धान बिक्री के नाम पर रिश्वतखोरी का पर्दाफाश, यूपीआई से 15 हजार की घूस लेने वाला कृषि अधिकारी निलंबित, 50 हजार की मांग की शिकायत पर कार्रवाई — जिले में पहला मामला



बालोद। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की रिश्वतखोरी और अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश पर खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धान खरीदी में सामने आए गंभीर मामलों में डौंडी विकासखंड के ग्राम साल्हे में पदस्थ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ज्ञानेद्र प्रताप सिंह तथा डौंडीलोहारा विकासखंड के धान उपार्जन केंद्र रानाखुज्जी के समिति प्रभारी हंसराज प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

उप संचालक कृषि द्वारा जारी आदेश के अनुसार ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ज्ञानेद्र प्रताप सिंह के विरुद्ध केशव राम साहू द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि शिकायतकर्ता अपनी निजी भूमि से उपजाई गई 125 बोरी धान को ट्रैक्टर में भरकर बालोद मंडी विक्रय के लिए ले जा रहे थे, तभी रास्ते में संबंधित अधिकारी ने वाहन रोककर धान बिक्री के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय कृषि अधिकारी बालोद को प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए गए। जांच प्रतिवेदन में यह तथ्य सामने आया कि शिकायतकर्ता द्वारा 15 हजार रुपये की राशि यूपीआई के माध्यम से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के खाते में अंतरित की गई थी। जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने पर यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया। इसके फलस्वरूप छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(1) के तहत ज्ञानेद्र प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। यह जिले में धान बिक्री के नाम पर यूपीआई से रिश्वत लेने का पहला प्रमाणित मामला माना जा रहा है।

इसी तरह धान उपार्जन केंद्र रानाखुज्जी में भी गंभीर अनियमितता सामने आई। सहकारिता विभाग, खाद्य विभाग एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित दुर्ग जिला-बालोद की संयुक्त जांच टीम द्वारा की गई जांच में समिति प्रभारी हंसराज प्रजापति द्वारा कार्य के प्रति घोर लापरवाही, आर्थिक अनियमितता तथा शासन की महत्वाकांक्षी समर्थन मूल्य धान उपार्जन योजना के नियमों का उल्लंघन पाया गया।

जांच प्रतिवेदन के आधार पर छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं के सेवायुक्तों के लिए जारी सेवानियम 2018 के नियम क्रमांक 16 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए प्राधिकृत अधिकारी की बैठक दिनांक 22 जनवरी 2026 के प्रस्ताव क्रमांक 01 के अनुसार हंसराज प्रजापति, समिति प्रभारी आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित रानाखुज्जी (पंजीयन क्रमांक 201) को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

जिला प्रशासन ने दो टूक कहा है कि धान खरीदी कार्य में पारदर्शिता सर्वोपरि है। किसानों से धान बिक्री के नाम पर रिश्वत लेना या किसी भी प्रकार की अनियमितता करना गंभीर अपराध है। भविष्य में भी इस तरह के मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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