रियल सुपर वूमेन व कोरोना योद्धा के रूप में नवाज़ा जा चूका है।
पाँचवी कक्षा की पुस्तक “अवसर ” पर भी लिख चुकी है पाठ…
विज्ञान विषय में विशेष रूचि रखने वाली कादम्बिनी लोकेश पारकर एक सफल शिक्षिका है. इनकी योग्यता को पहचानते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने कक्षा पाँचवी के पुस्तक “अवसर ” पर इन्हे पर्यावरण अध्ययन विषय पर लिखने का मौका दिया. जिसमे उनके विचार पाठ के रूप में समाहित है. इसके अलावा राष्ट्रिय बाल विज्ञान कांग्रेस की पुस्तक में उनके प्रोजेक्ट तक को शासन ने प्रकाशित किया है।
शिक्षा मंत्री सहित विभागीय अधिकारियो ने भी किया इनके हौसले को सलाम
बड़गांव में शिक्षिका के रूप में कार्यरत खाली यही नहीं रुकना चाहती। वह अपनी विषय में बच्चों को बहुत ऊंचाई तक ले जाना चाहती है। इसीलिए वह विज्ञान विषय को रुचिकर बनाने के लिए बच्चों के जैसे बहुत मेहनत करती है। यही कारण रहा की इनका हर क्षेत्र में विभागीय अधिकारियो ने भी इन्हे आगे बढ़ने का हर अवसर प्रदान किया। विशेषकर कोरोनाकाल में नियमित ऑनलाइन कक्षाएं लेकर, ऑनलाइन टीचिंग के लिए एक मास्टर ट्रेनर की भूमिका देकर व राज्य के शिक्षामंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम के साथ पढ़ाई तुंहर योजना के सफल क्रियान्वयन को लेकर बेहतर उपाय के बारे में संवाद कर उन्होंने सभी का दिल जीत लिया। यही सब कारणों से राज्य के शिक्षामंत्री सहित विभागीय अधिकारियो ने भी इनके हौसले को सलाम किया।
