भूजल बचाने का संदेश लेकर दिल्ली रवाना होंगी महिला कमांडो, किसान कुंभ में रखेंगी मजबूत प्रस्ताव
बालोद। महिला सशक्तिकरण और समाज सुधार की अनोखी मिसाल बन चुकी महिला कमांडो अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज बुलंद करने जा रही हैं। आगामी 30 और 31 मार्च को नई दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में आयोजित किसान कुंभ कॉन्क्लेव 2026 में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की महिला कमांडो की टीम शामिल होकर जल संरक्षण का बड़ा संदेश देगी। इस सम्मेलन में बालोद सहित छत्तीसगढ़ के चुनिंदा जिलों से 15 महिला कमांडो और महाराष्ट्र के नागपुर जिले के वलनी गांव से 15 महिला कमांडो भाग लेंगी। इस प्रकार कुल 30 महिला कमांडो का प्रतिनिधिमंडल किसान कुंभ में हिस्सा लेकर भूजल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखेगा। महिला कमांडो लगातार भूजल के अनुचित दोहन को लेकर चिंता जता रही हैं। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर किए जा रहे बोरवेल खनन से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिसे रोकने के लिए सरकार को कठोर कानून बनाने चाहिए। किसान कुंभ में वे सरकार से यह मांग भी उठाने जा रही हैं कि बोर खनन पर यथोचित प्रतिबंध लगाया जाए और ऐसे नियम बनाए जाएं जिससे कोई व्यक्ति निजी स्वार्थ के लिए अंधाधुंध बोरवेल कराकर भूजल का दोहन न कर सके। पद्मश्री शमशाद बेगम के नेतृत्व में महिला कमांडो का 30 सदस्यीय दल 28 मार्च को छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए रवाना होगा। किसान कुंभ में यह दल जल संरक्षण के महत्व और भूजल बचाने के उपायों को लेकर अपने विचार रखेगा। पद्मश्री शमशाद बेगम ने बताया कि इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व छत्तीसगढ़ से वे स्वयं और महाराष्ट्र से योगेश अनेजा करेंगे।
केंद्रीय बजट में कृषि को बढ़ावा, किसान कुंभ में होगी व्यापक चर्चा
ज्ञात हो कि केंद्रीय बजट 2026–27 में कृषि क्षेत्र पर नए सिरे से दिए गए जोर ने आगामी किसान कुंभ कॉन्क्लेव 2026 के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत पृष्ठभूमि तैयार की है। दो दिवसीय यह कॉन्क्लेव 30–31 मार्च को आईआईटी दिल्ली में आयोजित होगा, जिसमें नीति निर्माता, शिक्षाविद, कृषि विशेषज्ञ, उद्यमी और किसान नेता भारतीय कृषि के भविष्य पर चर्चा करेंगे। इस बार सम्मेलन में महिला किसानों की भूमिका और सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। केंद्रीय बजट में सरकार ने कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए 1.63 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ा हुआ बजट खेती व्यवस्था को मजबूत करने, ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने और देश की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
20 सालों से समाज सुधार की दिशा में सक्रिय हैं महिला कमांडो
महिला कमांडो की यह अनोखी मुहिम साल 2006 में बालोद जिले के गुंडरदेही क्षेत्र से शुरू हुई थी, जब करीब 100 महिलाओं को संगठित कर सामाजिक जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। आज यह अभियान एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में 75 हजार से अधिक महिला कमांडो सक्रिय हैं। वहीं पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के नागपुर क्षेत्र के तीन गांवों में भी महिला कमांडो का गठन हो चुका है और वे समाज सुधार के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
महिला कमांडो नशा मुक्ति अभियान, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता, शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने और गांव के असामाजिक तत्वों पर निगरानी जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। लगातार किए जा रहे इन कार्यों के कारण महिला कमांडो को जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। ऐसे में किसान कुंभ जैसे राष्ट्रीय आयोजन में उनका प्रतिनिधित्व चुना जाना महिलाओं के लिए गर्व और सम्मान की बात मानी जा रही है।
