भाजी म सिरी भगवान बसे,
अउ मास म बसे मसान जी।
मोर गोठ ल गुनव थोरकिन,
जम्मों लइका सियान जी।
पर के बुध म परबुधिया आथे,
अपन बुध चलथे बुधमान जी।
मोर गोठ कतका सहीं हे,
बतावव सँगी मितान जी।
अपन धन दौलत के कोनो ह,
झन करव गरब गुमान जी।
अरे सब सँग नियाव करहि,
ऊपरवाला ओ भगवान जी।
अपनेच म रमे रहना हे नोकेश,
दूसर के म झन देबे धियान जी।
दूसर के खुशी म जेन खुश होथे,
उहि हरे मनखे के पहिचान जी।
लिखईया – नोकेश तांडे
ग्राम – अर्जुनी(गुरुर) जिला – बालोद
