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तंत्र-मंत्र नहीं, जागरूकता जरूरी: अंधविश्वास और चमत्कार के नाम पर ठगी से बचें – डॉ. दिनेश मिश्र

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने लोगों से की अपील – चमत्कार, जादू-टोना और झूठे दावों से रहें सावधान

बालोद। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने लोगों से तंत्र-मंत्र, चमत्कार और अंधविश्वास के नाम पर फैलाए जा रहे भ्रम और ठगी से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से तंत्र-मंत्र, कथित चमत्कार, झाड़-फूंक और अंधविश्वास के नाम पर ठगी, धोखाधड़ी, यौन शोषण और हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं।

डॉ. मिश्र ने कहा कि कुछ कथित बैगा, तांत्रिक और स्वयंभू बाबा ग्रामीण एवं आम लोगों को जादू, टोना, भूत-प्रेत, चमत्कार और अदृश्य शक्तियों के नाम पर भ्रमित कर रहे हैं, जबकि ऐसी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे ऐसे दावों पर भरोसा न करें और तर्क एवं वैज्ञानिक सोच को अपनाएं।

चमत्कार के नाम पर फैलाया जा रहा भ्रम

उन्होंने कहा कि हाल के समय में चावल वाले बाबा, कंबल वाले बाबा, नींबू वाले बाबा, कथित चंगाई सभाओं और विभिन्न धार्मिक पहचान के नाम पर चमत्कार दिखाने के दावे करने वाले लोगों द्वारा समाज में भ्रम फैलाने के कई मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में विभिन्न समुदायों और धर्मों से जुड़े तथाकथित तांत्रिक एवं बाबा शामिल पाए गए हैं।

डॉ. मिश्र ने कहा कि बालोद में तंत्र-मंत्र से खजाना दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी, कोरबा में रुपए को करोड़ों में बदलने के नाम पर कथित तांत्रिक अनुष्ठान के दौरान तीन हत्याएं तथा गरियाबंद में बीमारी ठीक करने के नाम पर ठगी और यौन शोषण जैसे मामले सामने आ चुके हैं।

जादू और चमत्कार में अंतर समझना जरूरी

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के बारे में पहले से प्राप्त जानकारी को चमत्कार के रूप में प्रस्तुत करना एक प्रकार की ट्रिक हो सकती है। जैसे जादूगर अपने कार्यक्रमों में रुपये दुगने करना, व्यक्ति को गायब करना या अन्य दृश्य भ्रम प्रस्तुत करते हैं, लेकिन वे इसे सिद्धि नहीं बल्कि मनोरंजन बताते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि चमत्कारों से समस्याओं का समाधान संभव होता तो सरकारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, ऊर्जा और विकास के लिए योजनाएं बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

बीमारियों का इलाज विज्ञान से संभव

डॉ. मिश्र ने कहा कि पहले के समय में कई बीमारियों और मानसिक समस्याओं को जादू-टोना या भूत-प्रेत से जोड़ा जाता था, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के विकास के बाद उनके कारण और उपचार सामने आए हैं। कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि महामारी पर नियंत्रण डॉक्टरों, अस्पतालों, दवाओं और वैक्सीन के कारण संभव हुआ, किसी चमत्कार से नहीं।

उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारियों का इलाज आज मनोचिकित्सकों द्वारा किया जाता है और झाड़-फूंक या भूत-प्रेत का डर पैदा करना लोगों को भ्रमित करने जैसा है।

अंधविश्वास सामाजिक हिंसा का कारण भी बनता है

डॉ. मिश्र ने कहा कि जादू-टोना के संदेह में महिलाओं को डायन या टोनही बताकर प्रताड़ित करने और हत्या तक की घटनाएं देशभर में सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म के प्रचार-प्रसार का अधिकार है, लेकिन बीमारी ठीक करने, रुपए डबल करने, खजाना दिलाने, कथित चमत्कार दिखाने और अंधविश्वास फैलाने के नाम पर लोगों को भ्रमित करना उचित नहीं है।

उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग करते हुए आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के चमत्कार, जादू-टोना, भूत-प्रेत या तंत्र-मंत्र के नाम पर फैलाए जा रहे भ्रम से बचें और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं।

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