बालोद, 15 अप्रैल 2026। अक्षय तृतीया के अवसर पर संभावित बाल विवाह की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार 19 अप्रैल को जिले में एक भी बाल विवाह न हो, इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है।
कलेक्टर की अपील: बाल विवाह रोकने में सबकी भागीदारी जरूरी
कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि:
बाल विवाह एक सामाजिक बुराई और अपराध है, जो बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और विकास में बाधा डालता है।
उन्होंने सभी नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों से इस पुनीत कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की बात कही।
कड़े कानून: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि:
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत
- 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के और 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की का विवाह प्रतिबंधित है
- दोषियों को 2 वर्ष तक कारावास या ₹1 लाख तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं
- जो भी व्यक्ति बाल विवाह कराता, करवाता या इसमें सहयोग करता है, सभी दंड के भागीदार होंगे
प्रशासन और विभागों की संयुक्त तैयारी
महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा समन्वित कार्यवाही की जा रही है।
जिला प्रशासन, पुलिस और बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी स्थिति में बाल विवाह न हो सके।
बाल विवाह मुक्त बालोद की ओर बढ़ते कदम
जिले की 436 ग्राम पंचायतें और 9 नगरीय निकाय पहले ही बाल विवाह मुक्त घोषित किए जा चुके हैं।
अब पंचायत स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर इस पहल को और मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री का संकल्प
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ को 31 मार्च 2029 तक बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत चरणबद्ध कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।
अंतिम अपील
कलेक्टर ने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि
जागरूक बनें और बाल विवाह रोकने में आगे आएं, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बनाया जा सके।
