मानव सेवा की मिसाल बने सिवनी गांव के कमलेश को बालोद पुलिस ने किया सम्मानित
बालोद। अगर हौसला बुलंद हो तो शारीरिक सीमाएं भी किसी के सेवा कार्यों के आड़े नहीं आतीं। ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है बालोद जिले के सिवनी गांव निवासी दिव्यांग समाजसेवी कमलेश निषाद ने, जो पिछले 14 वर्षों से सड़क हादसों में घायल लोगों की निःशुल्क मदद करते आ रहे हैं। उनके इस सराहनीय कार्य के लिए बालोद पुलिस द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 👏
बचपन की दुर्घटना में गंवाया हाथ, फिर भी नहीं मानी हार
सिवनी गांव निवासी कमलेश निषाद बचपन से ही खेलों में रुचि रखते थे। वर्ष 2001 में तीसरी कक्षा के दौरान लंबी कूद प्रतियोगिता में हिस्सा लेते समय उनका बांया हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसके कारण बाद में उसे काटना पड़ा।
एक हाथ न होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और मेहनत के बल पर जीवन में आगे बढ़ते रहे।
उन्होंने दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आयोजित क्रिकेट, गोला फेंक, लंबी कूद और भाला फेंक जैसी प्रतियोगिताओं में राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेकर कई पदक भी हासिल किए हैं। 🏅
एक दर्दनाक घटना ने बदल दी जीवन की दिशा
कमलेश निषाद बताते हैं कि वर्ष 2012 में उन्होंने पिकअप वाहन खरीदा और उसी से परिवार का भरण-पोषण करने लगे। इसी दौरान तरौद गांव में हुई एक जघन्य घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
एक महिला की हत्या के बाद उसका शव कई दिनों तक पड़ा रहा, जिसे उठाने के लिए कोई तैयार नहीं था। तब कमलेश आगे आए और पुलिस की मदद करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए पहुंचाया तथा अंतिम संस्कार भी कराया।
यहीं से उन्होंने असहाय लोगों की मदद करने का संकल्प लिया।
14 वर्षों से सड़क हादसों के घायलों को पहुंचा रहे अस्पताल
उस घटना के बाद से कमलेश निषाद लगातार बालोद जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को निःशुल्क अस्पताल पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
साथ ही दुर्घटना या अन्य कारणों से मृत लोगों के शवों को भी अपनी गाड़ी से पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाकर पुलिस की सहायता करते हैं।
कोरोना काल में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
कोरोना महामारी के कठिन समय में भी कमलेश निषाद ने प्रशासन का सहयोग करते हुए कई कोरोना संक्रमित मृतकों के शवों को अपनी गाड़ी से मुक्तिधाम तक पहुंचाकर अंतिम संस्कार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 🙏
गरीब परिवारों के अंतिम संस्कार में भी करते हैं सहयोग
कमलेश ने बताया कि उनके मोहल्ले में अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ऐसे में यदि किसी परिवार में मृत्यु हो जाती है तो अंतिम संस्कार के लिए संसाधनों की कमी होती है।
पिछले लगभग पांच वर्षों से वे मोहल्ले के युवाओं के सहयोग से राशि एकत्र कर शोकाकुल परिवारों की मदद कर रहे हैं।
डीएसपी ने प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
कमलेश निषाद के इन मानवीय प्रयासों को देखते हुए बोनिफास एक्का (जिला उप पुलिस अधीक्षक, बालोद) द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
उनकी सेवा भावना आज समाज के लिए प्रेरणा बन रही है। 🌟
