क्या दिल्ली की शबनम का 7 खून होगा माफ़? क्या दल्ली के इस शख्स को हो पाएगी फांसी, दोनों मामले लटके हैं कोर्ट में, पढ़िए दरिंदगी और जघन्यता भरे दो अपराध की खबर



बालोद में भी हुई है फांसी की सजा, पर मामला लटका है 2 साल से हाईकोर्ट में
बच्ची से दरिंदगी, रेप और हत्या के आरोप में दल्ली राजहरा के झग्गर यादव को सुनाई गई है मौत की सजा

दिल्ली/ दल्लीराजहरा/बालोद,सुप्रीत शर्मादिल्ली से 120 किमी दूर उत्तर प्रदेश के अमरोहा के ग्राम बावनखेड़ी की रहने वाली शबनम की फांसी की सजा पूरे देश भर में चर्चित है। जो फिलहाल अभी टल गई है। शबनम के वकील के माध्यम से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी पटेल को अपनी दया याचिका भेजी गई है। जिस पर अभी जवाब आना शेष है। जवाब ना आने के कारण कोर्ट ने भी अपना फैसला सुरक्षित रखा है। 7 लोगों की हत्या के मामले में अपराधी बनी शबनम को यह फांसी की सजा सुनाई गई है। जिससे चर्चा का बाजार गर्म है।तो वही अब जिले में भी ऐसी ही एक फांसी की सजा भी चर्चा में आ रही है। जो कि 2 साल पहले बालोद जिला कोर्ट के तत्कालीन जिला जज राजेन्द्र प्रधान ने दल्ली राजहरा के एक हत्या और रेप के मामले में सुनाई है। जानकारी के मुताबिक अपराधी झग्गर यादव को मौत की सजा सुनाई गई है। जिसे वर्तमान में सेंट्रल जेल रायपुर में रखा गया है। जिला कोर्ट से फांसी की सजा के बाद अपराधी यादव द्वारा वकील के जरिए हाई कोर्ट में अपील की गई है। जहां अभी सुनवाई नहीं हुई है। क्या फैसला बरकरार होगा, क्या उसे माफ या उम्र कैद मिलेगी यह समय के गर्भ में है। पर जिस तरह से जघन्य अपराध हुआ है उससे जिले में अपराधी के प्रति आक्रोश की भावना आज भी जिंदा है।

इतिहास में पहली बार हुई है फांसी की सजा
जिले के इतिहास में पहली बार दुष्कर्म के मामले में दोषी पाते हुए तत्कालीन जिला जज राजेन्द्र प्रधान ने दल्ली राजहरा थाने में दर्ज एक दुष्कर्म व हत्या के आरोपी झग्गर यादव (48) निवासी वार्ड 7 दल्लीराजहरा को दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई है। फैसला सुना कर जज प्रधान ने कहा था कि यह सजा उन सभी लोगों के लिए सबक होगी जो बेटियों को बुरी नियत से देखते हैं। जिले में बढ़ती दुष्कर्म, छेड़खानी के अपराधों को रोकने के लिए अब ऐसी सजा देना जरूरी हो गया था। इसलिए मैं दोषी को मृत्युदंड की सजा सुना रहा हूं। दोषी को रायपुर सेंट्रल जेल में फांसी दी जानी है।

इस तरह हुई थी घटना

घटना 5 जून 2017 की है। अपनी बेटी की उम्र की ही 11 साल की एक लड़की को आरोपी बहला-फुसलाकर साइकिल में बैठा कर अपने साथ घुमाने ले गया था। जो शाम रात तक नहीं आया। परिजनों ने खोजबीन की तो पता चला कि उसे आरोपी ले गया था। 2 दिन बाद 7 जून को गायब मासूम की लाश जंगल में रात 10 बजे मिली थी। जिसके बाद हत्या और दुष्कर्म के इस बड़े अपराध का खुलासा हुआ था। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। जिसे 9 जून को ग्राम पथराटोला के पास पुलिस ने पकड़ा था।

