DAILY BALOD NEWS

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चैतन्य देवियों की झांकी ने लोगों को किया मंत्रमुग्ध, आत्मनियंत्रण और एकाग्रता का जीवंत प्रदर्शन

बालोद – प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय आमापारा बालोद द्वारा आयोजित चैतन्य देवियों की झांकी का उद्घाटन गुरुवार को बहुत ही धूमधाम से किया गया। इस अवसर पर बालोद के तहसीलदार- भ्राता आशुतोष शर्मा जी, बालोद थाना प्रभारी – भ्राता शिशुपाल सिन्हा जी, सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री – भ्राता सुधाकर जी एवं ब्रह्माकुमारीज बालोद की मुख्य संचालिका बी के विजयलक्ष्मी दीदी सहित संस्था के सैकड़ो भाई बहने उपस्थित थे।

अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के पश्चात देवियों की आरती पूजा अर्चना करके विधि पूर्वक उद्घाटन किया गया।

राजयोगिनी बीके विजयलक्ष्मी दीदी ने एकाग्र मुद्रा में बैठी हुई चैतन्य देवी स्वरूपा बहनों की स्थिरता का राज समझाते हुए बताया कि इतनी स्थिरता मात्र राजयोग की साधना से ही सहज संभव हो पाता है। राजयोग के अभ्यास से मन को एकाग्र करने से तन पर नियंत्रण अपने आप प्राप्त हो जाता है। इसी का प्रत्यक्ष उदाहरण यह चैतन्य देवियों की झांकी है, यह झांकी अगले नवमी तक प्रतिदिन शाम 7:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक संचालित होगी।

बालोद तहसीलदार श्री आशुतोष शर्मा जी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था पर पहली बार आगमन हुआ और मैंने संस्था के बारे में जैसा सोचा था वैसा ही पाया। यहां आने पर जो खुशी व शांति प्राप्त हुई है वह शब्दों में बयां कर पाना असंभव है।

थाना प्रभारी भ्राता शिशुपाल सिंहा जी ने कहा कि मैं अपनी ट्रेनिंग के समय से ही ब्रह्माकुमारी संस्था के संपर्क में आया हूं और जहां भी जाता हूं मैं संस्था के कार्यक्रमों में जरूर सम्मिलित होता हूं क्योंकि यहां प्राप्त होने वाली शांति मुझे नई ऊर्जा से कार्य करने में सहायता प्रदान करती है । मैं दीदियों को धन्यवाद देता हूं जो मुझे यहां आने का अवसर प्रदान किया।

गौरतलब है कि आत्मज्ञान भवन आमापारा बालोद में चतुर्थी से नवमी तक चैतन्य देवियों की झांकी 25 सितंबर से 30 सितंबर तक शाम 7:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक प्रतिदिन संचालित होगी। जिसमें चैतन्य बहने देवी स्वरूप में जड़ मूर्ति के समान एकाग्र मुद्रा में अनवरत योग साधना में ऐसी स्थापित होती है मानो कोई मिट्टी की मूर्ति सामने बैठी हों।अतः सभी श्रद्धालु भाई बहने इस अनोखी झांकी को देखने के लिए सादर आमंत्रित हैं। कार्यक्रम का संचालन भोपसिंह साहू ने किया।

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