DAILY BALOD NEWS

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संबलपुर में हुआ तीन कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का आयोजन

बालोद– अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में परम वंदना माताजी भगवती देवी शर्मा जी के जन्मशताब्दी वर्ष एवं परम पूज्य गुरुदेव द्वारा प्रज्वलित अखंड ज्योति के 100 वर्ष पूरा होने के अवसर पर ग्राम संबलपुर (नांहदा) में दो दिवसीय शक्ति संवर्धन राष्ट्र जागरण तीन कुंडिय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का आयोजन किया गया। प्रथम दिवस गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं द्वारा गली भ्रमण कर गांव के लोगों को आमंत्रित किया गया तथा शाम को दीप यज्ञ के माध्यम से यज्ञ एवं गायत्री की महिमा तथा संस्कार के बारे में अवगत कराया गया। द्वितीय दिवस तीन कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें गायत्री शक्तिपीठ डौंडीलोहारा से चंद्र कुमार लारियवंशी, सेवाराम मंडावी, गिरिवर कोलियारे, कैलाश नाथ साहू, वीरेंद्र कुमार बघेल, विदेशी राम चौहान की टोली पहुंची हुई थी। कार्यक्रम की शुरुआत देव पूजन के साथ हुआ। संगीतमय वातावरण में यज्ञ में गांव के श्रद्धालुओं ने अपनी गांव के सुख शांति के लिए श्रद्धा पूर्वक आहुति डाली। कार्यक्रम का संचालन करते हुए वीरेंद्र कुमार ने कहा कि हमारे भारतीय संस्कृति के निर्माता, यज्ञ पिता और गायत्री माता है। यज्ञ का अर्थ यजन करना, परोपकार की भाव जागृत करना ,स्वार्थ से परमार्थ की ओर अग्रसर होना तथा गायत्री हमारे जीवन का सत् चिंतन, सदा व्यवहार और उत्कृष्ट व्यक्तित्व जीवन की विद्या है। हमारे भारतीय संस्कृति के चार आधार स्तंभ गौ, गंगा, गायत्री, गीता है ।इसी के आधार पर हमारे भारतीय संस्कृति टिकी हुई है। इसमें से एक भी कमी हो जाती है तो संस्कृति जो विश्व धरोहर है, जो भारत को कभी विश्व गुरु बनाने में सफल रही है, जो हमारे सुखों का आधार है इसके बगैर हम जीवन में पंगु बन सकते हैं। अतः हम सभी को गायत्री, यज्ञ और भारतीय संस्कृति के ज्ञान और विज्ञान को लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। वहीं कैलाश साहू ने लोगों को विभिन्न संस्कार के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि संस्कार ही एक ऐसा माध्यम है जिसके प्रभाव से एक सामान्य मानव देव मानव की श्रेणी में आ सकता है। हमारे वेदों में कहा गया है “जन्मना जायते शूद्रः संस्काराद् द्विज उच्यते।” अर्थात हर मनुष्य जन्म से शुद्र होता है परंतु संस्कारों के माध्यम से जीवन का परिष्कार करते हुए द्विजत्व, ब्रह्मत्व को प्राप्त कर लेता है और महान बन जाता है। यज्ञ के साथ दो गर्भवती बहनों का पुंसवन संस्कार,चार बच्चों का विद्यारंभ और एक नवजात शिशु का नामकरण संस्कार संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में अशोक साहू, उर्मिला साहू, कुंती साहू ,बीरबल साहू, मूलचंद साहू, अश्विनी साहू,सोहद्रा साहू, चुम्मन लाल साहू, उपासना साहू, छन्नी बाई ठाकुर,बोधनी सावनक, ग़जेश्वरी ठाकुर,मोनिका साहू एवं सभी ग्रामवासियों, परिजनों का विशेष सहयोग रहा।

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