महिला के साथ दुष्कर्म करने पर आरोपी को मिला 10 वर्ष का कारावास

बालोद – ताजुद्दीन आसिफ, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) बालोद (छ.ग.) के द्वारा आरोपी द्वारिका मंडावी उम्र 21 वर्ष, निवासी वार्ड नं. 19 शिव मंदिर मरार पारा बालोद, थाना-बालोद, जिला-बालोद (छ.ग.) को भा.द.सं. की धारा 341 के तहत 01 माह का साधारण कारावास, धारा 354 (ख) के अपराध में 05 वर्ष का सश्रम कारावास व 100/- अर्थदण्ड, धारा 506 के आरोप में 01 वर्ष का कारावास, धारा 376/511 के आरोप में 10 वर्ष का सश्रम कारावास व 500/- में अर्थदण्ड, धारा 382 के आरोप में 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100/- रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।अभियोजन की ओर से प्रकरण की पैरवी सनद कुमार श्रीवास्तव, अतिरिक्त लोक अभियोजक के द्वारा किया गया, जिसके अनुसार-प्रकरण की पीड़िता दिनांक 04/04/2024 को थाना-बालोद में रिपोर्ट दर्ज करायी कि दिनांक-04/04/2024 रात्रि 08:00 बजे पीड़िता सायकल से रेल्वे कॉलोनी की तरफ से रेक पाइंट होते हुए अपने घर खैरतराई जा रही थी, तभी एक अज्ञात व्यक्ति पीछे से सीटी बजाते हुए आ रहा था। तब पीड़िता ने अपनी सायकल किनारे कर ली, किंतु अचानक वह व्यक्ति उसके सिर में काले गमछे को डालकर उसकी गर्दन को पीछे से पकड़ लिया और सायकल सहित उसके गिरते ही उसकी गर्दन को दबाकर घसीटते हुए पीड़िता को झाड़ की ओर ले गया और पीड़िता का बलात्कार करने के आशय से उसकी साड़ी और पेटीकोट को खींचकर उसे निर्वस्त्र कर दिया। पीड़िता किसी प्रकार अपने आप को बचाकर घटना स्थल से भागी। उक्त अज्ञात व्यक्ति ने पीड़िता की सायकल के झोले में रखे पैसे, पीड़िता के पति एवं पुत्री का आधार कार्ड एवं कीपेड मोबाईल फोन को चोरी कर ले गया। उक्त रिपोर्ट के आधार पर अज्ञात अभियुक्त के विरूद्ध थाना-बालोद में भारतीय दण्ड संहिता धारा-341, 376, 511, 354 (ख), 506, 382 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के दौरान अभियुक्त को गिरफ्तार कर उसकी पहचान कार्यवाही पीड़िता से करवायी गई और अभियुक्त के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर उसकी निशानदेही पर उसके आधिपत्य से पीड़िता की चोरी किया हुआ सामान जप्त किया गया।अभियुक्त के विरूद्ध उक्त अपराध के सबूत पाये जाने पर तथा प्रकरण की सम्पूर्ण विवेचना उपरांत माननीय न्यायालय में दिनांक 28-05-2024 को अभियोग पत्र पेश किया गया। प्रकरण में आये प्रबल एवं ठोस साक्ष्य के आधार पर आरोपी को उक्त दण्ड से दण्डित किया गया। प्रकरण की विवेचना उ.नि. कमला यादव के द्वारा किया गया था।

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