‘पुष्पा स्टाइल’ में लकड़ी तस्करी का जाल: छापेमारी में 2 ट्रैक्टर ट्रालीजब्त, बाप-बेटे पर आरोप—मामला खुलते ही अक्षय तृतीया पूजा में हंगामा
बालोद। जगन्नाथपुर-सांकरा,खुर्सीपार, मनौद इलाके में लकड़ी तस्करी का संगठित नेटवर्क अब बेहद खतरनाक रूप ले चुका है। किसानों के खेतों से पेड़ों को औने-पौने दाम में खरीदकर बिना अनुमति कटाई कराई जा रही है, वहीं इस अवैध कारोबार ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए हैं। बेरोजगारी और कम शिक्षा के कारण स्थानीय युवा इस धंधे में फंसते जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ कानून व्यवस्था पर असर पड़ रहा है बल्कि गांवों की हरियाली भी तेजी से समाप्त हो रही है।
किसानों की मजबूरी और लालच के बीच उजड़ती हरियाली
ग्रामीण इलाकों में तस्कर लगातार सक्रिय होकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं। वे खेतों में लगे पेड़ों को बहुत कम कीमत पर खरीद लेते हैं और फिर बिना किसी वैध अनुमति के उनकी कटाई करवा देते हैं। कई किसान आर्थिक तंगी या त्वरित लाभ के लालच में इस अवैध गतिविधि का हिस्सा बन जाते हैं। इसका सीधा असर खेतों की उर्वरता और पर्यावरण पर पड़ रहा है, क्योंकि धीरे-धीरे खेतों की हरियाली खत्म हो रही है और भविष्य में भूमि बंजर होने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
वन विभाग की कार्रवाई: 2 ट्रैक्टर-ट्राली जब्त, बिना नंबर प्लेट वाहन भी शामिल
हाल ही में वन विभाग बालोद की उड़नदस्त टीम ने सांकरा ज मुक्तिधाम के पास रात के समय कार्रवाई करते हुए अवैध कटाई और परिवहन में लगी दो ट्रैक्टर-ट्राली जब्त की। इन ट्रैक्टरों की ट्राली में भारी मात्रा में लकड़ी भरी हुई थी, जिन्हें जब्त कर वन डिपो बालोद में रखा गया है। जांच में सामने आया कि एक ट्रैक्टर ट्राली सुरेंद्र पटेल निवासी सांकरा का है, जबकि दूसरा ट्रैक्टर मिलु देशमुख निवासी जगन्नाथपुर से जुड़ा है और वाहन मालिक गिरधर साहू ग्राम मनौद का बताया जा रहा है। खास बात यह भी सामने आई कि एक ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के ही तस्करी में इस्तेमाल किया जा रहा था। इस कार्रवाई में नवपदस्थ रेंजर तरंग शर्मा सहित उड़नदस्त टीम के अन्य कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
प्रतिबंधित पेड़ों पर भी चल रही चेन आरी, तेजी से साफ हो रहे जंगल
क्षेत्र में केवल सामान्य पेड़ ही नहीं, बल्कि कहुआ, साजा जैसे प्रतिबंधित पेड़ों की भी खुलेआम कटाई की जा रही है। पहले जहां पेड़ों को कुल्हाड़ी से सीमित रूप में काटा जाता था, अब आधुनिक चेनसॉ मशीनों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर तेजी से पेड़ों को गिराया जा रहा है। इससे जंगलों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और पर्यावरणीय नुकसान लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई प्रभावी रोक नहीं दिख रही।
अल सुबह 3–4 बजे ट्रैक्टर से होती है ढुलाई, सुनियोजित है पूरा नेटवर्क
ग्रामीणों के अनुसार, यह पूरा अवैध कारोबार बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित होता है। दिन में जंगलों या खेतों में पेड़ों की कटाई की जाती है, जबकि रात और अल सुबह के समय ट्रैक्टरों में लकड़ी भरकर उसे गांव से बाहर भेजा जाता है। खासतौर पर सुबह 3 से 4 बजे के बीच बड़ी संख्या में लकड़ियों से भरे ट्रैक्टर निकलते हैं, जो सीधे आरा मिलों तक पहुंचाए जाते हैं। इस तरह तस्करी का पूरा नेटवर्क बिना किसी बाधा के लगातार चलता रहता है। जगन्नाथपुर सांकरा क्षेत्र में तो गांव के बाहर बांध, दरबारी नवागांव जाने के मार्ग या सांकरा परसदा मार्ग, मुक्तिधाम के आसपास रात में गोला गाड़ियां लोड करके खड़ी कर दी जाती है और सुबह होने के पहले इन्हें संबंधित अड्डों तक सप्लाई कर दी जाती है
