
बालोद। ग्राम भाटागांव में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन महाराज राजीव नयन ने अपने प्रवचन में कहा कलयुग में अगर शांति पाना है तो भागवत वचनों को जीवन में धारण करें। जीवन में सुख और शांति पाया जा सकता है।संत श्री ने कहा अंत में अनंत तक की यात्रा को अध्यात्म का मार्ग कहते हैं। अपने उद्देश्य पर संतुलन बनाए रखें तो हर कार्य संभव है। जैसे अग्नि लकड़ी को जलाती है। नाशवान शरीर से परमात्मा के दर्शन हो जाते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा की कंकर को भी शंकर मानकर पूजा जाता है। यह संसार है।जिव्हा से दो गंगाओं का प्रकाट्य हुआ है। एक भागीरथी, दूसरा भागवत।

भागीरथी के पास चल के जाना पड़ता है। परंतु भागवत गंगा स्वयं आपके द्वार तक आती है। आप का उद्धार करने। महाराज श्री ने भागवत को रामालयम कहा। यानी रस का घर। इस प्रकार संत श्री ने भागवत के महत्व का वर्णन किया। श्रद्धालु सुनने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे हुए थे और भागवत का आनंद उठाया।
जब सुख आए तो भगवान की कृपा माननी चाहिए
भाटागांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में तीसरे दिन शनिवार को कथाकार राजीव नयन ने भक्तों को भोजन के साथ भजन की सलाह दी। एक क्षण का सत्संग भी भक्तों को भगवान के साथ मिला देता है। उन्होंने कहा मांगने से कुछ नहीं मिलता, मिलता वही है जो परमात्मा चाहता है।जब सुख आए तो भगवान की दया और दुख जाए तो भगवान की कृपा माननी चाहिए। तन पवित्र होता है सेवा करने से, धन पवित्र होता है दान करने से और मन पवित्र होता है भजन करने से। भजन में जब मन ना लगे तो समझना चाहिए आहार सही नहीं है।

मनुष्य के जीवन में आहार और व्यवहार में परिवर्तन आया है। उन्होंने सामाजिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा समाज में बुराइयां भी इन्हीं परिवर्तनों के कारण आई है। संत श्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे एक निश्चित दिनचर्या अमल करें। सब काम छोड़ कर भोजन करना चाहिए। हजार काम छोड़कर स्नान करना चाहिए। लाख काम छोड़ कर दान देना चाहिए और करोड़ों काम छोड़कर भजन करना चाहिए।

परीक्षित विश्व का पहला जीव है जिसने जन्म से पहले ईश्वर का दर्शन किया। परीक्षित को मालूम था कि सातवें दिन मरना है। पर विश्व के अन्य जीवो को नहीं मालूम कि किस दिन मरना है। मृत्यु तो सत्य है जो जन्म लेगा वह मरेगा इसलिए भजन कीर्तन को नित्य जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। कलयुग में धर्मदान का टीका है। इस तरह कलयुग के प्रवेश एवं तक्षक द्वारा परीक्षित को कैसे मुक्त होना चाहिए इस प्रसंग पर विस्तृत वर्णन किया गया।