जून 2017 से अब तक आरोपी पुलिस रिमांड में ही जेल में था

दल्ली ने इसे दिया था निर्भया का नाम, हुआ था आंदोलन

दिल्ली की तर्ज पर इस बड़ी घटना पर दल्लीराजहरा के लोगों ने भी मृतक बच्ची के साथ हुए इस घिनौने घटना पर निर्भया कांड का नाम दिया था। लोगों ने आरोपी के न पकड़ाने पर थाने का घेराव किया था। आरोपी पकड़ा गया तो उसी समय ही इसे फांसी देने की मांग हुई थी। शहर में कैंडल मार्च भी निकला था।

एक नजर इधर भी

बालोद में शुरू हुआ लिंक(सिविल) कोर्ट- 1969 में

व्यवहारिक कोर्ट की स्थापना – 1970 में

नारायण प्रसाद थे बालोद कोर्ट के पहले जज

चर्चित शबनम के 7 खून की कहानी भी पढ़िये जिसकी चर्चा देश भर में हो रही (स्रोत -जागरण)

शबनम और सलीम के बेमेल इश्क की खूनी दास्तां फांसी के फंदे के बेहद नजदीक पहुंच चुकी है। 14 अप्रैल, 2008 की रात को प्रेमी सलीम के साथ मिलकर माता-पिता और मासूम भतीजे समेत परिवार के सात लोगों का कुल्हाड़ी से गला काट कर मौत की नींद सुलाने वाली शबनम की फांसी की सजा को राष्ट्रपति ने भी बरकरार रखा है। शबनम की दया याचिका को खारिज कर दिया गया है। शबनम और सलीम को निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक से फांसी की सजा सुनवाई जा चुकी है। दोनों ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर फांसी माफ करने की गुहार लगाई है

अमरोहा जिले से हसनपुर क्षेत्र के गांव के बावनखेड़ी में रहने वाले शिक्षक शौकत अली के परिवार में पत्नी हाशमी, बेटा अनीस, राशिद, पुत्रवधु अंजुम, बेटी शबनम व दस महीने का मासूम पौत्र अर्श थे। इकलौती बेटी शबनम को पिता शौकत अली ने लाड़-प्यार से पाला था। बेहतर तालीम दिलाई। एमए पास करने के बाद वह शिक्षामित्र हो गई। इस दौरान शबनम का प्रेम प्रसंग गांव के ही आठवीं पास युवक सलीम से शुरू हो गया। दोनों प्यार में इतना आगे बढ़ गए कि उन्होंने सामाजिक तानाबाना छिन्न-भिन्न कर दिया। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन शबनम सैफी तो सलीम पठान बिरादरी से था। लिहाजा शबनम के परिवारीजन को यह मंजूर नहीं हुआ।

परिवार के खिलाफ जाकर दोनों रात को चोरी-छिपे मिलने लगे। शबनम रात को प्रेमी सलीम को घर बुलाने लगी। इसके लिए वह परिवारीजन को खाने में नींद की गोलियां देती थी। इश्क को परवान न चढ़ता देख दोनों ने ऐसा फैसला लिया जिसने देश को हिलाकर रख दिया। 14 अप्रैल, 2008 की रात को शबनम ने प्रेमी सलीम को घर बुलाया। इससे पहले उसने परिवारीजन को खाने में नींद की गोली खिलाकर सुला दिया था। उस दिन शबनम की फुफेरी बहन राबिया भी उनके घर आई हुई थी। रात में शबनम व सलीम ने मिलकर नशे की हालत में सो रहे पिता शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस, राशिद, भाभी अंजुम, फुफेरी बहन राबिया व दस माह के भतीजे अर्श का गला काट कर मौत की नींद सुला दिया।

