ग्रामीणों, किसानों एवं युवाओं से संवाद कर खारुन नदी के संरक्षण एवं संवर्धन पर जुटाए सुझाव
गुरुर (बालोद), 27 जुलाई। विकासार्थ विद्यार्थी, छत्तीसगढ़ प्रांत द्वारा संचालित ‘खारुन अध्ययन यात्रा’ के अंतर्गत गुरुर तहसील क्षेत्र में खारुन नदी के आसपास स्थित ग्राम धनेली एवं ठेकुवाडीह सहित विभिन्न गांवों का अध्ययन भ्रमण किया गया। इस दौरान ग्रामीणों के साथ ग्राम संवाद एवं ग्राम चौपाल आयोजित कर खारुन नदी की वर्तमान स्थिति, ऐतिहासिक एवं सामाजिक महत्व तथा नदी के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
अध्ययन यात्रा में एसएफडी (Students for Development) के राष्ट्रीय सह-संयोजक श्री इंदीवर शुक्ल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने स्थानीय नागरिकों, किसानों एवं युवाओं से संवाद करते हुए नदी संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, पर्यावरण और जीवन का आधार हैं। इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने खारुन नदी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए। अध्ययन यात्रा का उद्देश्य खारुन नदी की वास्तविक स्थिति का अवलोकन करने के साथ स्थानीय जनमानस की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों के आधार पर नदी संरक्षण के लिए ठोस पहल की दिशा में कार्य करना है।
विकासार्थ विद्यार्थी द्वारा संचालित यह अध्ययन यात्रा खारुन नदी के संरक्षण के प्रति जनजागरण एवं जनसहभागिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। अध्ययन यात्रा के संभावित रूट में खारुन उद्गम स्थल (कंकालीन माता मंदिर), हितेकासा, बागमारा, नहान्दा, टेंगना, खैरवाही, तार्री, घोघोपुरी, धनेली, बोरर, ओझागाहन, आर्कर, बेलहारी, ओदरागाहन, निपानी, सील्घट, सिलीडीह, तरीघाट, लम्केनी, परसदा रायपुर, दतरेंगा रायपुर, महादेव घाट रायपुर, बेरला कला, पथारिडीह, कुम्हारी, खुमुदी, मुर्रा, मुड़पार खुर्द, चतुवा तथा खारुन-शिवनाथ संगम सहित विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं।











