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पिता की सीख बनी सेवा का संकल्प: ग्यारहवीं पुण्यस्मृति पर विशेष बच्चों के साथ बांटी खुशियां

घरौंदा आश्रय गृह और मूक-बधिर शाला में कराया भोजन, बेटियों ने निभाई पिता की प्रेरणा

बालोद। परमश्रद्धेय स्व. श्री एल. पी. यादव की ग्यारहवीं पुण्यस्मृति के अवसर पर उनकी पुत्रियों द्वारा एक भावनात्मक और प्रेरणादायी सेवा आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम घरौंदा आश्रय गृह बालक-बालिका बालोद एवं सिवनी तथा मूक-बधिर शाला उमरादाह में आयोजित किया गया, जहां विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ समय बिताते हुए उन्हें भोजन कराया गया और उनके साथ खुशियां साझा की गईं।


बेटियों ने पिता की स्मृति को सेवा से किया जीवंत

यह आयोजन स्वर्गीय एल. पी. यादव जी की तीनों सुपुत्रियों द्वारा प्रायोजित था, जो वर्तमान में शिक्षा विभाग बालोद में पदस्थ हैं। वे अपने पिता को ही अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानती हैं और हर वर्ष उनकी स्मृति में सेवा कार्य करने का संकल्प निभाती हैं। इस वर्ष भी उन्होंने विशेष बच्चों के साथ भोजन कराकर उन्हें खुशियां बांटी और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास किया।


“इन बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत स्नेह की है”

इस अवसर पर परिवार की ओर से कहा गया कि ऐसे बच्चों के साथ समय बिताना अपने आप में एक अलग ही सुखद अनुभव है। उन्होंने आश्रय गृह और मूक-बधिर शाला के समिति सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि इन बच्चों की देखभाल करना आसान नहीं है। समाज के लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि समय-समय पर इन बच्चों के साथ समय बिताएं, क्योंकि उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत स्नेह और अपनापन की होती है। छोटी-छोटी चीजों से ही ये बच्चे अत्यंत खुश हो जाते हैं।


पिता के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प

परिवार की बेटियों का मानना है कि वे आज जो भी हैं, अपने पिता के संस्कार और मार्गदर्शन की वजह से हैं। इसलिए वे हर वर्ष उनकी पुण्यस्मृति पर कुछ न कुछ समाजोपयोगी कार्य करने का संकल्प लेती हैं और आगे भी इस तरह के सेवा कार्य निरंतर करते रहने की बात कही।


जब समाज के विरोध के बीच पिता ने बेटियों को पढ़ाया

स्व. एल. पी. यादव को शिक्षा के प्रति समर्पित और दूरदर्शी व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 1980 के दौर में जब समाज में बालिका शिक्षा को लेकर कई तरह की रूढ़ियां थीं, तब उन्होंने सभी विरोधों के बावजूद अपनी बेटियों को पढ़ाने का साहसिक निर्णय लिया। उस समय उन्होंने अपनी बेटियों को जिले के एकमात्र आदर्श बालक स्कूल में गणित संकाय से मैट्रिक की पढ़ाई के लिए विशेष अनुमति लेकर प्रवेश दिलाया।

उस दौर में पूरी कक्षा में केवल दो-तीन ही बालिकाएं थीं और उन्हें लड़कों के साथ पढ़ाई करनी पड़ती थी। उनके इस साहसिक निर्णय ने समाज में एक नई सोच को जन्म दिया और अन्य बालिकाओं को भी शिक्षा के लिए प्रेरणा मिली। आज उनकी बेटियां शिक्षा विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं और अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने पिता को देती हैं।


वर्षों से जारी है सेवा का सिलसिला

परिवार द्वारा पहली पुण्यस्मृति से लेकर दसवीं पुण्यस्मृति तक लगातार समाजसेवा के कई कार्य किए गए हैं। इस दौरान जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षा में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सहयोग राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अमलीडीही स्कूल में विद्यार्थियों को स्वेटर वितरित किए गए, वहीं दुर्ग स्थित वृद्धाश्रम में अनाज दान किया गया।

इसके अलावा प्राथमिक शाला कलकसा और दुधली में जूते-मोजे वितरण, प्राथमिक शाला बड़गांव में स्कूल बैग वितरण, हायर सेकेंडरी स्कूल दुधली में टिफिन वितरण तथा प्राथमिक शाला बनगांव में जूते-मोजे वितरण किया गया। दिव्यांग संस्थान राजिम में कपड़े वितरित किए गए और वृद्धाश्रम में साड़ी, कंबल व शॉल भेंट किए गए। दुधली संकुल के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों में संकुल स्तरीय न्यौता भोज का आयोजन किया गया तथा सेजेस कन्नेवाड़ा में भी न्यौता भोज आयोजित किया गया।

इसके साथ ही घरौंदा आश्रय स्थल बालोद में कूलर दान किया गया और बालोद की सभी सफाई दीदियों का सम्मान भी किया गया। इन सभी कार्यों के माध्यम से परिवार हर वर्ष स्वर्गीय एल. पी. यादव की स्मृति में समाजसेवा का संदेश देता रहा है।


परिवार के सदस्य रहे शामिल

ग्यारहवीं पुण्यस्मृति के इस आयोजन में सुलोचना यादव, तेजेन्द्र यादव, दुर्गेशनंदिनी यादव, विनोदनी यादव, कादंबिनी यादव, प्रांशु यादव, साक्षी यादव, आदित्य यादव और उमेश निषाद सहित परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल रहे। परिवारजनों ने इस आयोजन पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे आगे भी निरंतर जारी रखने की बात कही।

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