⚖️ छेड़खानी के आरोपी को बड़ी सजा: निचली अदालत से बरी, अपीलीय न्यायालय ने सुनाई 3 साल की सजा

बालोद, 08 अप्रैल 2026। छेड़खानी के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अपीलीय न्यायालय ने आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और उसे तीन वर्ष के सश्रम कारावास सहित अन्य सजाओं से दंडित किया है। यह फैसला महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


⚖️ अदालत का फैसला: तीन धाराओं में सजा

माननीय , द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जिला बालोद (छ.ग.) ने आरोपी (पिता दिलीप राणा, उम्र 26 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 03, पटेल कॉलोनी दल्लीराजहरा, थाना राजहरा) को निम्नानुसार दंडित किया—

  • धारा 354 (क) IPC: 6 माह का सश्रम कारावास + ₹100 अर्थदंड
  • धारा 354 (ख) IPC: 3 वर्ष का सश्रम कारावास + ₹100 अर्थदंड
  • धारा 354 (घ) IPC: 6 माह का सश्रम कारावास + ₹100 अर्थदंड

📍 क्या था पूरा मामला?

प्रकरण के अनुसार दिनांक 25 जनवरी 2019 को शाम करीब 7 बजे, थाना राजहरा क्षेत्र के क्रिकेट ग्राउंड पुल के पास पीड़िता अपने रिश्तेदार के साथ बाजार से लौट रही थी। इसी दौरान मोहल्ले का ही युवक करण राणा ने रास्ता रोककर उससे छेड़खानी की।

आरोपी ने “मैं तुमसे प्यार करता हूँ” कहते हुए पीड़िता का दुपट्टा खींचा और आपत्तिजनक बातें करते हुए उसे अपमानित किया। पीड़िता की शिकायत पर थाना दल्लीराजहरा में अपराध क्रमांक 14/2019 दर्ज कर मामले की विवेचना की गई।


🏛️ निचली अदालत से मिला था बरी, फिर बदला फैसला

मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दल्लीराजहरा ने दिनांक 06 जनवरी 2023 को आरोपी को धारा 354 (क), 354 (ख) एवं 354 (घ) के तहत दोषमुक्त (बरी) कर दिया था।

लेकिन इस फैसले को तथ्यों और कानून के विपरीत मानते हुए अभियोजन पक्ष ने सत्र न्यायालय बालोद में अपील दायर की।


🔁 अपीलीय न्यायालय ने पलटा फैसला

अपीलीय न्यायालय ने पूरे मामले की परिस्थितियों, साक्ष्यों और वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों को ध्यान में रखते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।


👨‍⚖️ शासन की ओर से पैरवी

मामले में शासन की ओर से , विशेष लोक अभियोजक, बालोद द्वारा प्रभावी पैरवी की गई।


🚨 सख्त संदेश: महिलाओं के खिलाफ अपराध पर नहीं होगी नरमी

इस फैसले से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में न्यायालय अब सख्त रुख अपना रहा है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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