सस्ते में खरीद, महंगे में बिक्री—दलालों की अहम भूमिका
इस अवैध कारोबार में भारी मुनाफा कमाया जा रहा है। तस्कर किसानों से बेहद कम कीमत पर पेड़ खरीदते हैं और फिर उन्हें काटकर आरा मिलों में ऊंचे दामों पर बेचते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय दलालों और ट्रैक्टर मालिकों की अहम भूमिका होती है, जो तस्करों और किसानों के बीच कड़ी का काम करते हैं और अवैध लकड़ी की ढुलाई को आसान बनाते हैं।
लापरवाही से हो चुकी कई मौतें, मुआवजे से दबते मामले
लकड़ी की ढुलाई के दौरान सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जाती है। ट्रैक्टरों में भारी लकड़ी के गोलों को असंतुलित तरीके से लादा जाता है, जिससे कई बार हादसे हो चुके हैं। जगन्नाथपुर क्षेत्र में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोग लकड़ी के नीचे दबकर या ढुलाई के दौरान दुर्घटना का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। दुखद बात यह है कि इन घटनाओं के बाद तस्कर और ट्रैक्टर मालिक पीड़ित परिवारों को मुआवजा देकर मामला दबा देते हैं, जिससे न तो पुलिस में शिकायत दर्ज होती है और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई हो पाती है।
बाप-बेटे की भूमिका पर आरोप, लंबे समय से सक्रिय नेटवर्क
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जगन्नाथपुर में मिलु देशमुख और उनका बेटा कैलाश देशमुख लंबे समय से इस अवैध लकड़ी तस्करी नेटवर्क में सक्रिय हैं। आरोप है कि दोनों मिलकर पेड़ों की खरीद से लेकर कटाई और ढुलाई तक की पूरी व्यवस्था संभालते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इनका नेटवर्क काफी समय से क्षेत्र में काम कर रहा है और धीरे-धीरे यह और मजबूत होता गया है।
मामला उजागर होते ही अक्षय तृतीया पूजा में हंगामा
बताया जा रहा है कि जब यह मामला उजागर हुआ, तो उक्त बाप-बेटे ने बौखलाहट में जगन्नाथपुर में अक्षय तृतीया के दौरान आयोजित पूजा-पाठ के बीच ग्रामीणों के सामने हंगामा किया। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और आरोप है कि उन्होंने अपनी गतिविधियों पर पर्दा डालने की कोशिश की। इससे गांव में भय और असुरक्षा का माहौल और गहरा गया। तो वही मनौद के मुख्य ठेकेदार गिरधर साहू और उनके बेटे द्वारा भी एक ग्रामीण को वन विभाग में मुखबिरी का आरोप लगाकर धमकाने की कोशिश की गई। जिसके ऑडियो रिकॉर्ड भी हमारे पास सुरक्षित हैं।
विरोध करने पर धमकी, गांव में डर का माहौल
ग्रामीणों का कहना है कि लकड़ी तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि जो भी इनके खिलाफ आवाज उठाता है, उसे जान से मारने की धमकी दी जाती है। कई बार ये लोग शराब के नशे में गांव में हंगामा करते हैं, जिससे आम ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं और खुलकर विरोध करने से डरते हैं।
विभागों पर सवाल, कार्रवाई के बावजूद बनी चिंता
हालांकि हालिया छापेमारी से कुछ कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन लंबे समय तक वन और राजस्व विभाग की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि अगर पहले ही सख्ती बरती जाती, तो यह अवैध नेटवर्क इतना मजबूत नहीं बन पाता।
हरियाली और जान—दोनों पर मंडरा रहा खतरा
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक ओर जंगल और खेतों की हरियाली तेजी से खत्म हो रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों की जान भी लगातार जोखिम में है। यदि समय रहते इस पर सख्त नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में इसका प्रभाव और भी भयावह हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल
क्या प्रशासन इस बार सख्ती दिखाकर इस संगठित लकड़ी तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करेगा, या फिर यह अवैध कारोबार पहले की तरह ही चलता रहेगा?
