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आत्मशांति, आत्मसम्मान और स्वाभिमान जीवन के सबसे महत्वपूर्ण आधार: संत दयाराम बापु

नागपुर में नवचंडी यज्ञ के दौरान सुंदरकांड कथा में दिया मानवता और धर्म का संदेश

नागपुर। श्री आग्यारामदेवी मंदिर नागपुर में आयोजित नवचंडी यज्ञ के दौरान कथाव्यास संत दयाराम बापु ने सुंदरकांड कथा का रसपान कराते हुए श्रद्धालुओं को जीवन मूल्यों और आत्मचिंतन का संदेश दिया।

संत दयाराम बापु ने अपने उद्बोधन में कहा कि व्यक्ति ने यदि अपना पूरा जीवन जनकल्याण और जनहित में समर्पित किया है तो वह ईश्वर की दृष्टि में श्रेष्ठ है, लेकिन जीवन में आत्मशांति, आत्मसम्मान और स्वाभिमान को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि केवल सत्संग, भजन और कथा करना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मशांति प्राप्त करते हुए करना अधिक हितकारी और सार्थक होता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से धर्म कार्यों में सदैव साधक बनने और बाधक नहीं बनने का संदेश दिया।

संतश्री ने कहा कि मानवता को बनाए रखना ही धर्म का वास्तविक मर्म है और समाज में सकारात्मक विचारों एवं सद्भाव का प्रसार करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान व्यासपीठ का पूजन विक्की पेटकर सहित ट्रस्ट से जुड़े भक्तों द्वारा किया गया। कथा के समापन अवसर पर महाआरती एवं महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

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