केंद्रीय बजट 2026 : विकसित भारत की ओर अपार अवसरों का राजमार्ग — कुसुम शर्मा




डौंडी लोहारा। भारतीय जनता पार्टी मंडल अध्यक्ष कुसुम शर्मा ने संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट केवल तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को जल्द से जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की ठोस दिशा देता है। यह बजट अपार अवसरों का राजमार्ग है, जो वर्तमान के सपनों को साकार करने के साथ भविष्य की मजबूत नींव रखता है।
कुसुम शर्मा ने कहा कि भारत जिस सुधारों (रिफॉर्म्स) की राह पर आगे बढ़ रहा है, इस बजट से उसे नई गति मिलेगी। सनराइज सेक्टर को मजबूती देना इस बजट की बड़ी विशेषता है। रेयर अर्थ कॉरिडोर, क्रिटिकल मिनरल्स, टेक्सटाइल सेक्टर और हाईटेक टूल मैन्युफैक्चरिंग पर दिया गया विशेष जोर देश की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने वाला है।
उन्होंने कहा कि बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास पर विशेष ध्यान, विकसित भारत की यात्रा को और तेज करेगा। किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी उसके नागरिक होते हैं, और इस बजट में नागरिकों पर निवेश को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का फोकस स्किल, स्केल और सस्टेनेबिलिटी को सशक्त करने पर है।
मंडल अध्यक्ष कुसुम शर्मा ने कहा कि यह बजट वास्तव में युवा शक्ति का बजट है। ऑरेंज इकोनॉमी, पर्यटन, और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार खुलेंगे। भारत को दुनिया का डेटा सेंटर हब बनाने के उद्देश्य से टैक्स में बड़ी छूट दी गई है, जिससे एम्प्लॉयमेंट जनरेशन को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि देश में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी हैं। महिलाओं द्वारा निर्मित और संचालित समूहों को मजबूत करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर घर लक्ष्मी पहुंचे। इसके तहत हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाने की घोषणा एक सराहनीय कदम है।
कुसुम शर्मा ने आगे कहा कि रिफॉर्म ओवर रेटॉरिक के मार्गदर्शक सिद्धांत के तहत सरकार ने देश की संभावनाओं को प्रदर्शन में बदलने के लिए तीन पवित्र कर्तव्य तय किए हैं—
पहला, उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर तेज़ और टिकाऊ आर्थिक विकास;
दूसरा, जनता की आकांक्षाओं को पूरा कर उन्हें समृद्धि का सशक्त भागीदार बनाना;
और तीसरा, सबका साथ, सबका विकास के विज़न को साकार करना, ताकि हर क्षेत्र और समुदाय को समान अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि बजट में 500 जलाशयों के इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट, महिला समूहों और एफपीओ (FPO) को मजबूत करने जैसे प्रावधान इन्क्लूसिव ग्रोथ को दर्शाते हैं। इससे भारत के कोस्टल क्षेत्रों के साथ-साथ इनलैंड सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल जल संसाधनों को आय के स्थायी स्रोत में बदलते हुए मछुआरों, महिला समूहों और छोटे उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़कर समावेशी विकास को धरातल पर उतारेगी।

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