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श्याम बाबा के दीवाने बनाएंगे बालोद में खाटू श्याम का पहला मंदिर, 29 को है भूमिपूजन

बालोद। जिले में श्रद्धा और आस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। खाटू श्याम जी के मंदिर निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। बालोद नगर पालिका क्षेत्र के पाररास निवासी प्रसिद्ध चाय व्यवसायी प्यारेलाल साहू ने खाटू श्याम जी मंदिर निर्माण के लिए अपनी निजी जमीन देने की बात कही है। उनके द्वारा पड़कीभाट बघमरा बायपास मार्ग पर स्वयं की जमीन पर खाटू श्याम जी का मंदिर बनवाया जाएगा। इस पहल के संकल्प मात्र से ही क्षेत्र में धार्मिक वातावरण और भक्तों में उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खाटू श्याम जी को हारे का सहारा माना जाता है और बालोद में उनके मंदिर के निर्माण से श्रद्धालुओं को बड़ी आस्था का केंद्र मिलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खाटू श्याम जी महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक का कलियुगीन स्वरूप हैं। भगवान श्रीकृष्ण के वरदान से वे श्याम नाम से पूजे जाते हैं। देशभर में, विशेषकर राजस्थान के सीकर जिले स्थित खाटू धाम में, हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बालोद में मंदिर निर्माण की यह पहल सामाजिक सहयोग और धार्मिक एकता का उदाहरण मानी जा रही है। फिलहाल यह पहल स्थानीय स्तर पर चर्चा में है और आने वाले दिनों में मंदिर निर्माण से जुड़ी औपचारिक घोषणा व कार्य प्रारंभ होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बारे में प्यारेलाल साहू का कहना है कि वह खाटू श्याम जी के अनन्य भक्त हैं और इसी भक्ति के फल स्वरुप में अपनी निजी जमीन पर स्वयं उनका मंदिर बनवा रहे हैं। रोड किनारे उनकी जमीन है जिनकी कीमत आज लाखों करोड़ों में हो सकती है। पर वह खाटू श्याम जी की भक्ति के सामने इस कीमत को कुछ भी नहीं आंकते हैं और उन्होंने अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनका मंदिर बनवाने का निर्णय लिया है। आगामी 29 जनवरी को मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन करने की तैयारी है। अगर यह निर्माण पूर्ण हुआ तो यह बालोद का पहला खाटू श्याम मंदिर हो सकता है। प्यारेलाल, श्याम बाबा के दीवाने है ,वे हमेशा बाबा के दरबार में दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए धमतरी के श्याम बाबा के मंदिर जाते रहते हैं। इस बीच उन्हे विचार आया कि श्याम बाबा जी का एक भी मंदिर बालोद में नहीं है तो बालोद में एक भव्य मंदिर बनाया जाए फिर उन्होंने ऐसा करने का संकल्प लिया। फिर क्या था बाबा के आशिर्वाद से मंदिर निर्माण के कार्य में वे संलग्न हो गए, मंदिर निर्माण में श्याम भक्त प्रेमी अपने श्रद्धा अनुसार दान दक्षिणा भी दे रहे हैं।

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