विकासखंड डौंडीलोहारा का निरंतरता, नवाचार और उत्कृष्ट परिणामों की ओर अग्रसर पहल



बालोद– विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री हिमांशु मिश्रा की दूरदर्शी सोच, सक्रिय नेतृत्व और संकुल समन्वयकों के समन्वित सहयोग से विकासखंड डौंडीलोहारा में लगातार दूसरे वर्ष भी जोनवार जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा मॉक टेस्ट का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। पिछले वर्ष मिली अपार सफलता के बाद इस वर्ष बच्चों में और अधिक उत्साह देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप 1500 से अधिक विद्यार्थी इस परीक्षा में सम्मिलित हुए और लाभान्वित हुए। यह निरंतरता दर्शाती है कि यह कार्यक्रम अब विकासखंड में एक सफल वार्षिक शैक्षणिक अभियान का रूप ले चुका है।

नवोदय मॉक टेस्ट – दो वर्षों में शिक्षा की दिशा में मजबूत कदम

पहले वर्ष इस पहल की शुरुआत बच्चों को नवोदय परीक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी। दूसरे वर्ष आते-आते यह कार्यक्रम बच्चों, अभिभावकों और स्कूलों के लिए शिक्षा सुधार का प्रभावी मॉडल बन गया है। दो सालों में इस पहल ने बच्चों में प्रतियोगी परीक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई, परीक्षा पैटर्न की समझ को मजबूत किया, ग्रामीण बच्चों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी, और अधिक विद्यार्थियों को नवोदय विद्यालय में चयनित होने का अवसर बढ़ाया।

इस वर्ष की प्रमुख उपलब्धियाँ (2025–26)

1500+ विद्यार्थियों की रिकॉर्ड सहभागिता, सभी जोनों में सफल संचालन, छात्रों को वास्तविक परीक्षा वातावरण में अभ्यास कराने का अवसर, प्रश्न-पत्र आधारित विश्लेषण, मेंटरशिप और सुधार के सुझाव, शिक्षक–विद्यार्थी संवाद द्वारा परीक्षा रणनीति का विकास, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष विद्यार्थियों की संख्या, तैयारी स्तर और प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

शिक्षा अधिकारी श्री हिमांशु मिश्रा की पहल का बढ़ता प्रभाव

लगातार दो वर्षों से संचालित इस अभियान ने साबित किया है कि जब नेतृत्व दूरदर्शी हो और टीम समर्पित हो, तो ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम दे सकते हैं। श्री मिश्रा की यह पहल प्रतिभाशाली बच्चों को सही दिशा देने में निर्णायक, ग्रामीण शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण, और नवोदय चयन प्रतिशत बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है।

संकुल समन्वयकों एवं शिक्षक दल की सराहनीय भूमिका

इस महत्त्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में सभी संकुल समन्वयकों, मुख्य पाठशालाओं और शिक्षक दल ने परीक्षा तैयारी, प्रश्न-पत्र निर्माण, परीक्षा प्रबंधन, विश्लेषण कार्य जैसी जिम्मेदारियाँ बेहतरीन ढंग से निभाईं। उनके प्रयासों की वजह से विद्यार्थियों को उत्कृष्ट मंच मिला।

अभिभावकों की प्रतिक्रिया और बच्चों का उत्साह

दूसरे वर्ष इस स्तर पर आयोजित मॉक टेस्ट से अभिभावक बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यह पहल बच्चों को वास्तविक प्रतियोगी वातावरण देती है और उनकी तैयारी में निरंतरता बनाए रखती है। बच्चों ने भी अनुभव साझा करते हुए बताया कि मॉक टेस्ट से उन्हें समय प्रबंधन, कठिन प्रश्नों को हल करने की तकनीक, तर्कशक्ति आधारित सवालों की समझ में अत्यधिक मदद मिली।

भविष्य की दिशा – एक नया शैक्षणिक अभियान

दो वर्षों की इस सफलता ने यह संकेत दे दिया है कि यह कार्यक्रम अब विकासखंड के स्थायी नवाचार के रूप में विकसित हो चुका है। आगामी महीनों में नियमित अभ्यास टेस्ट, विषयवार कार्यशालाएँ, व्यक्तिगत कोचिंग, मेधावी बच्चों की विशेष क्लास
जैसी पहलें भी शुरू की जाएँगी।

ये निकलता है निष्कर्ष

डौंडीलोहारा विकासखंड में लगातार दूसरे वर्ष आयोजित यह जोनवार मॉक टेस्ट न सिर्फ एक परीक्षा था, बल्कि ग्रामीण शिक्षा सुधार का मजबूत आंदोलन है। यह पहल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है और नवोदय जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में विकासखंड के श्रेष्ठ प्रदर्शन की नींव बन रही है। यह अभियान आने वाले वर्षों में और अधिक बच्चों को सफलता की ओर ले जाएगा यही इसका वास्तविक उद्देश्य और उपलब्धि है।

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