ठोस अपशिष्ट प्रबंधन 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुराने वाहनों का पुनः उपयोग, चार श्रेणियों में होगा कचरे का पृथक संग्रहण
बालोद, 12 जून 2026। जिले में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक नवाचारपूर्ण पहल करते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पुराने एवं अनुपयोगी ट्रायसायकिल वाहनों को पुनः उपयोग योग्य बनाकर कचरा संग्रहण वाहन के रूप में तैयार किया जा रहा है। यह पहल सुप्रीम कोर्ट एवं राज्य कार्यालय के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है।

इस अभिनव मॉडल का अवलोकन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने किया। उन्होंने इस पहल को संसाधनों के संरक्षण, कम लागत और पर्यावरण अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
अलग-अलग डिब्बों में होगा अलग-अलग कचरे का संग्रहण
संशोधित ट्रायसायकिल में विभिन्न प्रकार के कचरे के पृथक संग्रहण के लिए अलग-अलग खंड विकसित किए गए हैं। इसमें—
- लाल डिब्बा – सेनेटरी पैड एवं डायपर जैसे सैनिटरी अपशिष्ट के लिए
- पीला डिब्बा – इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के लिए
- अन्य खंड – गीला, सूखा एवं घरेलू जोखिमयुक्त कचरे के लिए निर्धारित किए गए हैं।
वाहन पर स्वच्छता एवं कचरा पृथक्करण संबंधी जागरूकता संदेश भी अंकित किए गए हैं, जिससे घर-घर कचरा संग्रहण के दौरान लोगों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया जा सके।
कम लागत में बेहतर प्रबंधन की दिशा में पहल
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत ग्राम पंचायतों को स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण, पृथक संग्रहण, परिवहन एवं वैज्ञानिक प्रबंधन को अनिवार्य रूप से लागू करना है।
इसी उद्देश्य से पुराने ट्रायसायकिल का मॉडिफिकेशन कर नए वाहन की खरीद पर होने वाले खर्च को बचाया जा रहा है और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।
घर-घर पहुंचेगा स्वच्छता अभियान
संशोधित ट्रायसायकिल के माध्यम से स्वच्छता कर्मचारी नियमित रूप से घर-घर जाकर अलग-अलग प्रकार का कचरा संग्रहित करेंगे।
गीले कचरे का निस्तारण कम्पोस्टिंग अथवा अन्य वैज्ञानिक विधियों से किया जाएगा, जबकि सूखे कचरे को प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट अथवा पुनर्चक्रण केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। सैनिटरी एवं घरेलू जोखिमयुक्त कचरे का भी नियमानुसार पृथक प्रबंधन किया जाएगा।
नागरिकों से अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों में कम से कम चार प्रकार के डस्टबिन रखें और गीला, सूखा, सैनिटरी एवं घरेलू जोखिमयुक्त कचरे को अलग-अलग संग्रहित कर स्वच्छता कर्मियों को सौंपें।
कचरे का सही पृथक्करण न केवल स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करता है बल्कि पुनर्चक्रण, संसाधन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।