घटना को अंजाम देकर सलीम तो वहां से भाग गया था, लेकिन शबनम रातभर घर में ही रही। तड़के में उसने शोर मचा दिया कि बदमाश आ गए हैं। शोर सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे और वहां का नजारा देख पैरों तले जमीन खिसक गई। दुमंजले पर बने तीन कमरों में मासूम समेत सभी सात लोगों के गला कटे शव पड़े थे। दिन निकलने तक गांव बावनखेड़ी देशभर में छा गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती भी गांव पहुंची थीं। घटना के हालात देखते हुए शबनम पर ही शक की सुई गई।

घटना के चौथे दिन पुलिस ने शबनम व सलीम को हिरासत में ले लिया। इससे पहले उसके मोबाइल की कॉल डिटेल से सारा राजफाश हो गया था। दोनों ने पूछताछ के दौरान घटना भी कबूल कर ली थी। सलीम ने हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी भी गांव के तालाब से बरामद करा दी थी। स्थानीय अदालत ने भी दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी। सर्वोच्च अदालत ने भी इस सजा को बरकरार रखा तो राष्ट्रपति ने भी दया याचिका खारिज कर दी। यानि सलीम व शबनम के खूनी इश्क की कहानी फांसी के फंदे तक पहुंच गई है।

घटना के समय दो माह की गर्भवती थी शबनम

शबनम व सलीम

सलीम व शबनम लगभग हर रोज मिलते थे। दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन चुके थे। जिस दिन दोनों ने इस वीभत्स घटना को अंजाम दिया उस समय शबनम दो माह की गर्भवती थी। उसके पेट में सलीम का बच्चा पल रहा था। ऐसी हालत में भी शबनम के हाथ अपने दस माह के मासूम भतीजे अर्श का गला काटते हुए नहीं कांपे। बाद में शबनम ने जेल में ही बेटे को जन्म दिया। उसका नाम मुहम्मद ताज रखा गया।

जेल में दिया था बेटे को जन्म

शबनम ने मुरादाबाद जेल में ही बेटे को जन्म दिया था। जेल में साथ रखने के साथ ही उसकी बहुत अच्छे से देखभाल करती थी। सात साल की उम्र होने पर शबनम के एक दोस्त ने उसे गोद ले लिया था, जो आज भी उसकी देखभाल कर रहा है। अक्सर शबनम से जेल में मिलने के लिए उसका बेटा आता है।

घर में मिली थी नशे की दस गोलियां

विवेचक आरपी गुप्ता को घर में नशे की दस गोलियां मिली थीं। फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सभी मृतकों को नशा दिए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके साथ ही उन्हें घर के किचन में रखी चाय की पत्ती के डिब्बे में एक सिम मिला था। उसकी कॉल डिटेल में घटना वाली रात को सलीम के पास 50 से अधिक कॉल किए जाने की जानकारी हुई थी। परिवार के सभी सदस्यों को नशा दिए जाने के साथ केवल शबनम का बेहोश न होना तथा सलीम को 50 से अधिक कॉल किए जाने को आधार बनाकर पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया था।

गांव में बेटी का नाम नहीं रखते शबनम

बावनखेड़ी कांड के बाद यह गांव सारे देश में बदनाम हुआ। इकलौती बेटी द्वारा परिवार के साथ सदस्यों की हत्या को लेकर इस गांव के देश के लोग जान गए। मास्टर शौकत सैफी के घर में शबनम इकलौती बेटी थी। इस घटना के बाद गांव के लोगों को शबनम से इतनी नफरत हो गई कि अब इस गांव में कोई अपनी बेटी का नाम शबनम रखना नहीं चाहता।

आरा मशीन पर मजदूरी करता था सलीम

शबनम का घर गांव में सड़क किनारे है। अतरासी-हसनपुर रोड पर स्थित शबनम के घर के सामने एक आरा मशीन है। सलीम उसी आरा मशीन पर मजदूरी करता था। यहां से दोनों की प्रेम कहानी शुरू हुई थी। शबनम का परिवार शिक्षित व संपन्न था। जबकि सलीम के परिवार की गिनती मध्यम वर्ग में होती है।

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