DAILY BALOD NEWS

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जिला प्रशासन बालोद द्वारा धान के अवैध खरीदी बिक्री के रोकथाम पर की जा रही है निरंतर कार्रवाई, देखिए अब कहां हुई जब्ती

बालोद– कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने निर्देशानुसार जिला प्रशासन द्वारा धान के अवैध खरीदी बिक्री के रोकथाम हेतु निरंतर कार्रवाई की जा रही है। जिसके अंतर्गत अवैध परिवहन एवं थोक एवं फुटकर व्यापारियों द्वारा पंजीकृत किसानों के रकबे में धान न खपायें इस दृष्टि से जिला एवं तहसील स्तरीय उडनदस्ता दल का गठन किया गया है। जिला खाद्य अधिकारी ने बताया कि विगत 21 नवंबर 2025 को डौण्डीलोहारा विकासखंड में धान खरीदी केन्द्रों की जांच के दौरान मालीघोरी (कलकसा) के पास वाहन क्रमांक सीजी 04 पीपी 4235 का जांच किये जाने पर मंडी अनुज्ञा में दर्ज अनुसार धान 200 क्विंटल (500 कट्टा) खदवन दर्ज था, किंतु मंडी बालोद में जाच किये जाने पर धान 316.80 क्विंटल (704 कट्टा) मोटा, पतला एवं सरना पृथक-पृथक बोरी में पाया गया। उक्त धान गायत्री ट्रेडर्स द्वारा जैन ट्रेडर्स प्रोप्रा गौतम जैन भीमकन्हार, को अनुज्ञा जारी किया गया था। धान के किस्म एवं मात्रा अधिक पाये जाने के कारण धान के अवैध परिवहन अंतर्गत उक्त धान 316.80 क्विंटल को मंडी अधिनियम के तहत जप्त कर मंडी बालोद अपने सुपुर्द में रखा है। कृषि उपज मंडी बालोद से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर धान की किस्म खदवन एवं मात्रा कम बताकर मंडी शुल्क की चोरी एवं अवैध परिवहन के कारण उक्त वाहन क्रमांक सीजी 04 पीपी 4235 को आगामी समय में अवैध धान परिवहन ना कर सके इस दृष्टि से थाना बालोद के अभिरक्षा में दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में मंडी अधिनियम अंतर्गत कुल 43 प्रकरण बनाये गये हैं जिसमें कुल 3877.08 क्विंटल धान की जप्ति की गई है। जिसका वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर 81 लाख 41 हजार 865 रूपए की है। उन्होंने बताया कि 25 नवंबर को विकासखंड डौण्डी अंतर्गत उडन दस्ता दल द्वारा ग्राम मथेना के फुटकर व्यापारी ईश्वर साहू पिता आशा राम साहू, घर सह गोदाम से 1119 कट्टा (425.22 क्विंटल) धान मंडी अधिनियम के तहत जप्तती की कार्यवाही की गई है। जिसे धान उपार्जन केन्द्रों में पंजीकृत किसानों के रकबे में खपाने की दृष्टि से रखा गया था, जबकि फुटकर व्यापारी को एक समय में नियमानुसार 10 क्विंटल तक धान रखने का अधिकार है। उन्होंने जिले के सभी पंजीकृत किसानों से अपील की है कि वे किसी भी व्यापारी या कोचिये के बहकावे में न आएं, अपने स्वयं के रकबे पर उत्पादित धान को समर्थन मूल्य पर विक्रय करें ।

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