नेमन साहू,डौंडी लोहारा। वनांचल क्षेत्र के आश्रित ग्राम जुन्नापानी में होली के बाद तीसरे दिन पारंपरिक धूर त्यौहार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। धूर त्यौहार मनाने की यह परंपरा आदिकाल से चली आ रही है। यह त्यौहार अंचल ही नहीं बल्कि पूरे बालोद जिले में एक अलग और विशेष तरीके से मनाया जाता है।

फाल्गुन पर्व के दिन संध्या समय गांव में स्थित मां दंतेश्वरी को गांव में लाया जाता है और रात होते ही मां दंतेश्वरी 12 गांवों में होली खेलने के लिए निकलती हैं। जैसे ही मां दंतेश्वरी गांव से निकलती हैं, पूरे गांव के लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ उनके साथ यात्रा में शामिल हो जाते हैं। 12 गांवों में होली खेलने की यह यात्रा दो रात और तीसरे दिन तक अनवरत चलती है।
मां दंतेश्वरी सबसे पहले ग्राम भर्रीटोला पहुंचती हैं। इसके बाद मरसकोला, कुदारी दल्ली, कर्रेगांव, झोला टोला, कोरेटी टोला, करतू टोला, तुरमूडा, मंगचुवा, डूमरटोला और नंगूटोला सहित विभिन्न गांवों में होली खेलने जाती हैं। दो दिनों तक इन गांवों में होली खेलने के बाद तीसरे दिन सुबह माता रानी जरराडीही में प्रवेश करती हैं।

जरराडीही से लौटने के पश्चात मां दंतेश्वरी ग्राम जुन्नापानी में प्रत्येक घर में जाकर होली खेलती हैं। इस दौरान गांव के लोग माता रानी के साथ फाग गीत गाते हुए नाचते-झूमते हैं और पूरे गांव में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहता है।
ग्राम जुन्नापानी में स्थित मां दंतेश्वरी को देश फिरन्तीन और बरगहीन के नाम से भी जाना जाता है। मां दंतेश्वरी के पुजारी धनेश कुमार कुंजम हैं। तीन दिवसीय इस होली पर्व का संचालन समिति के माध्यम से किया जाता है, जिसके संरक्षक ग्राम पटेल चंद्रशेखर सुकतेल हैं। इस पारंपरिक आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होकर अपनी आस्था, संस्कृति और परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं।

