बालोद: बालोद जिले में पंचायत कार्यालयों में अब महिला जनप्रतिनिधियों के काम-काज में पतियों और अन्य सगे-संबंधियों के हस्तक्षेप पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सुनील चंद्रवंशी ने सभी जिला और जनपद पंचायतों के पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि यदि किसी महिला सरपंच, उपसरपंच या सदस्य,जिला और जनपद पंचायत के अध्यक्ष, सदस्य आदि के पति या कोई भी सगा-संबंधी सरकारी कामकाज में दखल देने की कोशिश करेंगे, तो उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायतराज अधिनियम 1993 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, बालोद जिले में पिछले समय से शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं कि महिला जनप्रतिनिधियों के पति और रिश्तेदार पंचायत स्तर पर सरकारी कामों में दखल दे रहे हैं। इसमें न केवल कार्यालयीन कार्य शामिल हैं, बल्कि सरकारी बैठकों और पंचायत आयोजनों में भी वे अपनी पत्नी की ओर से निर्णय लेने या घोषणाएं करने में शामिल हो रहे थे।
सीईओ सुनील चंद्रवंशी ने स्पष्ट किया कि पंचायत कार्यालय परिसर में किसी भी महिला पदाधिकारी के सगे-संबंधियों या रिश्तेदारों को सरकारी कार्य में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं है। किसी भी तरह की अनुचित दखल अंदाजी पाए जाने पर महिला जनप्रतिनिधि की अनुमति न होने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
इस आदेश का उद्देश्य पंचायतों में महिला नेतृत्व को सशक्त बनाना और सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं और कार्यों का संचालन पूरी तरह से महिला पदाधिकारी के अधिकार और निर्णय के अनुसार हो। जिला प्रशासन का मानना है कि सगे-संबंधियों द्वारा हस्तक्षेप करने से महिला पदाधिकारी की स्वायत्तता प्रभावित होती है और योजनाओं का सही क्रियान्वयन बाधित होता है।
जानकारी के अनुसार, इस आदेश की गंभीरता को देखते हुए सभी जनपद और ग्राम पंचायतों को पुनः निर्देशित किया गया है। महिला पदाधिकारी के कामकाज में किसी भी हस्तक्षेप की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
बालोद जिले के पंचायत कार्यालयों में अब स्पष्ट संदेश जा चुका है कि सरकारी काम में “पति-पड़ोसी-ससुराल” कोई भी दखल नहीं करेगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम महिलाओं को उनके अधिकार और जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है।
अधिकारियों का यह भी कहना है कि पहले भी शासन और प्रशासन की ओर से कई बार निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन शिकायतों के लगातार आने के कारण अब इसे कड़ाई से लागू किया जाएगा। पंचायतों के अधिकारी, कर्मचारी और पदाधिकारी सभी को सुनिश्चित करना है कि महिला जनप्रतिनिधियों के काम में कोई भी हस्तक्षेप न हो।
इस आदेश के बाद बालोद जिले की पंचायतों में प्रशासनिक कामकाज में बदलाव और महिला सशक्तिकरण की दिशा में नई शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है। अब ग्राम से लेकर जिला पंचायतों में यह साफ संदेश गया है – सरकारी काम में पति, सगे-संबंधी और रिश्तेदारों की “फ्रीस्टाइल हस्तक्षेप” बंद।
क्या लिखा है आदेश में
अध्यक्ष/उपाध्यक्ष/सदस्य, जिला पंचायत बालोद, अध्यक्ष/उपाध्यक्ष/सदस्य, जनपद पंचायत-बालोद / गुरूर / गुण्डरदेही / डौण्डी / डौण्डीलोहारा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत-बालोद / गुरूर / गुण्डरदेही / डौण्डी/ डौण्डीलोहारा,सरपंच/उपसरपंच/पंच, ग्राम पंचायत जनपद पंचायत-बालोद / गुरूर/गुण्डरदेही/डौण्डी/डौण्डीलोहारा, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ को सीईओ सुनील चंद्रवंशी ने आदेशित किया है कि पंचायतीराज संस्थाओं में निर्वाचन महिला पंचायत पदाधिकारियों के काम-काज संचालन के दौरान उनके सग-संबंधियों के हस्तक्षेप पर प्रतिबंध लगाया गया है। पंचायतीराज संस्थाओं में निर्वाचित महिला पंचायत पदाधिकारियों के काम-काज संचालन के दौरान उनके सगे-संबंधियों के हस्तक्षेप पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में दिशा-निर्देश पूर्व में भी प्रसारित किया गया है। संज्ञान में आया है कि कतिपय जिला/जनपद पंचायतों में महिला पंचायत पदाधिकारियों के सगे-संबंधियों/ रिश्तेदारों द्वारा संबंधित पंचायत स्तर के कार्यों में हस्तक्षेप / दखल अंदाजी किया जा रहा है। अतः पुनः निर्देशित किया जाता है कि पंचायत के कामकाज संचालन के दौरान पंचायत कार्यालय परिसर के भीतर महिला पंचायत पदाधिकारियों को उनके कोई भी सगे संबंधी / रिश्तेदार पंचायत के किसी कार्य में हस्तक्षेप / दखल अंदाजी नहीं करेंगे। किसी विषय पर किसी भी पदाधिकारी/कर्मियों को महिला पंचायत पदाधिकारी की ओर से निर्णय लेकर सुझाव/निर्देश नहीं देंगे, अन्यथा संबंधित महिला पंचायत पदाधिकारी के विरूद्ध छत्तीसगढ़ पंचायतराज अधिनियम 1993 के प्रावधानों के अंतर्गत नियमानुसार कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। साथ ही सभी पंचायत पदाधिकारीगण द्वारा उपरोक्त निर्देशों के पालन करेंगे।
