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देवीनवागांव में पराली की आग पर आंधी का कहर, धधकती लपटों ने बढ़ाई बड़े हादसे की आशंका

तेज अंधड़ के बीच खेतों में जलती पराली बनी खतरा, सुंदरा जैसी घटना दोहराने का डर

बालोद। जिले के ग्राम देवीनवागांव में शनिवार शाम तेज आंधी-तूफान के बीच खेतों में जल रही पराली ने चिंता बढ़ा दी। शाम करीब 7 बजे शुरू हुए तेज अंधड़ के कारण खेतों में लगी आग तेजी से फैलने लगी और देखते ही देखते भयावह रूप लेने लगी। ग्रामीणों ने इस दृश्य को बेहद चिंताजनक बताते हुए बड़े आगजनी हादसे की आशंका जताई है।

आंधी के साथ फैलती गई आग

ग्रामीणों के अनुसार फसल कटाई के बाद खेतों में बचे पैरा और ठूंठ को जलाया जा रहा था। इसी दौरान तेज हवाएं चलने लगीं, जिससे आग की लपटें दूर-दूर तक फैलने लगीं। आग का फैलाव इतना तेज था कि कुछ समय के लिए ऐसा लगा मानो खेतों में आग का सैलाब उमड़ पड़ा हो।

सुंदरा की घटना अभी भी ताजा

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले सुंदरा गांव में भी पराली जलाने के दौरान लगी आग बेकाबू होकर बस्ती तक पहुंच गई थी, जिससे बड़ा नुकसान होने की स्थिति निर्मित हो गई थी। फायर ब्रिगेड से आग पर काबू पाया गया। उस घटना के बाद भी पराली जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

प्रतिबंध के बावजूद जारी है पराली जलाने का सिलसिला

शासन और प्रशासन द्वारा पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद कई किसान फसल कटाई के बाद खेतों में बचे पैरा और ठूंठ को आग के हवाले कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि तेज हवा की स्थिति में आग बस्तियों, जंगलों और अन्य संपत्तियों तक पहुंचकर बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

प्रशासन से सख्ती की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से पराली जलाने पर प्रभावी नियंत्रण और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो आने वाले दिनों में बड़ी आगजनी की घटनाएं सामने आ सकती हैं।

खेतों में जलती पराली और तेज अंधड़ का यह खतरनाक मेल भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।

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