राजिमलोचन नाव ल सुनके आधा ले जादा मनखे यही जानथे ये मंदिर के एके भगवान के नाम आए फेर दाई राजिम अउ भगवान लोचन महाराज के नाव जुड़े ले नाव पड़े हे राजीमलोचन।
तेली कुल म धरमदास अउ माता शांती बाई के घर जनम धरे दाई राजिम। ननपन ले ही धरमी चोला के मनखे रिहिन।धरम करम पूजा पाठ जीव सेवा म सबर दिन मन ल रमाए रहे बिहाव के उमर होइस तहन ओकर बिहाव पदमापुरी नगरी (वर्तमान में राजिम) के गरीबहा अउ भला परिवार रतनदास के बेटा अमरदास सँग हो गिस। रतनदास परिवार के गुजारा तेल बेंच के होवय। घर भर के महिनत करके घानी म तेल पेरय तेला राजिम दाई के सास बेचे ल जाय।
एक दिन राजिम के सास ससुर ल आन गाँव जाना परगे त तेल बेचे के काम ए दारी राजिम ल दे दिस। राजिम घला खुशी-खुशी सास के बात ल मान लिस अउ तेल ले छलकत करसी ल बोह के निकलगे बेचे बर। घाम के देखे अउ रद्दा रेंगत-रेंगत दाई के गला सुखागे। पानी पीये बर नदिया म गिस अउ एकठन बड़का असन पथरा म करसी ल मढ़ा दिस। जइसे ही पानी पी के आइस देखथे करसी जुच्छा (खाली) परगे हे. जम्मो तेल पथरा म रितोय कस मानो पथरा के तेल ले अभिषेक होय हावे।
दाई के मन व्याकुल होगे अउ रोए अर्जी बिनती करे लागिस भगवान मोर सास कभु काल म ए बुता तियारे रिहिसँ वहु मोर से नई हो सकिस।घर म का बताहूॅं अइसे कहिके वो पथरा के आघू म गोहार पार के रोए बर धरलिस। थोकिन बाद म देखिन खाली करसी तेल ले फेर छलके ल धर लिस। दाई ल सपना कस लागिस अउ बोही के तेल बेचे बर नंदिया के ओ पार नवापारा आगे। दाई चौक म तेल बेचत बइठे रिहिस (आज वो चौक नवापारा म तेल गुड़ी के नाम से जाने जाथे) फेर करसी ले तेल सिराबे नई करे। दाई तेल ले भरे करसी बोही के घर आगे अउ जम्मो बात ल घर के मन ल बताइस। घर के मन कथे जेंन पथरा म तेल उण्डे रिहिसँ वो कोनो साधारण पथरा नो हरे राजिम कहिके।
बिहना बेरा सबो कोई वो पथरा ल लाय बर गिस। रेती ल हटा के देखिस त भगवान बिष्णु के मूर्ति रिहिस। मूर्ति ल घर लाए बर उठाईस मूर्ति टस् ले मस् नई होय। घर वाले मन राजिम ल बोलिन दाई अरजी बिनती करिस अउ कहीस- हे लोचन (भगवान ल दाई लोचन नाव दिस ….लोचन माने आँख) हमर सँग चल हम लेगे बर आए हन आपके पूजा अउ सेवा करना चाहत हन कहिके। अउ मूर्ति उठगे जानो-मानो वो कोनो पत्ता हरु रथे वइसने। दाई अपन घर म भगवान ल घानी करा रख दिन घानी ले ही घर चलत रिहिस। घानी मेर भगवान ल रखे ले घानी के चलना बंद होगे। घर के मन कहिन अब ये घानी तोरे ले चलही राजिम कहिके दाई भगवान के अर्जी बिनती करे अउ घानी ल चलाए तेल निकाले बेचे ल तक जाए। दाई भगवान ल दाई लोचन कहिके बलाये लोचन माने आँख सबर आँखि म बसे रहे। दाई सबर दिन लोचन के सेवा सतकार पूजा पाठ ल सुग्घर ढंग ले करय। इकरे परसाद घानी सबर दिन तेल ले छलकत रहे।दाई के गरीबी घला भगागे,रोगी मन के रोग घला ये तेल म मेटा जाए अउ ए चमत्कार सबो डाहर बगर गे रिहिसॅं हे।
महापराक्रमी नरेश जगतपाल जी के कुलवंश में जन्मे महाराज विलासतुंग अपन स्वर्गवासी पुत्र के पुण्यभिवृद्धि अउ ओकर स्मृति ल अक्षुण्ण बनाये बर महानदी के तीर म मंदिर बनवाईस। फेर मंदिर बर भगवान कहा ले लाया जाए एकर सोंच म परगे।तब राजिम दाई अउ लोचन के कहानी सुनिस अउ मंत्री मन ल आदेश दिन की उहे के मूर्ति ल लाया जाए।राजिम दाई मंत्री मन ल मना कर दिस मूर्ति ल नई देव कहिके। सेना मन बलपूर्वक मूर्ति ल लाए के जोखा करिस फेर मूर्ति टस् ले मस् नई होईस। सेना लहुटगे अउ जम्मो बात राजा ल बताइस,राजा अब मंत्री मन ल सोना चांदी हीरा मोती के जेवर धराके भेजिस अउ कहीस दाई ये मूर्ति हमन ल दे देव बदला म ये मूर्ति के बरोबर जतना धन लागही हमन दे देबो, फेर राजिम दाई मना कर दिस।अब राजा मंत्री सेना सबो सँग राजिम करा आके बिनती किरिस। अउ जम्मो किस्सा ल बता के कहींन ए मूर्ति ल दे देबे त जम्मो नर नारी दर्शन करही अउ ओकर जम्मो दुःख पीरा कट जहि, सब के भला होही अउ मंदिर के सोभा घला बाढ जही।रहिगे बात भगवान अउ भक्त के त भगवान कभु तोर ल दुरिहा नई होय। लोचन के नाम ले पहिली तोर नाम लिए जाही अउ मंदिर के नाम #श्री_राजीमलोचन रखे गिस।
पदमापुरी नगर ल घला राजिम नाम दिए जाही।अतका बात ल सुन दाई दाई के करेजा कलपगे अउ राजा ल कहिन मैं भगवान के सबर दिन सेवा करना चाहत हो, राजा भी कही दिन ये मंदिर तोरे हरे दाई तै जइसन सेवा करस।
इही सेती भगवान के नाम #राजीमलोचन रखे गे हे अउ पदमापुरी नगर ल राजिम नगर कहे जाथे।
संगवारी हो साल भर म माघी पुन्नी मेला भराथे तेन ल घला राजिम माघी पुन्नी मेला के नाम ले जाने जाथे…
आप जम्मो झन ल राजिम माघी पुन्नी मेला सुभकामना।।
जानकारी कइसे लगिस सँगवारी हो कुछ पोस्ट कुछ गूगल अउ कुछ सुने कहानी आए
कहानीकार : डुपेश कुमार (डुपु)
गाँव:- मोतिमपुर (कुण्डेल)
तह:- मगरलोड जिला धमतरी (36गढ़)
