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टीबी मुक्त भारत अभियान को मिली नई गति: सेंट्रल टीबी डिविजन और WHO की संयुक्त टीम ने किया गुरूर का दौरा

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा को सौंपी अभियान की प्रगति रिपोर्ट, गांव-गांव पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं

बालोद/गुरूर। देश को क्षय रोग (टीबी) से मुक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित “टीबी मुक्त भारत अभियान–100 दिवसीय अभियान (गांव-गांव, शहर-शहर)” के अंतर्गत मंगलवार को सेंट्रल टीबी डिविजन (CTD) एवं राज्य स्तरीय संयुक्त टीम ने विकासखंड गुरूर का सघन दौरा कर अभियान की जमीनी प्रगति का मूल्यांकन किया। इस दौरान टीम ने विशेष शिविरों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गुरूर का निरीक्षण कर राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।

केंद्रीय और राज्य स्तरीय विशेषज्ञों ने किया निरीक्षण

निरीक्षण दल में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञ शामिल रहे। सेंट्रल टीबी डिविजन से डॉ. वीना धवन (अतिरिक्त आयुक्त, CVAC एवं CTD), डॉ. राधा तरालेकर (भारत सरकार–WHO राष्ट्रीय सलाहकार), डॉ. ज्योति कायस्थ (राष्ट्रीय सलाहकार) एवं श्री राजन चौहान (वित्त सलाहकार, CTD) उपस्थित रहे।

राज्य स्तर से डॉ. मनीष मसीह, डॉ. रोचक सक्सेना (WHO सलाहकार), श्री निशांत मेश्राम (माइक्रोबायोलॉजिस्ट), डॉ. रेणुका प्रसन्नो (प्रभारी STDC) तथा श्रीमती दीक्षा पुरी (सलाहकार, PMTBMA) ने अभियान की गतिविधियों का निरीक्षण किया। स्थानीय स्तर पर जिला क्षय अधिकारी डॉ. जी. आर. रावटे एवं जिला टीबी उन्मूलन टीम ने समन्वय की जिम्मेदारी निभाई।

कलेक्टर से मुलाकात, जिले को टीबी मुक्त बनाने पर हुई चर्चा

विजिट के उपरांत संयुक्त टीम ने जिला कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा से सौजन्य भेंट कर जिले में संचालित 100 दिवसीय अभियान की प्रगति, सक्रिय मरीज खोज (Active Case Finding) और उपचार सेवाओं की उपलब्धता पर विस्तृत जानकारी साझा की।

कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि जिले को पूर्णतः टीबी मुक्त बनाने के लिए प्रशासन हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा तथा आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

सीएचसी गुरूर और विशेष शिविरों का किया गया मूल्यांकन

संयुक्त टीम ने ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए विशेष शिविरों का निरीक्षण कर मरीजों की जांच, परामर्श और दवा वितरण व्यवस्था का अवलोकन किया। इसके बाद सीएचसी गुरूर में टीबी जांच प्रयोगशाला, डॉट्स सेंटर तथा मरीजों के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई।

निरीक्षण के दौरान टीम ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिनों एवं एएनएम के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें टीबी के संभावित लक्षणों वाले मरीजों की समय पर पहचान कर उपचार से जोड़ने के निर्देश दिए।

100 दिवसीय अभियान के माध्यम से टीबी उन्मूलन की दिशा में जिले में लगातार जनजागरूकता, स्क्रीनिंग और उपचार सेवाओं को गांव-गांव एवं शहर-शहर तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।

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